भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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पृष्ठ 706

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एकाहाः व्रात्यस्तोमः [ १८ । २५ । ] बौधायनश्रौतसूत्रम् । ३७३ विच्छिन्नसोमपीथ इव ह्येषो ऽनाग्न्यान्'स्तेषां ये ऽनाहिताग्नयस्ते यथागृहं विपरेत्याग्नीनाधाय त्रयस्त्रिꣳशतात्रयस्त्रिꣳशता दक्षिणाभि स्थपतिमुपसमायन्ति ' तेषां ब्रह्मबन्धुरमागधो मागधवाक्यो ब्रह्मबन्धुरपुꣳश्चलू पुꣳश्चलूवाक्या जरत्कद्रथो जरत्प्रयोग्याभ्यां¹ युक्तो ' वृद्धो वा एष यो ब्रह्मबन्धुरमागधो ५ मागधवाक्यो ' वृद्धा ब्रह्मबन्धुरपुꣳश्चलू पुꣳश्चलूवाक्या ' वृद्धो जरत्कद्रथो जरत्प्रयोग्याभ्यां¹ युक्तो ' वृद्धेनैव वृद्धं निरवदयते तदेतद्व्रात्यधनꣳ समवग्राणꣳ दण्डोपानह