बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
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/दौ)
ष्या (ष् + य + ा)
ञ्छ (ञ + छ)
क ला नि त्ये त त्सम ा दा य
Yes, दौष्याञ्छकलानित्येतत्समादाय!
4. संप्रच्छन्ना १५
Line 16:
अम्बरीषं वोत्तपनीयं वाभिप्रव्रजन्ति । तस्मिन्दौष्याञ्छकलान्सं-
Wait, तस्मिन्दौष्याञ्छकलान्सं-
Line 17:
प्रकीर्य बर्हिषा परिस्तीर्याज्यं विलाप्योत्पूयाञ्जलिनोपस्ती-
Let's check the words:
प्रकीर्य
बर्हिषा
परिस्तीर्याज्यं
विलाप्योत्पूयाञ्जलिनोपस्ती-
Wait, विलाप्योत्पूयाञ्जलिनोपस्ती- or विलाप्योत्पूयाञ्जलिनोपस्तीर्य? It ends with उपस्ती- hyphenated to the next page!
Look at line 17:
प्रकीर्य बर्हिषा परिस्तीर्याज्यं विलाप्योत्पूयाञ्जलिनोपस्ती-
Now let's check the footnotes: Footnote 1: