बेताल पच्चीसी
Betal Pachisi
महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंको रोकना चाहिए। ब्राह्मण जो कन्या आपके यहां छोड़ गया है, उससे मंत्रीपुत्र का विवाह कर देना चाहिए। ब्राह्मण जब लौटकर आएगा और क्रोध करेगा, तब उसका प्रबंध कर लिया जाएगा।"
प्रजाजनो का यह कहना राजा ने मान लिया। वह उस बनी हुई कन्या को मंत्रीपुत्र के हाथो सौंपने के लिए शुभ-मुहूर्त निश्चित करके राजकुमारी के घर से उसे ले आया। तब कन्या-रूप वाले मन स्वामी ने राजा से कहा—'महाराज ! मै दूसरे के द्वारा किसी अन्य पुरुष के लिए लाई गई हूं। हे राजन ! यदि फिर भी आप मुझे किसी और को देना चाहते हैं तो वैसा ही करे। इससे जो धर्म या अधर्म होगा, वह आपका होगा। मै विवाह तो करूंगी लेकिन तब तक अपने पति की सेज पर नहीं जाऊंगी जब-तक कि ब्राह्मण छ माह का तीर्थ भ्रमण करके नहीं लौटेंगे। यदि ऐसा नही हुआ तो मै दातों से अपनी जीभ काटकर अपना प्राणांत कर लूंगी।'
कन्या का रूप धारण करने वाले मनःस्वामी ने जब यह कहा तो राजा ने जाकर मंत्रीपुत्र को समझाया। उसने भी निश्चिंत होकर यह बात मान ली और शीघ्र ही उससे विवाह कर लिया।
अनन्तर, एक ही सुरक्षित घर में अपनी पहली पत्नी मृगांकवती और उस बनावटी पत्नी को रखकर, स्त्री को प्रसन्न करने की इच्छा से वह मूर्ख तीर्थयात्रा के लिए बाहर चला गया। तत्पश्चात् स्त्री रूप धारण किए मनःस्वामी मृगांकवती के साथ एक ही महल में रहने लगा।
मनःस्वामी को इस प्रकार वहां रहते हुए कुछ समय बीत गया। एक बार रात में जब वह मृगांकवती के शयनकक्ष में लेटा हुआ था और परिचारिकाएं बाहर सो रही थीं, तभी उससे मृगांकवती ने एकांत में कहा—"सखी, मुझे नींद नहीं आ रही, कोई कथा सुनाओ।"
यह सुकर मनःस्वामी ने उसे वह कथा सुनाई जिसमें प्राचीन काल में सूर्यवंश के ऐल नामक राजश्री को गौरी के शाप से संसार को मोहित करने वाला स्त्री-रूप प्राप्त हुआ था। नंदनवन मे उसे देखकर बुध मोहित हो गए थे और एक-दूसरे की प्रीति मे हुए उनके संभोग से पुरुस्वा का जन्म हुआ था।
यह कथा सुनाकर उस धूर्त ने पुनः कहा—"इस तरह देवताओं के आदेश या मंत्र और औषधियों के प्रभाव से कभी-कभी पुरुष स्त्री बन जाते हैं और कभी स्त्री पुरुष बन जाती है। इस प्रकार कभी-कभी बड़ों में भी कामज संयोग हुआ करते हैं।"
मृगांकवती को विवाह के बाद ही उसका पति छोड़ गया था। मनःस्वामी के साथ रहने के कारण उसे उस पर भरोसा हो गया था। मनःस्वामी की बात सुनकर उसने कहा—"सखी, तुम्हारी यह कथा सुनते ही मेरा शरीर कांपने लगा है, हृदय बैठा-सा जा रहा है, बताओ तो भला यह कैसी बात है?"
यह सुनकर स्त्री बना मनःस्वामी उससे बोला—"सखी, तुममें काम की जागृति 92 ▢ बेताल पच्चीसी