भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । १०६९

नीमकी छाल, अनन्तमूल, अतीस, कुटकी, त्रायमाणा, त्रिफला, नागरमोथा, पर्पटा, बापची, अनन्तमूल, वच, खैर, लालचन्दन, पाठ, सोंठ, कचूर, भारङ्गी, अडूसा, चिरायता, कुडेकी छाल, निसोत, इन्द्रायण, मूर्वा, वायविडङ्ग, इंद्रजौ, विष, चीता, हस्तिकर्ण ( पलाश ), गिलोय, बकायन, परवल, हल्दी, दारुहल्दी, पीपल, अमलतास, सतौना, कालाजेंत, लालचोटली, जिमीकन्द, गन्धेजवास, मंजीठ, चकवडके बीज, मुसली, फूलप्रियंगु, कायफल, शरफोंका और शिरषकी छाल इनको अलग अलग आठ तोले लेकर ३२ सेर जलमें पकावे । जब पकते पकते आंठवाँ भाग जल शेष रहजाय तब उतारकर छानलेवे ॥ १२०-२४ ॥

भल्लातकसहस्राणि त्रीणि छित्त्वाऽर्मणेऽम्भसि ।
चतुर्भागावशेषं तु कषायमवतारयेत् ॥ २५ ॥
तौ कषायौ समादाय वस्त्रपूतौ च कारयेत् ।
गुडस्य तु तुलां ताभ्यां कषायाभ्यां पचेद्भिषक् ॥ २६ ॥
भल्लातकसहस्रानां मज्जानं तत्र दापयेत् ।
त्रिकटुत्रिफलामुस्तसैन्धवानां पलं पलम् ॥ २७ ॥
दीप्यकस्य पलं चैव चातुर्जातं पलांशिकम् ॥
सञ्चूर्ण्य प्रक्षिपेदत्र गन्धकं च चतुःपलम् ॥ २८ ॥
स्निग्धभाण्डे विनिक्षिप्य स्थापयेत्कुशलो भिषक् ।
महाभल्लातको ह्येष महादेवेन निर्मितः ॥ २९ ॥
जगतस्तु हितार्थाय—

फिर इसी प्रकार ३००० भिलावोंको टुकडे करके ३२ सेर जलमें पकावे । जब ८ सेर जल रहजाय तब उतारकर छानलेवे । पश्चात् दोनों क्वाथोंको मिलालेवे और उनमें १०० पल पुराना गुड और उपर्युक्त भिलावोंकी १००० गिरी डालकर पकावे । जब पकते पकते अवलेहकी समान गाढा होजाय तब उसमें हरड, बहेडा, आमला, सोंठ, मिरच, पीपल, नागरमोथा, सैंधानमक और अजवायन प्रत्येकका चूर्ण चार चार तोले तथा दारचीनी, इलायची, तेजपात, नागकेशर इनका चूर्ण पृथक् पृथक् एक एक तोला और शुद्ध गन्धक १६ तोले इन सबोंको एकत्र बारीक पीसकर डालदेवे और करछीसे सबको एकमएक मिलादेवे । जब अच्छेप्रकार सिद्ध होजाय तब इस अवलेहको उत्तम चिकने बर्त्तनमें भरकर रखदेवे । यह महाभल्लातकनामक योग देवाधिदेव श्रीमहादेवजीने सांसारिक प्राणियोंके हितके लिये पूर्वकालमें निर्माण किया है ॥