भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३८० | भैषज्यरत्नावली । | [ वीर्यस्तम्भना धि० ]
आकारकरभः शुण्ठी लवङ्गं कुंकुमं कणा ।
जातीफलं जातिपुष्पं चन्दनं कार्षिकं पृथक् ॥ ८ ॥
चूर्णयेदहिफेनं तु तत्र दद्यात्पलोन्मितम् ।
सर्वमेकीकृतं माषमात्रं क्षौद्रेण भक्षयेत् ॥ ९ ॥
शुक्रस्तम्भकरं पुंसामिदमानन्दकारकम् ।
नारीणां प्रीतिजननं सेवेत निशि कामुकः ॥ १० ॥
अकरकरा, सोंठ, लौंग, केशर, पीपल, जायफल, चमेलीके फूल और लाल चन्दन ये प्रत्येक औषधि एकएक कर्ष और अफीम चार तोले प्रमाण लेवे सबको एकत्र कूटपीसकर बारीक चूर्ण करलेवे । इस चूर्णको कामी पुरुष प्रतिदिन रात्रिमें एकएक माशे प्रमाण शहदमें मिलाकर सेवन करे । यह चूर्ण अत्यन्त वीर्यस्तम्भ एवं पुरुष तथा स्त्रियोंके प्रेम और अत्यानन्दको बढानेवाली है ॥ ८-१० ॥
इति भैषज्यरत्नावल्यां वीर्यस्तम्भनाधिकारः ॥
इति श्रीवैद्य-शंकरलालकृतसरलाख्यया भाषाटीकया सहिता
भैषज्यरत्नावली सम्पूर्णा ॥
पुस्तक मिलनेका ठिकाना—
| खेमराज श्रीकृष्णदास, <br> अध्यक्ष-“श्रीवेङ्कटेश्वर” स्टीम्-प्रेस <br> बम्बई. | गङ्गाविष्णु श्रीकृष्णदास, <br> अध्यक्ष-‘लक्ष्मीवेङ्कटेश्वर’ स्टीम्-प्रेस <br> कल्याण-बम्बई |
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