भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ
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( १२ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दाहकी चिकित्सा। | आमाशयगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | |
| चन्दनादि क्वाथ, पर्पटादि क्वाथ | ५९० | पक्वाशयगत-वातकी चिकित्सा | ,, |
| दाहान्तकरस | ,, | बस्त्यादिगत-वातकी चि० | ,, |
| सुधाकररस | ५९१ | स्नायुसन्ध्यस्थिगत-वातकी चि० | ,, |
| कुशाद्यतैल और घृत, दाहरोगमें पथ्य | ,, | त्वग्गत वातकी चि० | ६१७ |
| दाहरोगमें अपथ्य | ५९३ | रक्तगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगकी चिकित्सा। | मांसमेदोगत वातकी चि० | ,, | |
| अञ्जन | ५९५ | अस्थिमज्जागत-वातकी चि० | ,, |
| निम्बधूप, महाधूप, सारस्वत चूर्ण | ५९६ | शुक्रगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादपर्पटीरस, उन्मादभञ्जिनी | ५९७ | शुष्कगर्भकी चि० | ,, |
| उन्मादगजकेसरी, उन्मादगजांकुश | ५९८ | शिरोगत-वातकी चि० | ६१८ |
| उन्मादभञ्जनरस, भूतांकुश रस | ५९९ | व्यादितकी चि० | ,, |
| चतुर्भुजरस | ६०० | अर्दितकी चि० | ,, |
| हिंग्वाद्यघृत, लशुनाद्यघृत | ६०१ | मन्यास्तम्भकी चि० | ,, |
| पानीयकल्याणघृतं | ६०२ | ग्रीवास्तम्भकी चि० | ६१९ |
| क्षीरकल्याणघृत, महाकल्याणघृत | ६०३ | जिह्वास्तम्भकी चि० | ,, |
| स्वल्पचैतसघृत | ,, | कुब्जकी चि० | ,, |
| महापैशाचिकघृत, शिवाघृत | ६०४ | आध्मानकी चि० | ,, |
| शिवातैल | ६०६ | अष्ठीला और प्रत्यष्ठीलाकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगमें पथ्य | ६०७ | गृध्रसीकी चि० | ६२० |
| उन्मादरोगमें अपथ्य | ६०८ | वातकण्टककी चि० | ,, |
| अपस्माररोगकी चिकित्सा। | खल्वकी चि० | ,, | |
| सूतभस्मप्रयोग, इन्द्रब्रह्मवटी | ६१० | शिराग्रहकी चि० | ,, |
| भूतभैरव रस, वातकुलान्तक | ६११ | अपतानककी चि० | ६२१ |
| कूष्माण्डघृत, ब्राह्मीघृत | ६१२ | पक्षाघातकी चि० | ,, |
| स्वल्पपञ्चगव्य घृत | ,, | अपतन्त्रककी चि० | ,, |
| बृहत्पञ्चगव्य घृत | ,, | खञ्ज और पंगुताकी चि० | ६२२ |
| महाचैतसघृत | ६१३ | क्रोष्टुशीर्षकी चि० | ,, |
| पलंकषाद्यतैल | ६१४ | कलायखञ्जकी चि० | ,, |
| अपस्माररोगमें पथ्यापथ्यविधि | ६१५ | वाह्यान्तरायामककी चि० | ,, |
| वातव्याधिकी चिकित्सा। | त्रिकशूलकी चि० | ,, | |
| कोष्ठगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | पाददाहकी चि० | ६२३ |
| पादहर्षकी चि० | ,, |