भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका । ( ११ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शृङ्गाराम्र | ५२५ | श्वासरोगमें पथ्य, श्वासरोगमें अपथ्य | ५५६ |
| सार्वभौमरस | ५२६ | स्वरभंगकी चिकित्सा | ५५७ |
| बृहच्छृङ्गाराम्र | ५२७ | चव्यादिचूर्ण, त्र्यम्बकाभ्र | ५५८ |
| नित्योदय रस | ५२८ | भैरवरस, किन्नरकण्ठरस | ५५९ |
| वसन्ततिलक रस, व्याघ्रीहरीतकी | ५२९ | निदिग्धिकावलेह | ५६० |
| वासावलेह | ५३० | व्याघ्रीघृत, सारस्वतघृत (ब्राह्मीघृत) | ५६१ |
| कण्टकार्यावलेह, कण्टकारीघृत | ५३१ | भृंगराजाद्यघृत, स्वरभंगमें पथ्य | ५६२ |
| दशमूलषट्पलक घृत | ,, | स्वरभंगमें अपथ्य | ५६३ |
| छागलाद्यघृत | ५३२ | अरोचकचिकित्सा । | |
| कुंकुमाद्यघृत | ५३३ | यमानीषाडव, कलहंस कांजी | ५६५ |
| चन्दनाद्यतैल, वासा-चन्दनाद्यतैल | ५३४ | तिन्तिडीपानक, रसाला | ५६६ |
| कासरोगमें पथ्य | ५३५ | रसकेसरी, सुधानिधि रस | ५६७ |
| कासरोगमें अपथ्य | ५३६ | सुलोचनाभ्रक | ५६८ |
| हिक्का-श्वासरोगकी चि० | ५३७ | अरोचकमें पथ्य | ५६९ |
| दशमूलादि, शठ्यादि, वासादि क्वाथ | ५४० | अरोचकमें अपथ्य | ५७० |
| शुण्ठीभार्ङ्गी क्वाथ, हरिद्रादिचूर्ण... | ,, | छर्दि ( वमन ) चिकित्सा । | |
| शृङ्ग्यादिचूर्ण, विजयवटी | ५४१ | एलादिचूर्ण | ५७२ |
| डामरेश्वररस | ,, | रसेन्द्र, वृषध्वजरस, पद्मकाद्यघृत | ५७३ |
| महाश्वासहरिलौह | ५४२ | छर्दिरोगमें पथ्य | ५७४ |
| पिप्पल्याद्यलौह, श्वासकुठाररस... | ५४३ | छर्दिरोगमें अपथ्य | ५७५ |
| महाश्वासकुठार रस | ,, | तृषाकी चिकित्सा । | |
| श्वासभैरवरस, श्वासचिन्तामणि... | ५४४ | रसादिचूर्ण, महोदधिरस | ५७९ |
| श्वासकासचिन्तामणि, बृहन्मृगाङ्कवटी | ५४५ | तृष्णारोगमें पथ्य | ,, |
| कनकासव | ५४६ | तृष्णारोगमें अपथ्य | ५८० |
| शृङ्गीगुडघृत | ५४७ | मूर्च्छारोगकी चिकित्सा | ५८१ |
| भार्ङ्गीशर्करा | ५४८ | मूर्च्छान्तकरस, अश्वगन्धारिष्ट | ५८३ |
| भार्ङ्गीगुड | ५४९ | मूर्च्छारोगमें पथ्य | ५८४ |
| कुलत्थगुड | ५५० | मूर्च्छारोगमें अपथ्य | ५८५ |
| अगस्त्यहरीतकी, हिंस्त्राद्यघृत | ५५१ | मदात्ययरोग-चिकित्सा । | |
| तेजोवत्याद्यघृत, चन्दनाद्यतैल | ५५२ | फलत्रिकाद्यचूर्ण, एलाद्यमोदक | ५८७ |
| बृहच्चन्दनाद्यतैल | ५५३ | महाकल्याणवटी, पुनर्नवाद्यघृत | ५८८ |
| हिक्कारोगमें पथ्य | ५५४ | मदात्ययरोगमें पथ्य | ,, |
| हिक्कारोगमें अपथ्य | ५५५ | मदात्ययरोगमें अपथ्य | ५८९ |