भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

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( १० ) भैषज्यरत्नावली-

विषय.पृष्ठ.विषय.पृष्ठ.
खण्डकाद्यलौह४५४हेमगर्भपोट्टलीरस, रत्नगर्भ-पोट्टलीरस४९१
कूष्माण्डखण्ड४५५कनकसुन्दररस४९२
वासाकूष्माण्डखण्ड४५६सर्वाङ्गसुन्दररस४९३
वासाखण्ड४५७सर्पिर्गुड४९४
वृहत्कूष्माण्डावलेह४५८एलादिमन्थ४९५
त्रिवृतादिमोदक४५९पिप्पलीघृत, निर्गुण्डीघृत४९६
वासाद्यघृत, दूर्वाद्यघृत४६०बलाद्यघृत १-२, नागबलाद्यघृत४९७
सप्तप्रस्थघृत, शतावरीघृत४६१बलागर्भघृत, पाराशरघृत४९८
वृहच्छतावरीघृत४६२अजापञ्चक घृत, छागलाद्यघृत १-२४९९
कामदेवघृत४६३जीवन्त्याद्यघृत५००
उशीरासव४६४अमृतप्राशघृत १-२५०१
रक्तपित्तमें पथ्य४६५महाचन्दनादितैल५०३
रक्तपित्तमें अपथ्य४६७यक्ष्मारोगमें पथ्य५०५
यक्ष्मरोग-चिकित्सा ।यक्ष्मारोगमें अपथ्य५०६
दशमूलक्वाथ, अश्वगन्धादिक्वाथ४७०कासरोगकी चिकित्सा५०७
त्रयोदशाङ्गक्वाथ,,पञ्चमूलीक्वाथ५०९
बलादिचूर्ण, लवंगाद्यचूर्ण४७१पिप्पल्यादिक्वाथ५१०
शृङ्गयर्जुनाद्य चूर्ण,,कण्टकार्यादिक्वाथ, मरिचाद्यचूर्ण...,,
सितोपलादिलेह, वासावलेह४७२समशर्कर चूर्ण५११
बृहद्द्वाक्षावलेह १-२४७३तालीशाद्यचूर्ण और मोदक,,
च्यवनप्राश४७५कासान्तक, कासान्तकरस५१२
द्राक्षारिष्ट, विन्ध्यवासियोग४७७कासकुठार, पित्तकासान्तकरस,,
यक्ष्मारि लौह, यक्ष्मान्तकलौह४७८पुरन्दरवटी, पञ्चामृतरस५१३
शिलाजत्वादि लौह,,अमृतार्णवरस, श्रीचन्द्रामृतरस५१४
रजतादिलौह, क्षयकेसरी १-२४७९श्रीडामरानन्दाभ्रक५१५
रसेन्द्रगुटिका, वृहद्रसेन्द्रगुटिका४८१महाकालेश्वररस५१६
कल्याणसुन्दराभ्ररस४८३विजयभैरवरस५१७
वृहच्चन्द्रामृतरस, कुमुदेश्वररस४८४काससंहारभैरव रस५१८
कांचनाभ्ररस, वृहत्काञ्चनाभ्ररस...४८५वृहद्रसेन्द्रगुटिका५१९
स्वल्पमृगांकरस मृगांकरस४८६महोदधि रस, तरुणीनन्दरस५२०
राजमृगांकरस४८७समशर्करलौह५२२
महामृगांकरस४८८श्रीचन्द्रामृतलौह, भागोत्तरगुटिका५२३
लोकेश्वरपोट्टलीरस४८९लक्ष्मीविलासरस५२५