भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका । ( ९ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पाशुपतरस | ... ३९३ | कृमिरोगमें पथ्य | ... ४२३ |
| अजीर्णवलकालानलरस | ... ३९५ | कृमिरोगमें अपथ्य | ... ४२४ |
| शंखवटी | ... ३९६ | पाण्डु-कामला हलीमककी चिकित्सा । | |
| द्वितीय-शंखवटी | ... ३९७ | कामला-चिकित्सा | ४२६ |
| तृतीय बृहच्छंखवटी | ... ,, | कुम्भकामलाकी चिकित्सा | ... ४२७ |
| चतुर्थ-शंखवटी और महाशंखवटी | ३९८ | हलीमककी-चिकित्सा | ,, |
| पंचम-महाशंखवटी, षष्ठ-महाशंखवटी | ... ३९९ | फलत्रिकादि-कषाय, वासादि-कषाय | ... ४२८ |
| वज्रक्षार | ... ४०० | नवायसलौह | ... ,, |
| क्रव्यादरस | ... ४०१ | निशालौह, धात्रीलौह, विडंगादि-लौह | ... ४२९ |
| विश्वोद्दीप्तकाथ | ... ४०२ | दाव्यादिलौह, त्रिकत्रयाद्यलौह | ... ४३० |
| वीरभद्राभ्रक | ... ४०३ | कामलान्तकलौह | ... ४३१ |
| लवङ्गाद्य मोदक, सुकुमारमोदक | ... ४०४ | पञ्चामृतलौह-मंडूर | ... ४३२ |
| त्रिवृदादिमोदक, हरीतकीप्रयोग | ... ४०५ | वज्रवटक मण्डूर, पुनर्नवादिमण्डूर | ४३३ |
| अमृता-हरीतकी, शार्दूलकाशिक | ... ४०६ | त्र्यूषणादिमण्डूर | ... ४३४ |
| मुस्तकारिष्ट | ... ४०७ | चन्द्रसूर्यात्मकरस | ... ४३५ |
| चित्रकगुड, क्षारगुड | ... ४०८ | प्राणवल्लभरस | ... ४३६ |
| मस्तुषट्पलघृत, अग्निघृत | ... ४०९ | पञ्चाननवटी, पाण्डुसुदनरस | ... ४३७ |
| बृहदग्निघृत | ... ४१० | आनन्दोदय रस, त्रैलोक्यसुन्दररस | ४३८ |
| अग्निमान्द्यरोगमें पथ्य | ... ४११ | योगराज | ... ४३९ |
| अग्निमान्द्यरोगमें अपथ्य | ... ४१२ | धात्र्यरिष्ट, हरिद्रातघृत | ... ४४० |
| कृमिरोग-चिकित्सा । | द्राक्षाघृत, मूर्वाद्यघृत, व्योषाद्यघृत | ४४१ | |
| पारसीयादिचूर्ण | ... ४१५ | पाण्डुरोगमें पथ्य, पाण्डुरोग-में अपथ्य | ... ४४२ |
| कृमिकालानल रस | ... ४१६ | रक्तपित्त-चिकित्सा | ४४३ |
| कृमिधूलिजलप्लव रस | ... ,, | ह्रीबेरादि, वासकादि | ... ४४८ |
| कृमिकोष्ठानल रस, लाक्षादिवटी | ... ४१७ | धान्यकादि, अटरूषकादि | ... ४४९ |
| कृमिमुद्गर रस, कीटारिरस | ... ४१८ | उशीरादिचूर्ण, एलादिगुटिका | ... ,, |
| कीटमर्दरस | ... ,, | अर्केश्वररस, रक्तपित्तान्तकरस | ... ४५० |
| कृमिघातिनी गुटिका, कृमि-विनाशनरस | ... ४१९ | रसामृतरस, सुधानिधिरस | ... ४५१ |
| कृमिहररस, कृमिरोगारिरस | ... ४२० | कपर्दरस, समशर्कर लौह | ... ४५२ |
| कृमिघ्नरस | ... ,, | शतमूल्यादिलौह, शर्कराद्यलौह | ... ४५३ |
| विडंगलौह, हरिद्राखण्ड | ... ४२१ | रक्तपित्तान्तकलौह | ... ,, |
| त्रिफलाद्यघृत, विडंगघृत | ... ४२२ | ||
| विडंगतैल, धुस्तूरतैल | ... ४२३ |