भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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पृष्ठ 248
२१६भैषज्यरत्नावली ।[ ज्वरातिसार-

पाठादि ।

पाठेन्द्रभूनिम्बघनामृतानां सपर्यटैः क्वाथ इहैव शस्तः ।
आमातिसारं च जयेद् द्रुतं वा ज्वरेण युक्तं सहजं च तीव्रम् ॥१९॥
पाठ, इन्द्रजौ, चिरायता, नागरमोथा, गिलोय और पित्तपापडा इनका क्वाथ सेवन करनेसे ज्वरयुक्त तीव्र और सहज आमातिसाररोग तत्काल नष्ट होता है ॥ १९ ॥

किरातादि ।

किराताब्दामृताविश्वचन्दनोदीच्यवत्सकैः ।
शोथातिसारशमनं विशेषाज्ज्वरनाशनम् ॥ २० ॥
चिरायता, नागरमोथा, गिलोय, सोंठ, लालचन्दन, सुगन्धवाला और इन्द्रजौ इनका क्वाथ सूजन, अतिसार और विशेषकर ज्वरको नष्ट करता है ॥ २० ॥

विडङ्गादि ।

विडङ्गातिविषा मुस्तं पाठा दारु कलिङ्गकम् ।
मरिचेन समायुक्तं शोथातीसारनाशनम् ॥२१॥
वायविडङ्ग, अतीस, नागरमोथा, पाठ, देवदारु और इन्द्रजौ इनके क्वाथमें कालीमिरचोंका चूर्ण मिलाकर पान करनेसे सूजन और अतिसार दूर होता है ॥ २१ ॥

शुण्ठ्यादि ।

शुण्ठीबालकमुस्तं बिल्वं पाठा विषा च धान्यानि ।
पानकमरुचिच्छर्दिज्वरातिसारं विनाशयति ॥ २२ ॥
सोंठ, सुगन्धवाला, नागरमोथा, बेलगिरी, पाठ, अतीस और धनियां इनका क्वाथ पानकरनेसे अरुचि, वमन, ज्वर और अतिसार नष्ट होते हैं ॥ २२ ॥

वत्सकादि ।

वत्सकश्च सुरदारु रोहिणी धान्यबिल्वमगधात्रिकण्टकम् ।
निम्बबीजगपिप्पलीवृकीक्वाथ एष ज्वर-सारयोर्हितः ॥ २३ ॥
इन्द्रजौ, देवदारु, कुटकी, धनियां, बेलकी गिरी, पीपल, गोखुरु, नीमके बीज, गजपीपल और पाठ इनका क्वाथ ज्वर और अतिसारको नष्ट करनेकी उत्तम औषधि है ॥ २३ ॥

भूनिम्बादि ।

भूनिम्बबिल्वबालकगुडूचीमुस्तवत्सकैः ।
कषायः पाचनः शोथज्वरातीसार नाशनः ॥ २४ ॥