भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
पृष्ठ 33, कुल 1416 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
भैषज्यरत्नावली
भाषाटीकासहिता ।
मंगलाचरणम् ।
भक्त्या नतत्रिदशराजकिरीटकोटि-
रत्नावलीकिरणराजिविराजमानम् ।
श्रीमत्करीन्द्रवदनस्य पदारविन्द-
द्वन्द्वं सदा जयति सिद्धिकरं क्रियाणाम् ॥ १ ॥
टीकाकारोक्त-मंगलाचरण ।
नमः श्रीपूर्ववैद्याय भवरोगनिवृत्तये ।
भैषज्यरत्नावल्याश्च भाषाटीका विरच्यते ॥
भक्तिके साथ नम्र हुए देवराज इन्द्रके किरीटमें सुशोभित रत्नावलीकी किरणोंसे शोभायमान, सम्पूर्ण कार्योंके सिद्धिदाता ऐसे श्रीगणेशजीके चरणकमल निर्विघ्नतापूर्वक इस ग्रन्थकी समाप्ति करें ॥ १ ॥
वन्देऽम्बिकाचन्द्रचूडौ जननीजनकावुभौ ।
निपत्य धरणौ भक्त्या प्रत्यूहव्यूहशान्तये ॥ २ ॥
सकल विघ्नोंकी शान्तिके लिये भक्तिसहित जगत्के माता और पिता जो पार्वती शिव उनको मैं ( ग्रन्थकार ) साष्टाङ्ग प्रणाम करता हूं ॥ २ ॥
श्रीगोविन्दपदारविन्दयुगलं वन्दारुवृन्दारक-
श्रेणीनम्रशिरःकिरीटवलिभिर्नीलोत्पलेन्दिन्दिरम् ।
नत्वा सद्भिषजां मुदे वितनुते गोविन्ददासोऽधुना
नानाग्रन्थमहार्णवल्लब्धसगुणां भैषज्यरत्नावलीम् ॥ ३ ॥