भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । ३७३
मधूकमालूरनृपादनानां परूषकखज्जूरकपित्थकानाम् ।
पाकाय पेयं पिचुमर्दबीजं घृतेऽपि तक्रेऽपि तदेव पथ्यम् ॥८॥
खर्ज्जूरशृङ्गाटकयोः प्रशस्तं विश्वौषधं कुत्र च भद्रमुस्तम् ।
यज्ञाङ्गबोधिद्रुफलेषु शस्तं प्लक्षे तथा पर्युषितः प्रपीतम् ॥९॥
तण्डुलेषु च पयः पयस्स्वथो दीपकं तु चिपिटे कणायुतः ।
षष्टिका दधिजलेन जीर्य्यते ककटी च सुमनेषु जीर्य्यते ॥१०॥
कटहलके खानेसे अजीर्ण हुआ हो तो उसको पचानेके लिये केला खाना चाहिये । यदि केलेके खानेसे अजीर्ण हुआ हो तो घृत पान कराना चाहिये । घृतके अजीर्णमें जम्बीरीनींबूका रस पीना चाहिये । नारियल और ताडके फलोंके अजीर्णमें भात चावलोंका खाना चाहिये । आमको पचानेके लिये दूध सर्वश्रेष्ठ है । चिरौंजीके अजीर्णम हरड सेवन करना हितकारी है । महुआ, बेल, खिरनी, फालसे खजूर और कैथको पचानेके लिये नीमके बीजों (निबोलियों) को पीसकर पीना चाहिये । घृत और मट्ठेके अजीर्णम भी नीमके बीजों (निबोलियों) को सेवन करना चाहिये । खजूर और सिंघाडेके अजीर्णमें सोंठ और किसी किसी मतसे नागरमोथेको सेवन करना चाहिये । गूलर, पीपलके फल और पाखरके-फलको खानेसे हुए अजीर्णम बासीजल पान करना चाहिये । चावलोंके अजीर्णम दूध, दूधके अजीर्णम अजवायन और चिबिडे अर्थात् चौलोंके अजीर्णमें पीपल और अजवायनका चूर्ण सेवन करना चाहिये । सांठीके चावल दहीके तोडको पीनेसे पचते हैं और ककडी-गहूक पदार्थ खानेसे पचजाती ह ॥ ६-१० ॥
गोधूममाषहरिमन्थसतीनमुद्ग-
पाको भवेज्झटिति मातुलपुत्रकेण ।
खज्जूरिकाबिसकशेरुसितासु शस्तः
शृंगाटके मधुफलेष्वपि भद्रमुस्तम् ॥ ११ ॥
कङ्गुश्यामाकनीवाराः कुलित्थाश्चाविलम्बितम् ।
दध्नो जलेन जीर्य्यन्ति वैदलः काञ्जिकेन तु ॥ १२ ॥
पिष्टान्नं शीतलं वारि कृसरां सैन्धवं पचेत् ।
माषेण्डरीं निम्बुफलं पायसं मुद्गयूषकः ॥ १३ ॥