भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

पृष्ठ 560, कुल 1416 में से

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५२८ भैषज्यरत्नावली । [ कासरोग-

नित्योदय रस।

सुशुद्धं पारदं गन्धं प्रत्येकं शुक्तिसम्मितम् । ततः कज्जलिकां कृत्वा मर्दयेच्च पृथक् पृथक् ॥ २९ ॥ बिल्वाग्निमन्थश्योनाकं काश्मरी पाटला बला । मुस्तं पुनर्नवा धात्री बृहती वृषपत्रकम् ॥ ३० ॥ विदारी बहुपुत्री च एषां कर्षै रसैर्भिषक् । सुवर्णं रजतं ताप्यं प्रत्येकं शाणमात्रकम् ॥ ३१ ॥ पलमात्रं तु कृष्णाभ्रं तदर्द्धं तु सिताभ्रकम् । जातीकोषफले मांसी तालीशैलालवङ्गकम् ॥ ३२ ॥ प्रत्येकं कोलमात्रं तु वासानीरैर्विमर्दयेत् । शोषयित्वाऽऽतपे पश्चाद् विदार्याः पेषयेद्रसैः ॥ ३३ ॥ द्विगुञ्जां वटिकां कृत्वा पिप्पलीमधुना भजेत् । नाम्ना नित्योदयश्चायं रसो विष्णुविनिर्मितः ॥ ३४ ॥

शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक प्रत्येक दो दो कर्ष लेकर दोनोंकी एकत्र कज्जली करके बेलगिरी, अरणी, अरलू, कम्भारी, पाढर, खिरैंटी, नागरमोथा, पुनर्नवा आमले, बडी कटेरी, अडूसेके पत्ते, विदारीकन्द और शतावर इन प्रत्येकके एक एक कर्ष रसके साथ अलग अलग खरल करे। फिर उसमें सुवर्णभस्म, चाँदीकी भस्म और सोनामाखीकी भस्म चार चार मासे, शुद्ध कृष्ण-अभ्रककी भस्म ४ तोले, श्वेत अभ्रककी भस्म दो तोले एवं जावित्री, जायफल, बालछड, तालीसपत्र, इलायची और लौंग-प्रत्येकका चूर्ण एक एक तोला मिलाकर अडूसेके स्वरसमें खरल करे। फिर धूपमें सुखाकर विदारीकन्दके रसमें खरल करके दो दो रत्तीकी गोलियाँ बनालेवे। प्रतिदिन प्रातःकाल एक एक गोली पीपलके चूर्ण और शहदके साथ सेवन करे इस नित्योदय नामक रसको विष्णुभगवान्ने निर्माण किया है ॥ १२९-३४॥

पञ्च कासान्निहन्त्याशु चिरकालोद्भवानपि । राजयक्ष्माणमत्युग्रं जीर्णज्वरमरोचकम् ॥ ३५ ॥ धातुस्थं विषमाख्यं च तृतीयकचतुर्थकम् । अशाँसि कामलां पाण्डुमग्निमान्द्यं प्रमेहकम् । सेवनादस्य कन्दर्परूपो भवति मानवः ॥ ३६ ॥

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