भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
पृष्ठ 570, कुल 1416 में से
संदर्भ में पढ़ें५३८ | भैषज्यरत्नावली । | [ हिक्काश्वास-
मधुसौवर्चलोपेतं मातुलुङ्गरसं पिबेत् ।
हिक्कार्त्तस्य पयश्छागं हितं नागरसाधितम् ॥ ६ ॥
बिजौरेंनींबूके रसमें शहद और कालानमक मिलाकर पीनेसे अथवा बकरीके दूधमें सोंठ डालकर और उसको पकाकर पीनेसे हिक्कारोग दूर होता है ॥ ६ ॥
अप्यसाध्यां नयत्यस्तं हिक्कां क्षौद्रविलेहनम् ।
सद्य एव महायोगः काशमूलभवं रजः ॥ ७ ॥
काँसकी जड़के चूर्णको शहदमें मिलाकर सेवन करनेसे असाध्य हिक्कारोग भी शीघ्र शमन होता है ॥ ७ ॥
माषचूर्णभवो धूमो हिक्कां हन्ति न संशयः ।
असाध्यां साधयेद्धिक्कां सितयैलाभवं रजः ॥ ८ ॥
उडदोंके चूर्णको चिलममें रखकर उसका धूम्रपान करनेसे अथवा इलायचीके चूर्णको मिश्रीके साथ मिलाकर सेवन करनेसे असाध्य हिक्कारोग भी दूर होता है ॥ ८ ॥
शर्करामरिचं चूर्णं लीढं मधुयुतं मुहुः ।
निहन्ति प्रबलां हिक्कामसाध्यामपि देहिनाम् ॥ ९ ॥
मिश्री कालीमिरच और शहद इन तीनोंको एकत्र मिलाकर बारम्बार सेवन करनेसे मनुष्योंका असाध्य और प्रबल हिक्कारोग शीघ्र शमन होता है ॥ ९ ॥
हिक्काघ्नः कदलीमूलरसः पेयः सशर्करः ॥ १० ॥
केलेकी जड़का रस चीनी मिलाकर पान करनेसे हिचकी दूर होती है ॥ १० ॥
कृष्णामलकशुण्ठीनां चूर्णं मधुसिताघृतम् ।
मुहुर्मुहुः प्रयोक्तव्यं हिक्काश्वासनिवर्हणम् ॥ ११ ॥
पीपल, आमले और सोंठ इनके चूर्णको शहद मिश्री और घीमें मिलाकर बार-बार सेवन करनेसे हिक्का और श्वासस्रोग निवृत्त होता है ॥ ११ ॥
हिक्कां हरति प्रबलां श्वासं चातीव दारुणं जयति ।
शिखिपुच्छभस्मपिप्पलिचूर्णं मधुमिश्रितं लीढम् ॥१२॥
मोरकी पूँछकी भस्म, पीपलका चूर्ण इनको शहदमें मिलाकर सेवन करनेसे अतिप्रबल हिक्का और बहुत ज्यादा बढा हुआ श्वासस्रोग निवारण होता है ॥ १२ ॥
अभयानागरकल्कं पौष्करयवशूकमरिचकल्कं वा ।
तोयेनोष्णेन पिबेच्छ्वासी हिक्की च तच्छान्त्यै ॥ १३ ॥