भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें| ३८ | भैषज्यरत्नावली । | [ चिकित्सा- |
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सारिवा, अतीस, कूठ, गूगल, धमासा और नागरमोथा इन औषधियोंका क्वाथ बनाकर पान करनेसे कफज्वर दूर होता है ॥ ३ ॥
आमलक्यादि ।
आमलक्यभया कृष्णा चित्रकश्चेत्ययं गणः ।
सर्वज्वरकफाताङ्गो भेदी दीपनपाचनः ॥ ४ ॥
आमले, हरड, पीपल और लालचीतेकी जड इनका क्वाथ पान करनेसे सर्व-प्रकारके ज्वर और विशेषकर कफज्वर दूर होता है। यह क्वाथ मलभेदक, अग्नि-प्रदीपक और पाचक है ॥ ४ ॥
हरिद्रादि ।
हरिद्रा चित्रकं निम्बमुशीरातिविषे वचा ।
कुष्ठमिन्द्रयवा मूर्वा पटोलं चापि साधितम् ॥
पिबेन्मरीचमिलितं सक्षौद्रं कफजे ज्वरे ॥ ५ ॥
हल्दी, लालचीतेकी जड़, नीमकी छाल, खस, अतीस, वच, कूठ, इन्द्रजौ, मूर्वा और परवल इनके क्वाथमें काली मिरचोंका चूर्ण और शहद डालकर पान करनेसे कफज्वर नष्ट होता है ॥ ५ ॥
अभयादि ।
अभयाऽऽमलकी कृष्णा षड्ग्रन्था चित्रकस्तथा ।
मलभेदी कफाताङ्कज्वरनाशनदीपनः ॥ ६ ॥
हरड, आमले, पीपल, वच और चीतेकी जड इनका क्वाथ कफज्वरनाशक, भेदक और अग्निप्रदीपक है ॥ ६ ॥
व्याघ्यादि ।
व्याघ्री सिंही दुरालम्भा लोध्रं कुष्ठं पटोलकम् ।
ज्वरे कफात्मके चैतत्पाचनं स्यात्तदुत्तमम् ॥ ७ ॥
कटेरी, बडी कटेरी, धमासा, लोध, कूठ और परवल इनका क्वाथ कफज्वरमें उत्तम पाचन है ॥ ७ ॥
पटोलादि ।
पटोलत्रिफलातिक्ताशठीवासामृताभवः ।
क्वाथो मधुयुतः पीतो हन्यात्कफकृतं ज्वरम् ॥ ८ ॥
परवल, हरड, बहेडा, आमला, कुटकी, कचूर, अडूसेकी छाल और गिलोय इनका क्वाथ शहदके साथ पान करनेसे कफज्वर दूर होता है ॥ ८ ॥