भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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प्रकरणम् ] भाषाटीकासहिता । ३९


भूनिम्बादि ।

भूनिम्बनिम्बपिप्पल्यः शठी शुण्ठी शतावरी ।
गडूची बृहती चेति क्वाथो हन्यात्कफज्वरम् ॥ ९ ॥
चिरायता, नीमकी छाल, पीपल, कचूर, सोंठ, शतावर, गिलोय, बडी कटेरी इनका क्वाथ कफज्वरको नष्ट करता है ॥ ९ ॥

वात-पित्तज्वरकी चिकित्सा ।

नवाङ्ग क्वाथ ।

विश्वामृताब्दभूनिम्बैः पञ्चमूलीसमान्वितैः ।
कृतः कषायो हन्त्याशु वातपित्तोद्भवं ज्वरम् ॥ २१० ॥
सोंठ, गिलोय, नागरमोथा, चिरायता, शालपर्णी, पृष्ठपर्णी, कटेरी, बडी कटेरी और गोखरू इनका क्वाथ वातपित्तजन्यज्वरको तत्काल नष्ट करता है ॥ २१० ॥

निदिग्धिकादि ।

निदिग्धिकाबलारास्नात्रायमाणामृतायुतैः ।
मसूरविदलैः क्वाथो वातपित्तज्वरं जयेत् ॥ ११ ॥
कटेरी, खिरैंटी, रायसन, त्रायमाण, गिलोय और अनन्तमूल इनका क्वाथ वात-पित्तज्वरको दूर करता है ॥ ११ ॥

गुडूच्यादि ।

गुडूची निम्बधन्याके पद्मकं रक्तचन्दनम् ।
एषां सर्वान् ज्वरान् हन्ति गुडूच्यादिस्तु दीपनः ॥
हृल्लासारोचकच्छर्द्दिपिपासादाहनाशनः ॥ १२ ॥
गिलोय, नीमकी छाल, धनियाँ, पद्माख और लालचन्दन इनका क्वाथ सर्व प्रकारके ज्वरोंको नष्ट करता है । यह गुडूच्यादि क्वाथ अत्यन्त अग्निप्रदीपक एवं उबकाई, अरुचि, वमन, तृषा और दाहको नाश करनेवाला है ॥ १२ ॥

बृहद्गुडूच्यादि ।

गुडूची चन्दनं पद्मनागरेन्द्रयवासकम् ।
अभयारग्वधोदीच्यपाठाधन्वाब्दरोहिणी ॥ १३ ॥
कषायं पाययेदेतं पिप्पलीचूर्णसंयुक्तम् ।
कासश्वासज्वरान् हन्ति पिपासादाहनाशनः ॥
विण्मूत्रानिलविष्टम्भे त्रिदोषप्रभवेऽपि च ॥ १४ ॥