भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

पृष्ठ 718, कुल 1416 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 718
६८६भैषज्यरत्नावली ।[ वातव्याधि-

अग्निकर्मोपनाहश्च भूशय्या स्नानमासनम् ।
तैलद्रोणीशिरोबस्तिः शयनं नस्यमातपः ॥ ५३ ॥
सन्तर्पणं बृंहणं च किलाटो दधिकूर्चिका ।
सर्पिस्तैलं वसा मज्जा स्वाद्वम्ललवणा रसाः ॥ ५४ ॥
नवीनास्तिलगोधूमा माषाः संवत्सरोत्थिताः ।
शालयः षष्टिकाश्चापि कुलत्थानां रसः सुराः ॥ ५५ ॥
ग्राम्यगोऽश्वतरोष्ट्राश्वरासभच्छागलादयः ।
आनूपाः कोलमहिषन्यंकुखङ्गिगजादयः ॥ ५६ ॥
औदका हंसकादम्बचक्रमद्गुबकादयः ।
बिलेशया भेकगोधानकुलश्वाविदादयः ॥ ५७ ॥

तेलकी मालिश, अंगमर्दन, वस्तिक्रिया, स्नेहपदार्थोंका सेवन, स्वेदक्रिया, जलमें घुसकर स्नान, शरीरको मलना, वातनाशक औषधियोंका प्रयोग, वस्त्रादिसे शरीरको ढकना, वायु सेवनका त्याग, अग्निकर्म, उपनाह स्वेद देना, पृथ्वीपर सोना, स्नान करना, बैठना, तैलसे भरेहुए काष्ठादिके पात्रमें कण्ठपर्यन्त गोता लगाकर स्नान करना, शिरोबस्ति, शयन करना, नस्य देना, धूपका सेवन, सन्तर्पण क्रिया, पुष्टिकार द्रव्य, मावा दहीके साथ पकाया हुआ दूध, घी, तेल, चर्बी, मज्जा, मधुर, अम्ल और लवण रसयुक्त पदार्थ, नये तिल, नये गेहूँ, नये उडद, एक वर्षके पुराने शालि और सांठी धानोंके चावल, कुलथीका यूष, मदिरा, बैल, खच्चर, ऊँट घोडा, गधा और बकरा आदि ग्राम्यपशुओंका मांस, सुअर, भैंसा, बारहसिंगा, गैंडा और हाथी आदि अनुपदेशजात-पशुओंका मांस, हंस, कलहंस, चकवा, जलकौआ और बगला आदि जलचरजीवोंका मांस, मेंडक, गोह, नौला और खरगोश प्रभृति बिलमें रहनेवाले जीवोंका मांस ॥ ५८ ॥

चटकः कुक्कुटो बर्ही तित्तिरिश्चेति जाङ्गलाः ।
शिलिन्दः पर्वतो नक्रो गर्गरः कवयील्लिशः ॥ ५८ ॥
एरङ्गश्चुल्लकी कूर्मः शिशुमारस्तिमिङ्गिलः ।
रोहितो मद्गुरुः शृङ्गी वर्मी च कुलिशो झषाः ॥ ५९ ॥
पटोलं शिग्रुवार्त्ताकुर्लशुनं दाडिमद्वयम् ।
पक्वतालं रसालं च नलदम्बु परूषकम् ॥ ६० ॥