भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८८ ] भक्तिरसामृतसिन्धु श्रीकृष्णभक्त कभी-कभी किसी भगवद्भक्त को देखकर मन आनन्द से अभिभूत हो जाता है। जब ध्रुव महाराज ने नारायण के दो पार्षदों को अपने निकट आते देखा तो वे श्रद्धाभाव से तुरन्त अगवानी के लिए उठे और हाथ जोड़े उनके आगे खड़े रहे; परन्तु प्रेम-विह्वलता के कारण कुछ स्तुति नहीं कर सके । एक गोपी सुबल से कहती हैं, "हे सुबल ! मैं जानती हूँ कि कृष्ण तुम्हारे सखा हैं और तुम सदा उनके साथ हास-परिहास का आनन्द लेते हो। उस दिन मैंने देखा तुम दोनों एक दूसरे के कन्धे पर हाथ रखे हुए साथ खड़े हो और मुस्करा रहे हो। दूर से ही इस दृश्य को देखकर तुरंत मेरे नेत्र भर आए ।" श्रीकृष्ण-स्मरण के विशेष दिन श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं से सम्बन्धित महोत्सवों के अनेक विवरण हैं। इनमें प्रधान है जन्माष्टमी-श्रीकृष्ण की आविर्भाव तिथि। यह दिवस भक्त के लिए परम ऐश्वर्यमय होता है। कभी-कभी तो अन्य मतावलम्बी भी इस मंगलमय दिन का लाभ उठा कर जन्माष्टमी महोत्सव मनाते हैं। एकादशी आदि अन्य कृष्णवासों पर भी कृष्णप्रेम उद्दीप्त होता है।