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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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कृष्णप्रेम के व्यभिचारिभाव [ २०६

आवेग में अस्त-व्यस्त गति, कम्प, आँखों का मुंद जाना, अश्रु आदि होते हैं। वायु के कारण आवेग में द्रुतगति से धावन और आँखों को पोंछना आदि लक्षण प्रकट रहते हैं। वर्षाजनित आवेग में छाता लेना और शरीर का संकुचन आदि होता है। आकस्मिक उत्पात के आवेग में मुख की विवर्णता, आश्चर्य और कम्प आदि दिखाई देते हैं। हाथी को देखने से हुए आवेग में भागना, त्रास तथा भागते-भागते मुड़-मुड़कर पीछे देखना है। शत्रु को सामने देखने के आवेग में वह किसी घातक अस्त्र को खोजता है और पलायन का प्रयत्न करता है। पुत्र कृष्ण को वृन्दावन से आता हुआ देखकर भाव-विह्वला यशोदा के स्तनों से दूध झरने लगता और शरीर में रोमांच हो आया। यह प्रिय के दर्शन से उत्पन्न आवेग है। श्रीमद्भागवत (१०.२३.१८) में शुकदेव गोस्वामी महाराज परीक्षित को सूचित करते हैं, “हे राजन् ! यज्ञपत्नियों का श्रीकृष्ण के गुणगान में सहज अनुराग था और वे नित्य उनके दर्शन के लिए उत्कण्ठित रहती थीं। इसलिए जब उन्होंने सुना कि श्रीकृष्ण आए हैं तो उन्हें देखने को अति आतुर होकर घर से चल पड़ीं।" यह प्रिय के श्रवण से उत्पन्न आवेग है। पूतना राक्षसी को कृष्ण के हाथों मारा हुआ देखकर यशोदा मैय्या आश्चर्यचकित होकर भाव विह्वलतावश, "यह क्या है? यह क्या है ?" इस प्रकार चिल्लाने लगी। जब उसने देखा कि कृष्ण मृत राक्षसी के वक्षःस्थल पर खेल रहे हैं तो यशोदा भ्रमित होकर चक्कर काटने लगी। यह अप्रिय दर्शन जनित आवेग का उदाहरण है। कृष्ण द्वारा यमलार्जुन को गिराने के शब्द को सुनकर यशोदा दौड़ी आई। वृक्षों के बीच श्रीकृष्ण को आया देखकर उसकी आँखें ऊपर चढ़ गयीं और वह अपने कर्तव्य का भी निश्चय न कर सकी। यह अप्रिय श्रवण से उत्पन्न आवेग का दृष्टान्त है। वृन्दावन में आग लगी देखकर सब गोप एकत्र होकर श्रीकृष्ण से रक्षा की याचना करने लगे। यह अग्नि से उत्पन्न आवेग है। एक बार तृणावर्त नामक असुर बड़े-बड़े वृक्षों के साथ श्रीकृष्ण को उड़ा ले गया था। पुत्र को न देखकर यशोदा मैया व्याकुल होकर घूमने लगी। यह वात जनित आवेग है। श्रीमद्भागवत (१०.२५.११) में इन्द्र के वृन्दावन पर मूसलाधार वर्षा करने का वर्णन है। वात और शीत से अत्यन्त त्रस्त होकर समस्त