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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 248, कुल 380 में से

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पृष्ठ 248

कृष्णप्रेम के अन्यान्य भाव [ २२१ उग्रता जिस समय श्रीकृष्ण कालिया नाग से संघर्ष कर रहे थे तो कालिया ने उनके पदारविन्द पर काट लिया। इससे गरुड़ जी को बड़ा रोष हुआ और वे धीरे से कहने लगे, "श्रीकृष्ण इतने अप्रतिमप्रभाव हैं कि उनके गर्जनमात्र से इस तुच्छ कालिया नाग की स्त्रियों के गर्भपात हो जाता है। फिर भी इसने मेरे स्वामी का अपराध करने का दुस्साहस किया है। चाहूँ तो इसे क्षण भर में निगल कर जाऊँ, परन्तु अपने स्वामी के क्रोध से डरता हूँ।" यह श्रीकृष्ण के अपमान के कारण प्रेम में कुछ करने की उत्सुकता है। महाराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में शिशुपाल को श्रीकृष्ण की अग्रपूजा का विरोध करते देखकर अर्जुन का अनुज नकुल बोल उठा, "जो श्रीकृष्ण का पूजन सहन नहीं कर सकता, वह असुर मेरा शत्रु है। इसलिए इसके मदोन्मत्त सिर पर टूट पड़ने के लिए यमदण्ड से भी भयंकर मेरा बायाँ पैर मचल रहा है।" फिर नकुल शोक करते हुए बोला, "भगवान् श्रीकृष्ण का सब प्रकार से मंगल हो। आश्चर्य है कि कुरुवंश के राजसिंहासन पर अनैतिक रूप से अधिकार करने वाले निर्लज्ज कौरव अब कूटनीतिक षड्यन्त्र के द्वारा श्रीकृष्ण की आलोचना कर रहे हैं। ओह ! यह असह्य है।" यह भी श्रीकृष्ण के अपमान से उत्पन्न उत्सुकता है। अमर्ष-परिणाम में अपशब्द जनक 'विदग्धमाधव' में राधारानी की नन्द कुटिला कृष्ण की निन्दा करती हुई कहने लगी, हे कृष्ण ! तुम यहाँ खड़े हो और मेरे भाई की नवविवाहिता वधु राधा भी यहाँ है। मैं तुम्हें अच्छी प्रकार से जानती हूँ, तो फिर तुम्हारे भ्रमायमान नेत्रों से अपनी वधु को बचाने की व्याकुलता मुझे क्यों नहीं होगी"? यह श्रीकृष्ण पर आक्षेप करने के लिए प्रयुक्त अपमानजनक शब्द हैं। इसी भाँति कतिपय गोपिकाएँ श्रीकृष्ण का अपमान करती हुई बोलीं, "हे कृष्ण ! तुम चोरशिरोमणि हो, इसलिए शीघ्र यहाँ से भाग जाओ। हम जानती हैं कि तुम हमसे अधिक चन्द्रावली को प्रेम करते हो। अतः हमारे सामने उसका गुणगान करना व्यर्थ है। कृपया इस स्थान पर राधा- रानी का नाम दूषित मत करो।" यह भी प्रेम में श्रीकृष्ण के लिए अपमान- सूचक शब्दों का प्रयोग है।