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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 380 में से

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प्रस्तावना मंगलाचरण : भगवान् श्रीकृष्ण आदिपुरुष, सम्पूर्ण कारणों के परम कारण तथा अखिलरसामृतमूर्ति रसराज — शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य, माधुर्य, हास्य, कारुण्य, भयानक, वीर, रौद्र, अद्भुत और वीभत्स रस रूपी सम्बन्धों के परम आश्रय हैं । वे परम आकर्षक श्रीविग्रह हैं और अपनी त्रिभुवन-विमोहिनी दिव्य रूप, गुण, लीला आदि की माधुरी से उन्होंने तारका, पालिका, श्यामा, ललिता और साक्षात् राधारानी को भी वशीभूत कर लिया है । वे प्रभु कृपा करें, जिससे कृष्णकृपाविग्रह श्रीमद्भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद द्वारा प्रेरित 'भक्तिरसामृतसिन्धु' के लेखन का कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हो । सर्वप्रथम श्रील रूप गोस्वामी प्रभुपाद और श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद के चरणारविन्दों में सविनय प्रणाम करता हूँ, जिनकी प्रेरणा से मैं 'भक्तिरसामृतसिन्धु' ग्रन्थ के सार-संकलन के कार्य में प्रवृत्त हुआ हूँ । इस 'भक्तियोग के दिव्य विज्ञान का प्रतिपादन भगवान् श्रीचैतन्य महाप्रभु ने किया है । भगवान् चैतन्य का आविर्भाव बंगाल में आज से पांच सौ वर्ष पूर्व कृष्णभावना आंदोलन का प्रवर्तन् करने के लिए हुआ था । श्रील रूप गोस्वामीचरण इस महान् ग्रन्थ का आरम्भ करते हुए अपने अग्रज और गुरुदेव श्रील सनातन गोस्वामी की सादर वन्दना करते हैं । उनकी प्रार्थना है कि 'भक्तिरसामृतसिन्धु' उन्हें प्रिय हो, भक्तिरसरूप अमृत के सागर में निवास करते हुए श्रीसनातन गोस्वामी श्रीश्रीराधाकृष्ण की सेवा में सदा दिव्य आनन्द का आस्वादन किया करें । भक्तिरसरूप अमृत के सागर में विहरण करने वाले उन सभी महाभागवत और आचार्यरूप मकरों की हम सादर वन्दना करते हैं, जिन्होंने नाना प्रकार की मुक्तिरूप-नदियों का तिरस्कार कर दिया है । निर्विशेष- वादियों को परतत्त्व में लीन होना बड़ा रुचिकर होता है, जैसे नदियां सागर में आकर समा जाती हैं । सागर मानो मुक्ति है और उसमें मिलने वाली नदियां नाना मुक्तिपथ जैसी हैं । निर्विशेषवादियों का निवास नदीजल में है, जो अन्त में सागर में मिल कर लीन हो जाता है । परन्तु वे यह नहीं

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