भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
पृष्ठ 320, कुल 380 में से
संदर्भ में पढ़ेंसख्यरस में प्रेम के व्यवहार [ २६३ जिस समय दुर्योधन द्वारा राज्य से निर्वासित होकर पाण्डव वन में अज्ञातवास कर रहे थे उस समय कोई भी उनके निवास को नहीं जान सका। ऐसे समय में देवर्षि नारद भगवान् श्रीकृष्ण से मिलने आए और कहने लगे, "हे मुकुन्द ! आप परम पुरुष स्वयं भगवान् हैं। परन्तु फिर भी आपकी मित्रता के कारण पाण्डव को विश्व के साम्राज्य के अपने उचित अधिकार से वंचित होना पड़ा है और अब वे वन में अज्ञात वास कर रहे हैं। यहाँ तक कि उन्हें दूसरों के यहाँ दास्य कर्म तक करना पड़ा है। ये सब लक्षण लौकिक दृष्टि से बड़े अमंगलमय प्रतीत होते हैं। परन्तु प्रसन्नता का विषय है कि इन सब दुःखों के होते हुए भी उनमें आपके प्रति जो विश्वास और प्रेम था उसमें कोई अन्तर नहीं आया है। वास्तव में तो वे निरन्तर आपके सख्यरूप अमृत में निमग्न हुए आपके नामों का ही कीर्तन किया करते हैं।" श्रीकृष्ण के लिये स्नेह के आधिक्य का उदाहरण श्रीमद्भागवत (१०.१५.१८) में है। गोचारण भूमि में विचरते श्रीकृष्ण को तनिक श्रान्ति अनुभव हुई और वे विश्राम चाहने लगे । अतएव भूमि पर लेट गये । उस समय बहुत से गोप-बालक वहाँ एकत्रित हो गये और बड़े स्नेह से गीत गाने लगे, जिससे श्रीकृष्ण भली प्रकार से विश्राम कर सकें । कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में कृष्ण और अर्जुन के सख्य का उदाहरण तो प्रसिद्ध है ही। युद्ध के बीच द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने अनुचित रूप से श्रीकृष्ण पर आक्रमण किया। उस समय के प्रचलित युद्धनियमों के अनुसार शत्रु को अपने शत्रु के सारथि पर कभी आक्रमण नहीं करना चाहिए। अश्वत्थामा ने नाना प्रकार से पाप का आचरण करते हुए श्रीकृष्ण के विग्रह पर भी आक्रमण करने में संकोच नहीं किया, यद्यपि श्रीकृष्ण अर्जुन का सारथ्य कर रहे थे । जब अर्जुन ने देखा कि अश्वत्थामा श्रीकृष्ण को मारने के लिये नाना प्रकार के बाण चला रहा है तो वह उन्हें रोकने के लिये एकदम श्रीकृष्ण के आगे आकर खड़ा हो गया । उस समय बाणों की चोट लगने पर भी अर्जुन को श्रीकृष्ण के लिये दिव्य प्रेम का अनुभव हो रहा था; बाणों की मार उसे फूलों की बरसात लग रही थी । सख्यभक्तिरस में श्रीकृष्ण के लिये प्रेमभाव का एक अन्य उदाहरण इस प्रकार है। वृषभ नामक गोपबालक वन में श्रीकृष्ण की माला के लिये पुष्प चुन रहा था । तभी मध्याह्न काल हो आया और सूर्य