भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअद्भुतभक्तिरस और वीरभक्तिरस [ ३२१ परोक्ष अद्भुत भक्तिरस का एक अन्य उदाहरण इस प्रकार है— यह परीक्षा कर देखने के लिये कि क्या श्रीकृष्ण वास्तव में भगवान् हैं, ब्रह्माजी ने उनके सारे गोपबालकों और गायों को चुरा लिया। परन्तु कुछ ही क्षण बाद उन्होंने देखा कि श्रीकृष्ण अब भी अपने सब गोपबालकों, गायों और बछड़ों के साथ ठीक पहले के ही समान क्रीड़ा कर रहे हैं। जब उन्होंने अपने सत्यलोकवासियों को यह घटना सुनाई तो वे सब के सब चकित रह गये। ब्रह्मा ने बताया कि बालकों का हरण करने पर भी उन्होंने श्रीकृष्ण को फिर उसी प्रकार उन्हीं बालकों के साथ खेलते हुए देखा है। उनके शरीर का वर्ण प्रायः श्रीकृष्ण के जैसा श्यामल था। वे सब चतुर्भुजधारी थे। वे ही सब बछड़े और गायें पहले की भाँति वहाँ थे। इस घटना का वर्णन करते-करते ब्रह्मा प्रायः आप्यायित हो गये और आगे कहने लगे कि सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि अन्य अनेक ब्रह्माण्डों से भिन्न-भिन्न ब्रह्मा वहाँ श्रीकृष्ण और उनके पार्षदों की आराधना के लिये आए हुए थे। इसी प्रकार जब भाण्डीर वन में आग लगी तो श्रीकृष्ण ने अपने सखाओं को अपनी-अपनी आँखें मींच लेने की आज्ञा दी। फिर जब श्रीकृष्ण ने अग्नि को बुझा दिया और गोपबालकों ने अपनी आँखें खोलीं तो देखा कि वे अग्नि के भय से बच गये हैं, उनका गोधन और बछड़े सब सुरक्षित हैं। श्रीकृष्ण द्वारा अपनी रक्षा हुई देखकर वे आश्चर्य में भर गये। यह भी अद्भुतभक्तिरस की अनुभूति का उदाहरण है। जो हृदय को प्रिय हो उसकी तनिक सी असाधारण क्रिया भी विस्मय को उत्पन्न करने वाली होती है। परन्तु अप्रिय की एकदम अलौकिक क्रिया भी विस्मय को जन्म नहीं देती। प्रेम के कारण ही किसी अद्भुत क्रिया की मन पर छाप पड़ती है। वीरभक्तिरस जब भगवान् के लिये प्रेम और भक्ति के कारण एक विशेष प्रकार का वीरतापूर्ण उत्साह होता है तो परिणाम में होने वाली क्रियाओं को वीररस कहते हैं। उनकी अभिव्यक्ति युद्धवीरता, कामवीरता, दयावीरता और धर्मवीरता—इन चार रूपों में होती है। इन सब प्रकार की वीररस की क्रियाओं के श्रीकृष्ण आलम्बन हैं। जब कोई सखा किसी वीररस की क्रिया से श्रीकृष्ण को संतुष्ट करना चाहता है तो श्रीकृष्ण को विरोधी समझ कर वह स्वयं उन्हें चुनौती