भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२२ ] भक्तिरसामृतसिन्धु देता है। अथवा श्रीकृष्ण स्वयं तो ऐसे युद्ध को देखते हैं और उनकी इच्छा से अन्य सखा विरोधी की भूमिका निभाता है। किसी सखा ने एक बार श्रीकृष्ण को चुनौती देते हुए कहा, "हे माधव ! तुमको अपने कभी न हारने का बड़ा अभिमान हो चला है। परन्तु यदि तुम यहाँ से भागो नहीं तो मैं तुमको हरा कर दिखा दूँगा और इससे मेरे सब मित्रों को बड़ा सन्तोष होगा।" श्रीकृष्ण और श्रीदामा बड़े अन्तरंग सखा थे। फिर भी श्रीदामा ने क्रोधवश उन्हें ललकारा। जब वे दोनों आपस में लड़ने लगे तो यमुना तट पर खड़े अन्य सखाओं ने दो मित्रों में होने वाले इस अद्भुत युद्ध का आनन्द लिया। वे युद्ध-अभिनय के लिये कुछ बाण बनाने लगे और श्रीकृष्ण उन्हें श्रीदामा के ऊपर छोड़ने लगे। श्रीदामा अपनी लाठी को घुमा- घुमाकर उन बाणों को बचाता और इस प्रकार श्रीदामा की वीररसमयी क्रियाओं से श्रीकृष्ण को बड़ा आनन्द हुआ। ऐसा युद्ध प्रायः वीरपुरुषों में हुआ करता है जिससे सब देखने वालों को बड़ी अद्भुत उत्तेजना होती है। 'हरिवंश' में उल्लेख है कि कभी-कभी जब कुन्ती की उपस्थिति में अर्जुन और श्रीकृष्ण आपस में लड़ते तो अर्जुन श्रीकृष्ण से परास्त हो जाता। मित्रों में होने वाले इस प्रकार के वीर युद्धों में कभी-कभी आत्म- श्लाघा, ताल ठोकना, गर्व, बल, अस्त्रों का उठाना, पैंतरे बाजी, एक दूसरे को ललकारना आदि होते हैं। ये सब वीरभक्तिरस के उद्दीपन हैं। एक मित्र ने श्रीकृष्ण को चुनौती दी, "हे सखे दामोदर ! तुम केवल खाने में ही कुशल हो। तुमने छल से दुर्बल सुबल को हरा दिया, इसमें कौन बड़ी बात है। इस आधार पर अपने को वीर योद्धा घोषित न करो। तुमने अपने को सर्प बताया है और मैं मोर हूँ; इसलिए तुम्हें अवश्य परास्त कर दूँगा।" मोर सर्प का सबसे शक्तिशाली शत्रु है। सखाओं में होने वाले इस प्रकार के युद्ध में आत्मश्लाघा को विद्वानों ने अनुभाव बतलाया है। पैंतरा बदलना, अकेले होने पर भी युद्ध की इच्छा तथा युद्ध से न भागना, ये सब वीररस की क्रियाएँ भी अनुभाव हैं। एक मित्र श्रीकृष्ण से बोला, 'हे मधुसूदन ! तुम मेरे बल-पराक्रम को जानते हो; फिर भी तुम बलशाली बलदेव को चुनौती देने के लिये भद्रसेन को उत्साहित कर रहे हो, मुझे नहीं। इससे मेरा अपमान हुआ है। मेरी भुजाएँ अर्गला की प्रतिद्वन्द्वी हैं।"