भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १० ] ✿ भगवती और सृष्टि .................................................... ५१० ✿ मूर्तिरहस्य ............................................................. ५११ ✿ दशमहाविद्या ......................................................... ५१४ (१) महाकाली ......................................................... ५१४ (२) तारा ................................................................ ५१४ (३) षोडशी ............................................................. ५१५ (४) भुवनेश्वरी .......................................................... ५१५ (५) छिन्नमस्ता ......................................................... ५१५ (६) त्रिपुरभैरवी ......................................................... ५१६ (७) धूमावती ........................................................... ५१६ (८) बगला ............................................................... ५१६ (९) मातङ्गी ............................................................ ५१७ (१०) कमला ........................................................... ५१७ ✿ पूजारहस्य ............................................................ ५१७ ✿ पुरुषरूपिणी ......................................................... ५१८ ✿ शिवपरात्पर .......................................................... ५२० ✿ ब्रह्मजाया ............................................................ ५२३ ✿ भगवतीकी ब्रह्मरूपता .............................................. ५२३ ८. गायत्री-तत्त्व ........................................................ ५२४ ✿ त्रिपदा गायत्री ...................................................... ५२५ ९. शक्तिका स्वरूप ..................................................... ५२७ ✿ भगवती ही निखिल प्रपंचकी निर्मात्री ........................ ५३० १०. माँके श्रीचरणोंमें .................................................. ५३० ✿ कातर प्रार्थना ....................................................... ५३४ ✿ सांसारिक मोह-ममताका परिणाम ............................. ५३६ ✿ मोहकी विचित्र महिमा ............................................ ५३९ ✿ माँ ही एकमात्र शरण .............................................. ५४० ✿ दीनजनोंपर माँकी विशेष कृपा ................................. ५४० ✿ माँकी कृपासे ही माँका स्वरूपबोध .......................... ५४१ ✿ स्वकल्पित प्रपंच ही दुःखका हेतु है ......................... ५४३ ✿ कामनात्यागसे दृढबोधकी प्राप्ति ............................... ५४३ ✿ अखण्डबोधसे संसारकी नश्वरताका भान .................... ५४५ ✿ देहभावनासे ही देहकी सत्ता और मनके कारण ही जगद्विभ्रम ................................................. ५४६ ११. शक्तिपीठ-रहस्य ................................................... ५४८ ✿ इक्यावन शक्तिपीठ ................................................ ५४९ ✿ वर्णमालाएँ .......................................................... ५५२ १२. श्रीरामजन्म-रहस्य ............................................... ५५४ ✿ भगवान्का आविर्भाव चार रूपोंमें ............................. ५५५ १३. श्रीरामभद्रका ध्यान ............................................... ५५६ ✿ भगवान्के विविध अंगों तथा आभूषणोंकी शोभा .................................................................... ५५६ १४. भगवदवतारका प्रयोजन ......................................... ५६० ✿ भगवदवतरणके विभिन्न प्रयोजनोंके विविध अभिप्राय ................................................................ ५६१ १५. भारतमें ही अवतार क्यों ? ..................................... ५६३ ✿ धर्माधर्मके निर्णयमें बुद्धिबल नहीं, शास्त्र ही प्रमाण है ............................................................... ५६५ ✿ शास्त्रोंमें संशोधनकी कल्पना नितान्त अल्पज्ञता ................................................................ ५६६ ✿ भारतवर्ष समस्त भूमण्डलकी नाभि है ....................... ५६६ १६. अवतारमीमांसा ................................................... ५६८ ✿ भगवान्का पूर्णावतार या अंशावतार ........................... ५६९ ✿ अवतारदेह और जीवदेहका पार्थक्य .......................... ५७० १७. बुद्धावतारका प्रयोजन .......................................... ५७३ ✿ वेदोंको माननेवाला आस्तिक और उनकी निन्दा करनेवाला नास्तिक ................................................... ५७४ १८. निराकारसे साकार ................................................ ५७५ ✿ परमात्मामें पारमार्थिक सत्तासे जन्माभाव और व्यावहारिक दृष्टिसे जन्म का भाव ............................... ५७६ ✿ साकाररूपमें प्रकट भगवान्के दर्शनमें विलक्षणता .............................................................. ५७८ ✿ साकाररूपमें किसी भी भावसे चित्त लगानेसे प्राणीका कल्याण ..................................................... ५७९ ✿ सगुणस्वरूपका चिन्तन सरल एवं सुगम ..................... ५७९ ✿ श्रुतियोंमें सगुण-साकाररूपकी अवधारणा ................... ५८० ✿ भगवद्विग्रहका उपादान ........................................... ५८३ ✿ प्राकट्यके विषयमें विभिन्न अभिमतोंकी मीमांसा और निष्कर्ष ................................................ ५८५ १९. निर्गुण या सगुण .................................................. ५८६ ✿ ध्याता, ध्यान और ध्येय ........................................... ५८६ ✿ दिव्य स्वरूप-धारणाका प्रयोजन ............................... ५८८ ✿ करणग्रामोंकी सार्थकता किसमें ? ............................. ५८९ ✿ परमानन्दघन ब्रह्म अद्भुत रसमय है .......................... ५९० ✿ द्रुतचित्तपर भगवान्का प्राकट्य ही भक्ति है ................. ५९० ✿ भक्त और भगवान्का अभिन्न सम्बन्ध ....................... ५९१ ✿ भगवान्का स्वरूप ही प्रेम है .................................... ५९२ ✿ भगवान्में चित्त लगानेसे परम कल्याण ...................... ५९४