भारतकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

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[ १३ ] ✿ ब्रह्मात्मविज्ञानसे सर्वविज्ञानकी बाधरूपता... ७३९ ✿ तारतम्यशून्य अद्वयज्ञानस्वरूप तत्त्वकी निरतिशय बृहद् ब्रह्मरूपता ........... ७४६ २. सर्वसिद्धान्तसमन्वयप्रकार ........................ ७४९ ✿ महेश्वरकी महाशक्ति और उसकी अद्भुत चमत्कृति ........................................... ७४९ ✿ वैदिक तथा अवैदिक दर्शनभेद .............. ७४९ ✿ चार्वाकमत-प्रतिपादन ............................ ७४९ ✿ बौद्धमतविवेचन .................................. ७५० ✿ बौद्धमतप्रभेद ..................................... ७५० ✿ जैनमतनिरूपण ................................... ७५० ✿ न्यायमतनिरूपण ................................. ७५१ ✿ सांख्यमतप्रतिपादन ................................ ७५१ ✿ योगमतनिरूपण ................................... ७५१ ✿ मीमांसामतविवेचन .............................. ७५१ ✿ वेदान्तमतप्रभेदप्रतिपादन ........................ ७५२ ✿ श्रीमाध्वमतनिरूपण .............................. ७५२ ✿ श्रीरामानुजमतनिरूपण ........................... ७५२ ✿ श्रीनिम्बार्कमतनिरूपण ........................... ७५२ ✿ श्रीवल्लभमतविवेचन ............................. ७५३ ✿ शैवादि विविधमतविवेचन ........................ ७५३ ✿ सर्वसिद्धान्तसमन्वयप्रकार ...................... ७५४ ✿ सुन्दोपसुन्दन्यायकी अप्रसक्ति, किंतु सोपानारोह- क्रमकी प्रसक्ति .................................... ७५५ ✿ अद्वैतमें द्वैतान्तभावकी प्रसक्ति ................ ७५५ ✿ द्वैतप्रपंचभगवदाश्रिता अनिर्वचनीयताशक्तिकी अद्भुत चमत्कृति ................................. ७५५ ✿ द्रष्टा आत्माकी दृश्यतादात्म्यापत्तिके कारण विविध वादोंकी प्रवृत्ति .......................... ७५५ ✿ परोवरीयक्रमके समादरसे समन्वयकी सिद्धि तथा वास्तव आत्माकी समुपलब्धि ......... ७५५ ✿ तदभिमतविषयविशेषकी उपादेयता तथा तदतिरिक्तकी उपेक्षा—समन्वयकी स्वरूप- विधा................................................. ७५६ ✿ सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्मकी निरावरण स्फूर्ति शिवादि पंचदेवोंमें एकातिरिक्त अन्योंकी निन्दा निज इष्टमें दृढ़ आस्था-सम्पादनकी विधा .... ७५८ ✿ कार्यब्रह्म, कारणब्रह्म और कार्यकारणातीत परब्रह्ममें पूर्व-पूर्वकी निन्दा उत्तरोत्तरकी उत्कृष्टताकी स्वस्थ दिशा .................... ७५९ ✿ सत्ताभेदकी समीचीनता ........................ ७६१ ✿ उपाधिपर्यन्त व्यावहारिक भेदके कारण भगवद्भक्तिके लिये अपेक्षित जीवेश्वरभेदकी सम्पन्नता .......................................... ७६२ ✿ कर्मसंन्यासकी शास्त्रसम्मतता ................. ७६२ ✿ सर्वविध व्यवधानकी असहिष्णुता भगवत्प्रेमकी प्रगल्भता ........................................... ७६३ ✿ स्वात्मसमर्पणसे ही भक्ति और भगवान्‌की पूर्णता .............................................. ७६४ ✿ भगवद्-विग्रहकी व्यावहारिकता तथापि उपादानांशमें परमार्थता एवं निमित्तांशमें आकाशादिसे विलक्षणता ..................... ७६५ ✿ स्वरूपतः निर्गुण-निरपेक्ष-परमानन्दस्वरूप भगवत्तत्त्वके सगुण-साकाररूपसे प्रादुर्भावमें विशुद्ध सत्त्वात्मिका शक्तिकी निमित्तमात्रता .................................... ७६५ ✿ सबके अभिमत स्वरूपकी वास्तविक भगवद्रूपता .......................................... ७६६