भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १२ ] ✿ निरन्तर भगवत्स्मरण सभीके लिये परम श्रेयस्कर है ............................................. ६५० १७. करुणालहरी ............................................ ६५३ ✿ प्रेमी भक्तका भगवान्के प्रति मधुर उपालम्भ.. ६५३ १८. गजेन्द्र-मुक्ति ......................................... ६५५ ✿ आर्तभक्तकी प्रार्थना ................................. ६५५ १९. संकल्प-बल ............................................ ६५८ ✿ परमात्मा ही जगत्के उपादान और निमित्त कारण ............................................... ६५९ ✿ संकल्पका प्राधान्य .................................. ६५९ ✿ संकल्पके अनुसार ही क्रियाकी निष्पत्ति ... ६६१ ✿ असत्संकल्पोंको त्यागनेकी रीति ............... ६६१ ✿ सत्-तत्त्वका प्रभाव ................................ ६६२ ✿ संकल्पसिद्धिका बाधक—अविश्वास ......... ६६२ ✿ संकल्पका स्वरूप .................................. ६६४ ✿ शुभसंकल्पकी ही भावना करें .................. ६६४ ✿ योगियोंका संकल्प-बल ........................... ६६५ ✿ मनसे पापकर्मोंका परित्याग और अच्छे कर्मोंका अनुष्ठान करना चाहिये ............. ६६५ ✿ बुरे कर्मोंके संकल्पोंको रोकना परमावश्यक .. ६६६ ✿ सत्कर्म और उत्तम मन्त्रोंके जपसे संकल्पका बल दुगुना हो जाता है ............................ ६६७ ✿ मन्त्रजपके अधिकारी-अनधिकारी ............ ६६८ २०. ज्ञान और भक्ति ...................................... ६७० ✿ ज्ञान बड़ा या भक्ति बड़ी ........................... ६७० ✿ भक्ति और ज्ञानका स्वरूप ....................... ६७१ ✿ भक्तिसे ज्ञानकी प्राप्ति ............................ ६७२ ✿ भक्तिका अर्थ ज्ञान है .............................. ६७३ ✿ ज्ञान नामकी स्वतन्त्र वस्तु नहीं है ......... ६७४ ✿ वेदोंके दो काण्ड—कर्मकाण्ड और उपासना- काण्ड................................................. ६७५ ✿ भक्तिका उत्कर्ष ................................... ६७५ ✿ भक्ति और वेदान्त ................................ ६७६ ✿ भक्ति और ज्ञानके उत्कर्ष तथा अपकर्षका चिन्तन व्यर्थ है ................................... ६७८ ✿ भक्तिसे ज्ञानद्वारा परम तत्त्वकी प्राप्ति....... ६८१ ✿ सगुणोपासना और निर्गुणोपासनाका तारतम्य .. ६८२ ✿ सगुणोपासना सरल है .......................... ६८४ ✿ जीवन्मुक्तकी भी भगवान्के भजनमें अभिरुचि ... ६९० २१. भक्तिरसामृतास्वादन .................................... ६९१ ✿ प्रेम वाणीका विषय नहीं ......................... ६९३ ✿ विरक्तोंद्वारा भी भक्तिकी कामना ............. ६९४ ✿ भगवत्प्रेमके साधन ............................... ६९४ ✿ चित्तद्रुतिसे भक्तिमें भेद ........................ ६९५ ✿ परब्रह्मकी प्रेमास्पदता ............................ ६९६ ✿ ब्रह्म, परमात्मा और भगवान्में भेद....... ६९७ ✿ निर्गुण और सगुणका स्वरूप .................. ६९९ ✿ भगवान्के सभी गुण भक्तोपयोगी ............. ७०० ✿ भगवान्की तीन शक्तियाँ ......................... ७०१ ✿ बिम्बप्रतिबिम्बभाव ................................. ७०२ ✿ अज्ञातज्ञापकत्व ही प्रमाणोंका प्रामाण्य है .... ७०३ ✿ आचार्य श्रीमद्मधुसूदनजी सरस्वती—व्यक्तित्व एवं कृतित्व ......................................... ७०४ २२. क्या ईश्वर और धर्मके बिना काम चलेगा ..... ७०५ ✿ विविध शंकाओंके युक्तियुक्त शास्त्रोक्त समाधान .............................................. ७०५ चतुर्थ खण्ड—ज्ञानतत्त्वदर्शन १. वेदान्तरससार ........................................... ७१४ ✿ मंगलाचरण ......................................... ७१४ ✿ वेदप्रामाण्य-तात्पर्यविमर्श ....................... ७१४ ✿ ब्रह्मकी सच्चिदानन्दरूपता और जगत्की असच्चिदानन्दरूपता ............................ ७१५ ✿ मायाकी अनिर्वचनीयता ............................ ७१५ ✿ ज्ञानस्वरूप-विमर्श ................................. ७१६ ✿ भगवत्तत्त्व-प्रतिपादन ............................ ७१६ ✿ भगवत्तत्त्वकी आत्मरूपता ......................... ७२० ✿ शोधित अहमर्थकी प्रत्यगात्मरूपता .......... ७२३ ✿ ब्रह्मात्मतत्त्वकी रसरूपता ......................... ७२५ ✿ अविक्रिय विज्ञानघन आत्माकी ब्रह्मरूपता.. ७२७ ✿ भ्रमबीज द्वैतमूल अज्ञानातीत आत्माकी स्वप्रकाश आनन्दरूपता ........................ ७२८ ✿ सबीज ब्रह्मकी परिणामोपादानता और निर्बीज ब्रह्मकी विवर्तोपादानता ........................... ७३० ✿ अनुभवगोचरता और आच्छादकताके कारण अज्ञानकी भावरूपता न कि ज्ञानाभावरूपता .. ७३२ ✿ निष्प्रपंच परमात्मामें कल्पित तादात्म्य-सम्बन्धसे प्रकृति तथा प्रपंचकी विद्यमानता ............ ७३३ ✿ वेदान्ताभ्यासजन्य संस्कारसम्पन्न निरुद्धान्तःकरणसे निरावरण ब्रह्मसाक्षात्कारकी सम्पन्नता ......... ७३५