भामती (वाचस्पति मिश्र - ब्रह्मसूत्र शाङ्करभाष्य चतुःसूत्री हिन्दी व्याख्या)

भामती (वाचस्पति मिश्र - ब्रह्मसूत्र शाङ्करभाष्य चतुःसूत्री हिन्दी व्याख्या)
Bhamati of Vachaspati Mishra Hindi
वाचस्पति मिश्र (व्याख्याकार: स्वामी योगेन्द्रानन्द) द्वारा
स्रोत: Brahma Sutra Shankara Bhashya with Vachaspati Mishra Bhamati and Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished639 पृष्ठ
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हिन्दीसहितभामतीसंचलितम् १३
अविरोधाख्यद्वितीयोध्यायस्य
(१) प्रथमे पादे—
| १. | स्मृत्यधिकरणम्— | ५३३ |
| २. | सांख्यस्मृतिविरोधपरिहारः | ५३३ |
| ३. | योगप्रत्युक्त्यधिकरणम्— | ५४१ |
| ४. | योगशास्त्रविरोधनिरासः | ५४१ |
| ५. | विलक्षणत्वाधिकरणम्— | ५४५ |
| ६. | सांख्यतर्कविरोधोद्धारः | ५४५ |
| ७. | शिष्टापरिग्रहाधिकरणम्— | ५६२ |
| ८. | कणादादितर्कविरोधापसारणम्— | ५६५ |
| ९. | भोक्त्रापत्त्यधिकरणम्— | ५६६ |
| १०. | भोक्त्रादिविभागो लोकवत् | ५६६ |
| ११. | आरम्भणाधिकरणम्— | ५६७ |
| १२. | कार्यस्य कारणव्यतिरेकेणाभावः | ५६८ |
| १३. | ब्रह्मभेदाभेदनिरासः | ५७६ |
| १४. | असत्यात् सत्यस्योत्पत्तिः | ५७७ |
| १५. | कार्यकारणयोरभेदः | ५८५ |
| १६. | सत्कार्यवादः | ५८६ |
| १७. | समवायनिरासः | ५९१ |
| १८. | सत्कार्यवादः | ५९३ |
| १९. | इतरव्यपदेशाधिकरणम्— | ५९८ |
| २०. | स्रष्टुर्हिताकरणदोषनिरासः | ५९९ |
| २१. | उपसंहारदर्शनाधिकरणम्— | ६०० |
| २२. | असहायस्यैव ब्रह्मणः स्रष्टृत्वम् | ६०१ |
| २३. | कृत्स्नप्रसक्त्यधिकरणम्— | ६०३ |
| २४. | निरवयवस्यैवोपादानत्वम् | ६०४ |
| २५. | सर्वोपेताधिकरणम्— | ६०८ |
| २६. | एकरसस्यापि ब्रह्मणो विचित्रा सृष्टिः | ६०८ |
| २७. | न प्रयोजनवत्त्वाधिकरणम्— | ६०९ |
| २८. | लीलामात्रा सृष्टिः | ६०९ |
| २९. | वैषम्यनैर्घृण्याधिकरणम्— | ६१३ |
| ३०. | जीवकर्मापेक्षा सृष्टिः | ६१३ |
| ३१. | अनादिः संसारः | ६१५ |
| ३२. | सर्वधर्मोपपत्त्यधिकरणम्— | ६१७ |
| ३३. | निर्गुणस्यैव ब्रह्मणः स्रष्टृत्वम् | ६१७ |