भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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९८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे ❖ रसप्रसादः = रसस्य सारः ।।७।। 'रसप्रसादः' का अर्थ है 'रस का सार भाग' ॥७॥ अथ स्तन्यस्य प्रवृत्त्यवधिमाह- स्तन्यं त्रिरात्रात्स्त्रीणां वा चतुरात्रादनन्तरम्। प्रवर्तयन्ति विवृता धमन्यो हृदये स्थिताः ।।८।। प्रसूता स्त्रियों के स्तनों से दूध उतरने का समय—प्रसव होने के तीन अथवा चार रात्रि व्यतीत होने पर प्रसूता के हृदय में स्थित दूध को वहन करनेवाली धमनियों का मुख खुल जाने पर उनसे दूध निकलने लगता है ॥८॥ अथ स्तन्यप्रवृत्तिमाह- पयः पुत्रस्य संस्पर्शाद्दर्शनात्स्मरणादपि। ग्रहणादप्युरोजस्य शुक्रवत्सम्प्रवर्तते। स्नेहो निरन्तरस्तस्य प्रवाहे हेतुरुच्यते ।।९।। दूध निकलने के कारण—अभिलषित स्त्रियों का दर्शन अथवा स्पर्शादि करने से जिस प्रकार शुक्र का क्षरण होता है उसी प्रकार पुत्र का भी दर्शन, स्पर्श अथवा स्मरण करने से तथा स्तनों को पकड़ने से भी माता का दूध निकलने लगता है। सुतरां दूध के निकलने में माता का प्रगाढ़ स्नेह ही कारण होता है ॥९॥ अथ स्तन्यस्याल्पताहेतुमाह- अवात्सल्याद्भयाच्छोकात्क्रोधादत्यपतर्पणात्। स्त्रीणां स्तन्यं भवेत्स्वल्पं गर्भान्तरविधारणात् ।।१०।। दूध के कम निकलने के कारण—अवात्सल्य (वात्सल्यहीनता) अर्थात् पुत्र में स्नेह न होना, भय, शोक, अत्यन्त अपतर्पण (भोजनादि से तृप्त न रहना) अथवा दूसरा गर्भ धारण करना, इन सब कारणों से स्त्रियों के कम दूध निकलने लगता है ॥१०॥ अथ स्तन्यस्य वृद्धिहेतुमाह- शालिषष्टिकगोधूममांसक्षुद्रझषानपि। कालशाकमलाबूं च नारिकेलं कसेरुकम् ।।११।। शृङ्गाटकं वरीं चापि विदारीकन्दमेव च। लशुनं दुग्धवृद्ध्यै स्त्री सेवेत सुमना भवेत् ।।१२।। कलमस्य तण्डुलानां कल्कं या क्षीरपेषितं पिबति। सा भवति भृशं तरुणी क्षीरभारेणैव तुङ्गकुचयुगला ।।१३।। दूध के बढ़ने के कारण—शालि (अगहनी) और षष्टिक (साठी) धान्य, गेहूँ, मांस, क्षुद्रमत्स्य (छोटी-छोटी मछलियाँ), कालशाक (नरिचा), अलाबू (लौआ या लौकी), नारियल, कसेरू सिंघाड़ा, शतावर, विदारीकन्द और लहसुन इन सब द्रव्यों को दूध बढ़ने के लिये प्रसूता स्त्री सेवन करे और सुमना (प्रसन्न चित्त) रहे अर्थात् शालि, षष्टिकादि द्रव्यों के सेवन से दूध की वृद्धि होती है तथा माता का चित्त प्रसन्न रहने से भी दूध की वृद्धि होती है। 'कलम' नामक धान्य विशेष का चावल दूध के साथ पीस कर उसका कल्क (चटनी) बनाकर जो तरुणी स्त्री भक्षण करती है, वह दूध के भार से अत्यन्त उन्नत कुचोंवाली हो जाती है ॥११-१३॥ कलमो धान्यविशेषस्तस्य लक्षणमाह- कलमः कलिविख्यातो जायते स बृहद्ह्रदे¹। काश्मीरदेश एवोक्त महातण्डुलसंज्ञकः ।।१४।। कलम नामक धान्यविशेष का लक्षण—कलम नामक जो धान्य कलि में विख्यात है वह बड़े भारी हृद (जलाशय में) उत्पन्न होता है, उसी को काश्मीर देश में महातण्डुल नाम से कहते हैं ॥ १. 'बृहद्धने' इति पा.।