भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 1167 में से

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३२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे धान्याम्ल के लक्षण तथा गुण ९३१ शिण्डाकी के लक्षण तथा गुण ९३१ शुक्त के लक्षण तथा गुण ९३१ मद्य के लक्षण, भेद तथा गुण ९३२ अरिष्ट के लक्षण तथा गुण ९३२ सुरा के लक्षण तथा गुण ९३२ वारुणी के लक्षण तथा गुण ९३३ सीधु के लक्षण तथा गुण ९३३ आसव के लक्षण तथा गुण ९३३ नई-पुरानी मदिरा के गुण ९३४ मद्य पीने का प्रकार ९३४ मद्य-गन्ध दूर करने का उपाय ९३४ मधुवर्गः मधु के नाम तथा गुण ९३५ माक्षिक मधु के लक्षण तथा गुण ९३५ भ्रामरजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ क्षौद्रजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ पौत्तिकजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ छात्रजातीय लक्षण तथा गुण ९३६ आर्ध्यजातीय लक्षण तथा गुण ९३७ औद्दालक जातीय लक्षण तथा गुण ९३७ दालजातीय लक्षण तथा गुण ९३७ नये मधु के गुण ९३७ परिभाषा शीतल तथा उष्ण मधु का विधि-निषेध ९३८ मोम के नाम तथा गुण ९३८ इक्षुवर्गः गन्ने के नाम तथा रस के गुण ९३९ पौँड्रक तथा भीरुक संज्ञक इक्षुरस के गुण ९३९ कोशकार इक्षुरस के गुण ९३९


कांतार संज्ञक के गुण ९४० वंशक संज्ञक के गुण ९४० शतपोरक संज्ञक के गुण ९४० तापस संज्ञक के गुण ९४० कांड संज्ञक के गुण ९४० सूचीपत्रादि संज्ञक के गुण ९४० मनोगुप्ता संज्ञक के गुण ९४० नवीन तथा पक्कापक्व के गुण ९४१ अंगभेद से पक्कापक्व ९४१ अंगभेद से पक्कापक्व ९४१ चूसे हुए के गुण ९४१ पिरे हुए के गुण ९४१ बासी के गुण ९४१ पकाया हुआ ईंख का रस ९४१ इक्षु-रस से बने पदार्थों के गुण फाणित (चरका, राब, छोवा आदि) के लक्षण तथा गुण ९४२ मत्स्यण्डी (खंडराब) के लक्षण तथा गुण ९४२ गुड़ के लक्षण तथा गुण ९४२ नवीन और पुराने गुड़ के लक्षण ९४३ अनुपान भेद से गुड़ के गुण ९४३ खांड़ के गुण ९४३ चीनी के लक्षण और गुण ९४३ पुष्पसिता के लक्षण और गुण ९४३ मधु-खण्ड के लक्षण और गुण ९४३ परिभाषा ९४४ अनेकार्थनामवर्गः दो अर्थ वाले शब्द ९४५ तीन अर्थ वाले शब्द ९४९ चार अर्थ वाले शब्द ९५२ बहुत अर्थ वाले शब्द ९५३

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