भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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वटादिवर्गः ६९३ बीज-दोनों सिरों पर सपक्ष होते हैं। इसकी लकड़ी फर्नीचर बनाने के काम आती है। छाल तथा पुष्प का उपयोग चिकित्सा में किया जाता है। रासायनिक संगठन-फूलों में लाल रंजक द्रव्य निकटॅन्थिन् (Nyctanthin, C₁₅ H₁₈ O₃) होता है जो पारिजाता के रंजक द्रव्य के समान होता है। छाल में टेनिक एसिड, कडुवी राल, साइट्रिक एसिड, स्टार्च तथा अन्य द्रव्य होते हैं। इसमें कोई क्षाराभ नहीं पाया जाता है। राख में चूना (Calcium) काफी होता है। काष्ठ में ०.४४% स्वर्ण पीत रंग का उड़नशील तैल होता है। गुण और प्रयोग-इसकी छाल ग्राही, बल्य, पौष्टिक एवं अल्प प्रमाण में ज्वर प्रतिबंधक है। पुष्प गर्भाशय संकोचक है। (१) बच्चों के जीर्ण अतिसार आदि में छाल का प्रयोग करते हैं। विषम ज्वर में दस्त होते हों तो इसको दिया जाता है। (१) गर्भाशय की शिथिलता के कारण यदि अत्यार्तव हो तो पुष्प या छाल का फांट देते हैं। (३) छाल का लेप या चूर्ण व्रण पर लगाने से व्रण का संकोचन अच्छा होता है। मात्रा-छाल २ १/२ तोला फांट बनाकर काली मिर्च के साथ। अथ भूर्जपत्रः (भोजपत्र) । तस्य नामानि गुणाँश्चाह भूर्जपत्रः स्मृतो भूर्जश्चर्मी बहुलवल्कलः । भूर्जो भूतग्रहश्लेष्मकर्णरुक्पित्तरक्तजित् ।।४७।। कषायो राक्षसघ्नश्च मेदोविषहरः परः ।।४८।। भोजपत्र के संस्कृत नाम-भूर्जपत्र, भूर्ज, चर्मी तथा बहुलवल्कल ये सब हैं। भोजपत्र-कषाय रसयुक्त एवम् भूतग्रहबाधा, कफ तथा कर्ण सम्बन्धी रोग, पित्त, रक्तविकार तथा राक्षसबाधा का नाशक है और विशेषतः यह मेद तथा विष को दूर करने वाला है। [४७-४८] २६. भोजपत्र हिं०-भोजपत्र, भूजपत्र, भोजपत्तर। बं०-भूजिपत्र। म०-भूर्जपत्र। ते०-भोजपत्रमु। अं०-Himalayan Silver Birch (हिमालयन् सिल्वर बर्च)। ले०-Betula utilis D. Don. (बेटुला यूटिलिस्)। Fam. Betulaceae (बेटुलेसी)। यह गरम हिमालय में काश्मीर में ७ से १२ हजार फीट तक और सिक्कम में ९ से १४ हजार फीट तक और भूटान में उत्पन्न होता है। इसका वृक्ष-४०-६५ फीट तक ऊँचा होता है। छाल-चिकनी, चमकीली, सफेद या किञ्चित् लाली युक्त सफेद, आड़े धब्बेदार (Lenticel) पर्त के पर्त, कागज के समान एक साथ सटी रहती है और वह आसानी से पृथक्-पृथक् हो जाती है। पत्ते-२-३ इञ्च तक लम्बे, १ १/२ इञ्च चौड़े, लट्वाकार, लम्बाग्र, दन्तुर एवं नये पत्ते पीत रालीय बिन्दुओं से युक्त होने के कारण चिपचिपे होते हैं। फूल-बारीक मञ्जरियों में आते हैं और फल-काष्ठवत् गोल होते हैं। वृक्ष की छाल को ही भोजपत्र कहते हैं। प्राचीन काल में इनका लिखने के काम में प्रयोग किया जाता था। इसकी एक अन्य जाति बे. अल्नाइडीस (B. alnoides Buch.) होती है जिसके पेड़ १०० फीट तक ऊँचे होते हैं। छाल मोटे परतों में छूटती है तथा धब्बे छोटे होते हैं। रासायनिक संगठन-इसमें बेटुलिन (Betulin) तथा उड़नशील तैल पाया जाता है।