भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७३० भावप्रकाशनिघण्टुः २३. बेर (कोल, बदर) हिं०-बेर, बैर, बहर। बं०-कुल बेर। म०-बोर, बोरीचे झाड़। गु०-बीर। ता०-इलंदै। ते०-रेगु चेट्टु। अ०-सिदर नवङ्क। अं०-Plum (पल्म)। ले०-Zizyphus jujuba Lam. (झिझिफस् जुजुबा)। Fam. Rhamnaceae (हॅम्नेसी)। बेर प्रायः सब प्रान्तों में होता है। यह जंगलों में आप ही आप उत्पन्न होता है और बागों में रोपण किया जाता है। इसका वृक्ष-मध्यमाकार का होता है और शाखायें बहुत होती हैं। वृक्ष और शाखायें छोटे-छोटे तीक्ष्ण काँटों से भरी रहती हैं। पत्ते-१-१॥ इञ्च के घेरे में गोलाई लिये लम्बे होते हैं। फूल-हरापन युक्त सफेद आते हैं। फल-संख्या में बहुत, अण्डाकार, पकने पर फीके पीले या नारंगी रंग के होते हैं। गुठली-कठोर होती है। गुण और प्रयोग-इसके फल स्नेहन, रक्तस्तम्भक, पाचन, रक्तशोधन, हृद्य, उदर्द प्रशमन, अमहर एवं वातसंशमन हैं। इसके बीज हिक्का निग्रहण एवं नेत्त्र्य हैं। इसका पत्रलेप ज्वर एवं दाहनाशक है। इसकी छाल, विस्फोट शामक तथा अतिसार में लाभदायक है। २४. झड़बेर (कर्कन्धू, क्षुद्रबदर) हि०-झड़बेर, झरबेर, झड़बेरी। पं०-कोकनबेर। म०-जंगलीबोर। गु०-चणीआंबोर, चणीबोर। ले०- Zizyphus nummularia W. & A. (झिझीफस् न्यूम्यूलेरिया)। Fam. Rhamnaceae (हॅम्नेसी)। यह शुष्क भागों में प्रायः सभी जगह पाया जाता है। इसका वृक्ष-झाड़ के समान एक गज तक ऊँचा और शाखायें-सूक्ष्म काँटों से भरी हुई पतली-पतली भूमि की ओर नत रहती हैं। पत्ते-उक्त बेर के पत्तों के आकार के परन्तु उनसे छोटे होते हैं। फल-छोटे-छोटे उन्नाव के समान होते हैं। गुण और प्रयोग-इसके फल शीतल ग्राही एवं पित्तशामक होते हैं। इसकी पत्तियाँ पामा तथा फोड़े पर लगाई जाती हैं। अथ प्राचीनामलकम् (पानी आँवला)। तस्य नामानि गुणांश्चाह प्राचीनामलकं लोके पानीयामलकं स्मृतम्। प्राचीनामलकं दोषत्रयजिज्ज्वरघाति च ।।७८।। पानी आँवला के संस्कृत नाम-प्राचीनामलक तथा पानीयामलक हैं। पानी आँवला-त्रिदोष तथा ज्वर को दूर करने वाला होता है। [७८] २५. पानी आमला हिं०-पानी आमला, पानी आँवड़ा (रा), पनियाला। बं०-पानिआमला। म०-पान आँवला, तांबर। गु०- तालिसपत्र। अं०-Puneala plum (पनियाला प्लम्)। ले०-Flacourtia cataphracta Roxb. (फ्लाकोर्शिया कॅटाफ्रॅक्टा)। Fam. Flacourtiacae (फ्लाकोर्शियेसी)। यह बंगाल, आसाम, चट्टगाँव, कोंकण आदि प्रान्तों में पाया जाता है। इसका वृक्ष-छोटे कद का होता है और शाखाओं पर लम्बे एवं बहुविभक्त काँटे होते हैं। पत्ते-३ से ५ इञ्च लम्बे, आयताकार या आयताकार-भालाकार, लम्बाग्र, चिकने एवं गोल या आरावत् दन्तुर होते हैं। फूल-बहुत छोटे-