भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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मांसवर्ग: ८६९ मछलियों में रोहू मछली के लक्षण-जिस मछली का उदर, मुख, नेत्र तथा अगल-बगल के छोटे-छोटे पंख ये सब रक्तवर्ण के हों एवम्-पूँछ काली हो तो पण्डित लोग उसे "रोहू मछली" कहते हैं। सम्पूर्ण मछलियों में रोहू नामक मछली ही श्रेष्ठ होती है। रोहू का मांस-वीर्यवर्धक, अर्दितवात (मुँह का लकवा) को दूर करने वाला, आरम्भ में स्वादिष्ट, अन्त में कषायरसयुक्त, वातनाशक और अत्यन्त पित्तकारक नहीं (किञ्चित् पित्तकारक) होता है। रोहू का मुण्ड-जत्रु (कन्धा तथा काँख की सन्धि) से ऊपर के भागों में होने वाले रोगों को दूर करने वाला होता है। [१०४-१०५] अथ शिलीन्ध्रः तस्य मांसगुणानाह शिलीन्ध्रः श्लेष्मलो बल्यो विपाके मधुरो गुरुः । वातपित्तहरो हृद्यः आमवातकरश्च सः ॥१०६॥ शिलीन्ध्र मछली का मांस-कफकारक, बलदायक, विपाक में मधुर रसयुक्त, गुरु, वातपित्तनाशक, हृदय के लिये हितकर तथा आमवात कारक होता है। [१०६] अथ भाकुरः । तस्य मांसगुणानाह भाकुरो मधुरः शीतो वृष्यः श्लेष्मकरो गुरुः । विष्टम्भजनकश्चापि रक्तपित्तहरः स्मृतः ॥१०७॥ भाकुर मछली का मांस-मधुररसयुक्त, शीतल, वीर्यवर्धक, कफकारक, गुरु, विष्टम्भ उत्पन्न करने वाला तथा रक्तपित्त नाशक होता है। [१०७] अथ मोचिका। तस्यां मांसगुणानाह मोचिका वातहृद् बल्या बृंहणी मधुरा गुरुः । पित्तहृत्कफकृद्रुच्या वृष्या दीप्ताग्नये हिता ॥१०८॥ मोचिका मछली का मांस-वात को दूर करनेवाला, बलकारक, बृंहण (रस-रक्तादिवर्धक), मधुर रसयुक्त, गुरु, पित्तनाशक, कफकारक, रोचक, वीर्यवर्धक एवम् दीप्त अग्निवाले पुरुषों के लिये हितकर होता है। [१०८] अथ पाठीनः । तस्य मांसगुणानाह पाठीनः श्लेष्मलो बल्यो निद्रालुः पिशिताशनः । दूषयेद्रुधिरं पित्तं कुष्ठरोगं करोति च ॥१०९॥ पाठीन मछली का मांस-कफकारक, बलदायक, निद्रा को लाने वाला होता है। यह मछली मांस खाने वाली होती है अतः इसका मांस रुधिर को दूषित करने वाला एवम् पित्त तथा कुष्ठ रोग को उत्पन्न करने वाला होता है ॥१०९॥ अथ शृङ्गी (सींगी) । तस्या मांसगुणानाह शृङ्गी तु वातशमनी स्निग्धा श्लेष्मप्रकोपणी । रसे तिक्ता कषाया च लघ्वी रुच्या स्मृताबुधैः ॥११०॥ शृङ्गी मछली का मांस-वायु को शमन करने वाला, स्निग्ध, कफ को प्रकुपित करने वाला, तिक्त तथा कषाय रस युक्त, लघु तथा रुचिकारक होता है। [११०] अथेल्लीशः (हिल्सा) । तस्य मांसगुणानाह इल्लीसो मधुरः स्निग्धो रोचनो वह्निवर्द्धनः । पित्तहृत्कफकृत्किञ्चिल्लघुर्वृष्योऽनिलापहः ॥१११॥ हिल्सा मछली का मांस-मधुर रस युक्त, स्निग्ध, रोचक, अग्निवर्धक, पित्त को दूर करने वाला, कफकारक, किंचित् लघु, वीर्यवर्धक तथा वायुनाशक होता है। [१११]