भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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दुग्धवर्गः ९१३ गाय अथवा बकरी के दूध का फेन-त्रिदोषनाशक, रोचक, बलवर्धक, अग्नि की वृद्धि करने वाला, वीर्यवर्धक, तत्काल तृप्ति देने वाला, लघु एवम् अतीसार, अग्नि की मन्दता तथा पुराने ज्वर में हितकर होता है । [४४-४५] अथ निन्दितदुग्धस्य लक्षणमाह विवर्णं विरसं चाम्लं दुर्गन्धं ग्रथितं पयः । वर्जयेदम्ललवणयुक्तं कुष्ठादिकृद् यतः ।।४६।। निन्दित दूध के लक्षण—जो दूध-विवर्ण (बदरङ्ग हो गया हो), विरस (खराब स्वाद वाला), खट्टा, दुर्गन्धयुक्त, ग्रन्थि पड़ा हुआ (फटा हुआ) एवम् खटाई या नमक पड़ा हुआ हो उसे छोड़ देना चाहिये अर्थात् न पीवे, क्योंकि उक्त दूध के पीने से कुष्ठ आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं । [४६] इति श्रीमिश्रलटकनतनयश्रीमिश्रभावविरचिते भावप्रकाशे वर्गप्रकरणे दुग्धवर्गः समाप्तः । ६१ भाव.I CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA