भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
११०८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे बहेड़ा फल का छिलका ५-१० माशे बाकुची बीज १-२ माशे बादाम तेल ३-६ माशे बायविडंग बीज ५-१० माशे बाराहीकन्द कन्द ३-६ माशे बिजैसार छाल-लकड़ी ३-४ माशे बिदारीकंद कंद ६ माशे-१ तोला विधारा जड़ ६ माशे-१ तोला विषांविल फल-गूदी ३-४ माशे (वृक्षाम्ल) बेल सूखी-गूदी १-२ तोले ब्रह्मदण्डी पञ्चाङ्ग ३-७ माशे ब्राह्मी पञ्चांग, पत्ते ६ माशे-१ तोला भांग पत्ते-बीज १-१० रत्ती भांगरा पञ्चाङ्ग ६ माशे से १ तोला भारंगी जड़ की छाल ३-६ माशे भिलावा फल (विषयुक्त) १-२ ।। माशे तेल ४ रत्ती से १ माशा भुइँ आँवला पञ्चाङ्ग ३-५ माशे भूतृण जड़ १-२ माशे मङ्गरेला बीज २-५ माशे मण्डूकपर्णी पञ्चाङ्ग-पत्ते ६ माशे से १ तोला मण्डूक शुद्धभस्म १-३ रत्ती मकोय फल ६-९ माशे मखाना भुने ६ माशे से १ तोला मछेछी पञ्चाङ्ग १-१ ।। तोला मजीठ लकड़ी १-३ माशे मधु आर्द्र १/२-३ तोले मयनसिल शुद्ध (विषयुक्त) १-४ रत्ती मरिच (काली) बीज १-४ माशे मरुआ पचाङ्ग ३-७ माशे मषवन पञ्चाङ्ग ६-१० माशे (माषपर्णी) मांसरोहिणी छाल ६-१०. माशे (रोहिणी) CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA
परिशिष्ट २ ११०९ मानकन्द कन्द ६ माशे से १ तोला मानफल फल १-४ माशे मालकांगुनी बीज १-२ माशे मुण्डी फल-पञ्चाङ्ग २ माशे-१ तोला मुचकुन्द फूल ६-९ माशे मुनक्का फल १०-१५ दाने मुरदाशंख खनिजशुद्ध ४ रत्ती से १ माशे मुलेठी लकड़ी ६-९ माशे मुसब्बर पिण्ड १-३ माशे मूँगा समुद्री लाल २-६ रत्ती पत्थर शुद्ध भस्म मूँज जड़ २-६ माशे मूर्वा पञ्चाङ्ग ६-७ माशे मूली कन्द-स्वरस १-५ तोला मूसली जड़ ३ माशे मूसाकानी सर्वाङ्ग २-३ माशे मेढ़ाशिंगी पञ्चाङ्ग ३-६ माशे मेथी बीज २-५ माशे मैनफल फल २-३ माशे मोचरस गोंद २-४ माशे मोथा जड़ ३-४ माशे मोम पिण्ड ३ रत्ती-१ ॥ माशे मौलसिरी छाल, फूल, फल ३ माशे से १ तोला रक्तचन्दन लकड़ी २-४ माशे रसकपूर पिण्ड (विष) शुद्ध १/२ से १ रत्ती रसोत घनसत्त्व १-३ माशे रांगा शुद्ध भस्म १-२ रत्ती राई बीज ३-६ माशे रासना मूल २-५ माशे रीठा फल-छाल १-३ माशे रुद्रवंती पञ्चाङ्ग १-३ माशे रेणुक बीज १-३ माशे रेवतचीनी जड़ २-५ माशे रोहिड़ा छाल ६ माशे से १ तोला (रोहितक) CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammnu. Digitized by S3 Foundation USA
१११० भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे रोहिस घास पञ्चाङ्ग, जड़ १-३ माशे लज्जालु जड़, पत्ते ६ माशे से १ तोला लताकरञ्ज बीज-मींगी २-७ रत्ती लताकस्तूरी बीज १-२ माशे लहसुन कन्द १-३ माशे लक्ष्मणा पञ्चाङ्ग, कन्द १-२ माशे लाख (लाक्षा) २-४ माशे लालमरिच फल १-२ माशे लिसोरां फल १५-२० दाने लोध छाल १-३ माशे लोहबान गोंद २-६ माशे लोहा शुद्ध-भस्म १-२ रत्ती लौंग फूल १-४ माशे वत्सनाभ विष-शुद्ध १/३२ से १/४ रत्ती शंख भस्म ३ रत्ती से १ माशे शाल छाल १-३ माशे शिलाजीत शुद्ध १ रत्ती से १ माशे शिवलिङ्गी पञ्चाङ्ग-बीज ३-९ दाने शीतलचीनी फल २-४ माशे शीशा धातु, शुद्धभस्म १-२ रत्ती संखाहुली पञ्चाङ्ग ६ माशे से १ ।। तोले (शंखपुष्पी) संखिया महाविषभस्म १/३२ रत्ती से १/२ रत्ती संगजराहत पत्थर शुद्धभस्म ३-८ रत्ती सज्जीखार क्षार २-८ रत्ती सतावर जड़ ६ माशे से १ तोला सतिवन (सप्तपर्ण) छाल १-२ माशे सत्यानाशी जड़-बीज २-४ माशे (स्वर्णक्षीर) सनाय पत्ते ३ माशे से १ तोशे समुद्रफल फल १/४ से १/२ फल समुद्रफेन शुष्कफल १-२ रत्ती समुद्रशोष बीज १-२ माशे सम्भालु बीज १-३ माशे CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA
परिशिष्ट २ ११११ सरफोंका जड़, पञ्चाङ्ग, पत्ते ३-६ माशे सरसों बीज ३-६ माशे सरिवन जड़, पञ्चाङ्ग ३-९ माशे सहदेई पञ्चाङ्ग ३-६ माशे सहिजना छाल, बीज ३-६ माशे सांभरनोन लवण ३-९ माशे सिंगरफ भस्म १/२ से २ रत्ती सिरस छाल, बीज ३ माशे से १ तोशे सुपारी फल १-४ माशे सुहागा श्वेतपिण्ड-शुद्ध १-३ माशे सेमर मूसला, छाल, फूल ३-९ माशे सेंधानोन लवण ३-८ माशे सोंठ कन्द ३-७ माशे सोआ बीज २-३ माशे सोना धातु शुद्धभस्म १/२ से १ रत्ती सोनापाठा छाल ४-१० माशे सोनामक्खी धातु शुद्धभस्म १-३ रत्ती सोमलता पञ्चाङ्ग ३-६ माशे सोरा क्षार १-२ माशे सौंफ बीज ६ माशे १ तोशे हंसपदि पञ्चाङ्ग ३ माशे से १ तोला हड़जोरी पञ्चाङ्ग १-२ माशे हड़ फल-छिलका ४ माशे से १ ॥ तोला हरताल शुद्ध भस्म १/२-२ रत्ती हलदी जड़ २-६ माशे हाऊबेर फल ३-६ माशे हाथीशुंडी पञ्चाङ्ग २-१० माशे हारसिंगार पत्ते, फूल १-३ माशे हिंगोट पञ्चाङ्ग, बीजगिरी १-१५ रत्ती हींग गोंद २ रत्ती से १. माशे हुरहुर पत्ते, बीज २-४ माशे
(-) वि(v) मुक्(-) त(v) प(v) द(v) भा(-) जि(v) शु(v) भे(—) ऽधि(-) का(-) शि(v)) -> Vasantatilakā!
And line 25:
श्रीरामसंयुतचरित्रमणेरुदार-चूडामणेर्निजपितृस्वसुरीश्वरस्य ।।१२।।
Scan:
श्री(-) राम(-) सं(v... no, श्री(-) रा(-) म(v) सं(-) यु(v) त(v) च(v) रि(-) त्र(v) म(v) णे(-) रु(-) दा(-) र(-) -> Vasantatilakā!
चू(-) डा(-) म(v) णेर्(-) नि(v) ज(v) पि(v) तृस्(-) व(v) सु(-) री(-) श्व(-) रस(-) य? -> Vasantatilakā!
* Line 26-27 (Verse 13):
`पक्वेष्टकाऽऽदिरचितेऽभिनवेऽतिभव्ये-गेहे वसंस्तदुपदेशविशेषवश्यः ।`
Wait, look at `पक्वेष्टकाऽऽदि`:
`पक्वेष्टकाऽऽदिरचितेऽभिनवेऽतिभव्ये-गेहे वसंस्तदुपदेशविशेषवश्यः ।`
Line 27:
`सानन्दमे
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[प्रथम पुस्तक आवरण / First Book Cover] आयुर्वेदोपजीवक सिद्धान्त [SECONDARY PRINCIPLES OF AYURVEDA] प्रो० ओम् प्रकाश उपाध्याय [द्वितीय पुस्तक आवरण / Second Book Cover] (पृष्ठवंश / Spine): चौ.सं.प्र. ११८ सचित्र भैषज्य कल्पना विज्ञान डा. लाल बहादुर सिंह (मुखपृष्ठ / Front Cover): सचित्र भैषज्य कल्पना विज्ञान डा. लाल बहादुर सिंह [पादटिप्पणी / Footer] CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA
अन्य महत्वपूर्ण ग्रन्थ : रोग परिचय एवं चिकित्सा। (आयुर्वेद) डॉ. सत्य प्रकाश वर्मा (आयुर्वेद, यूनानी तिब्बी चिकित्सा परिषद, लखनऊ के पाठ्यक्रमानुसार फार्मासिस्ट द्वितीय वर्ष के छात्रों हेतु) (चौ.सं.भ. 201) अथर्ववेदीय कर्मज व्याधि भैषज्य विज्ञान । (आयुर्वेद) सम्पादक एवं संकलयिता- डॉ. सुधाकर मालवीय (चौ.सं.भ. 202) द्रव्यगुण संहिता (आयुर्वेद)। प्रस्तुत ग्रन्थ का सम्बन्ध त्रिसूत्र के औषध (उपाय) सूत्र से है जो चिकित्सा व्यवस्था की ओर ध्यान इंगित करता है। लेखक- डॉ. निष्ठेश्वर (चौ.सं.भ. 192) आयुर्वेदीय औषधियोग-प्रयोग विज्ञान (द्रव्यगुण शास्त्र)। (आयुर्वेद) मानव-कल्याण में रत वैद्यों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होने के साथ ही छात्रों को भी योग एवं प्रयोग के वैज्ञानिक पक्ष का विवेचनात्मक ज्ञान प्रदान किया गया है। लेखक- प्रो. (डॉ.) जे.के. ओझा (चौ.सं.भ. 189) संदिग्ध द्रव्यों का वैज्ञानिक अध्ययन। सचित्र (आयुर्वेद) पाषाण भेद केविशेष सन्दर्भ में । लेखक- डॉ. झारखण्डे ओझा (चौ.सं.भ. 186) आयुर्वेदीय औषधयोगप्रकाश (सचित्र)। (आयुर्वेद) सामान्यतः पाये जाने वाले सभी रोगों की चिकित्सा हेतु वनौषधियों से युक्त लेखक- डॉ. के. निष्ठेश्वर (चौ.सं.भ. 179) वृन्दमाधव अथवा सिद्धयोग । (आयुर्वेद) श्रीवृन्द प्रणीतं (आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का अद्वितीय ग्रन्थ) श्रीदयारामावस्थी विरचितं सरस्वती सग्विनाशिनी व्याख्या सहित। सम्पा.-महर्षि वैद्य दयाराम अवस्थी शास्त्री एवं भूमिका लेखक- अचार्य वैद्य ताराचन्द्र शर्मा (चौ.सं.भ. 156) आयुर्वेदीय षोडशांङ्ग चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद)। (केन्द्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद् के पाठ्यक्रमानुसार) बी. ए. एम. एस. पाठ्यक्रमानुसार। लेखक-आचार्य वैद्य ताराचन्द्र शर्मा। सम्पूर्ण 1-3 भाग (चौ.सं.भ. 143) प्रथम व्यावसायिक परीक्षा - 1. आयुर्वेद का इतिहास, 2. पदार्थ विज्ञान 3. रचना शारीर (शारीर रचना विज्ञान) एवं 4. क्रिया शारीर (शारीर क्रिया विज्ञान) सहित। प्रथम भाग द्वितीय व्यावसायिक परीक्षा - 1. द्रव्यगुण विज्ञान, 2. रसशास्त्र एवं भैषज्यकल्पना, 3. अगदतन्त्र व्यवहारायुर्वेद तथा विधि वैद्यक सहित। द्वितीय भाग तृतीय व्यावसायिक परीक्षा- 1. प्रसूतितन्त्र एवं स्त्रीरोग, 2. कौमारभृत्य, 3. रोग एवं विकृति विज्ञान, 4. स्वस्थवृत्त सहित। तृतीय भाग चतुर्थ व्यावसायिक परीक्षा- 1. काय चिकित्सा, 2. पंचकर्म विज्ञान, 3. शल्य तन्त्र, 4. शालाक्य तन्त्र सहित। चतुर्थ भाग मधुमेह (ओजोमह) एवं मधुमेह हर द्रव्य (आयुर्वेद)। प्राच्य एवं पाश्चात्य। लेखक- डा. जे. के. ओझा। (चौ.सं.भ. 132) अनुभूत योग (आयुर्वेद)। रसायन शास्त्री पं. श्याम सुन्दराचार्य वैश्य। (1-5 भाग एकजिल्द में) सम्पूर्ण (चौ.सं.भ. 133) प्रकाशक : चौखम्भा संस्कृत भवन संस्कृत, आयुर्वेद एवं इण्डोलोजिकल पुस्तकों के प्रकाशक एवं वितरक चौक, चित्रा सिनेमा के सामने (बैंक ऑफ बड़ौदा बिल्डिंग) वाराणसी - २२१००१ (भारत) फोन : +९१-५४२-२४२०४१४ E-mail : csb.brajendra@gmail.com ISBN : 81-86937-43-9 (Set) ISBN : 81-86937-44-7 (Vol. I) CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA