भावप्रकाश निघण्टु (हरिताक्यादि वर्ग - हिन्दी व्याख्या सहित)
Bhavaprakasha Nighantu with Hindi Commentary
भावमिश्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा भारती अकादमी · चौखम्बा भारती अकादमी (उद्गम)
पृष्ठ 111, कुल 143 में से
संदर्भ में पढ़ें२०४ भावप्रकाश निघण्टुः अथ गुग्गुलुः । तस्य नामान्याह गुग्गुलुर्देवधूपश्च जटायुः कौशिकः पुरः । कुम्भोदूखलकं क्लीवे महिषाक्षः पलङ्कषः ॥ ३२ ॥ गूगल के नाम-गुग्गुलु, देवधूप, जटायु, कौशिक, पुर, कुम्भोदूखलक (नपुंसकलिङ्ग), महिषाक्ष और पलङ्कष ये सब गूगल के संस्कृत नाम हैं ॥ ३२ ॥ गुग्गुलुभेदानाह महिषाक्षो महानीलः कुमुदः पद्म इत्यपि । हिरण्यः पञ्चमो ज्ञेयो गुग्गुलोः पञ्च जातयः ॥३३॥ गूगल के भेद-१ महिषाक्ष, २ महानील, ३ कुमुद, ४ पद्म, ५ हिरण्य इस प्रकार से गूगल के ५ पांच भेद जानना चाहिये ॥ ३३ ॥ तेषां लक्षणानि गुणांश्चाह भृङ्गाञ्जनसवर्णस्तु महिषाक्ष इति स्मृतः । महानीलस्तु विज्ञेयः स्वनामसमलक्षणः ॥ ३४ ॥ कुमुदः कुमुदाभः स्यात्पद्मो माणिक्यसन्निभः । हिरण्याख्यस्तु¹ हेमाभः पञ्चानां लिङ्गमोरितम् ॥ महिषाक्षो महानीलो गजेन्द्राणां हितावुभौ । हयानां कुमुदः पद्मः स्वस्त्यारोग्यकरौ परौ ॥ विशेषेण मनुष्याणां कनकः परिकीर्त्तितः । कदाचिन्महिषाक्षश्च मतः कैश्चिद्गुणामपि ॥ ३७ ॥ क्रम से उन्हीं ५ प्रकार के गूगलों के लक्षण एवं गुण-१ जो गूगल भौंरा या स्रोतोंजन के समान काले रङ्ग का होता है वह 'महिषाक्ष' कहलाता है । २ महानील नामक गूगल का लक्षण अपने नाम के अनुरूप ही है अर्थात् वह अत्यन्त नीलवर्ण का होता है । ३ कुमुद नामक गूगल-कुमुद (कुई) पुष्प के समान वर्ण वाला होता है । ४ पद्म नामक गूगल-माणिक के समान वर्ण वाला होता है । ५ हिरण्याख्य गूगल-सोने के समान वर्ण वाला होता है। इनमें से महिषाक्ष तथा महानील ये दोनों गूगल हाथियों के लिये हितकारी होते हैं । कुमुद तथा पद्म ये दोनों गूगल घोड़ों के लिये अत्यन्त कल्याणकारक तथा आरोग्यदायक होते हैं। कनक अर्थात् हिरण्यनामक गूगल तो विशेष करके मनुष्यों के लिये हितकर होता है । कोई-कोई ऐसा भी कहते हैं कि मनुष्य के लिये कहीं-कहीं महिषाक्ष गूगल भी हितकारी होता है ॥ ३४-३७ ॥ सामान्यतो गुग्गुलुगुणानाह गुग्गुलुर्विशदस्तिक्तो वीर्य्योष्णः पित्तलः सरः । कषायः कटुकः पाके कटु रूक्षो लघुः परः ॥ ३८ ॥ भग्नसन्धानकृद् वृष्यः सूक्ष्मः स्वर्यो रसायनः । दीपनः पिच्छिलो बल्यः कफवातव्रणापचीः ॥ ३९ ॥ मेदोमेहाश्मवातांश्च क्लेदकुष्ठाममारुतान् । पिडकाप्रन्थिशोफार्शोगण्डमालाकृमीञ्जयेत्॥४०॥ माधुर्य्याच्छमयेद्वातं कषायाच्चैव पित्तहा । तिक्तत्वाद् कफजित्तेन गुग्गुलुः सर्वदोषहा ॥४१॥ सामान्यरूप से गूगल के गुण- गूगल-विशद गुण युक्त, तिक्त-कषाय तथा कटरसयुक्त, उष्णवीर्य, पित्तजनक, सारक (दस्तावर), विपाक में कटरस युक्त, रूक्ष एवं अत्यन्त लघु होता है। यह टूटे हुये हड्डियों को जोड़ने वाला, वृष्य, सूक्ष्म (सूक्ष्मस्रोतोगामी), स्वर को उत्तम करने वाला, रसायन, अग्निदीपक, पिच्छिलगुणयुक्त तथा बलकारक होता है एवम्-कफ-वात, व्रण, अपची, मेदरोग, प्रमेह, पथरी, वातरोग, क्लेद, कुष्ठ, आमवात, पिड़का, ग्रन्थिरोग, शोथ, बवासीर, १. 'हिरण्याह्वस्तु' इति पाठ० । कर्पूरादिवर्गः २०५ गण्डमाला तथा कृमिरोग का नाशक होता है। गूगल-मधुर रस युक्त होने से वात को, कषाय रसयुक्त होने से पित्त को और तिक्त रस युक्त होने से कफ को नष्ट करने वाला होता है, अतः यह सम्पूर्ण दोषों का नाशक कहा हुआ है ॥ ३८-४१ ॥ नवीनस्य प्राचीनस्य च गुग्गुलोर्लक्षणं गुणांश्चाह स नवो बृंहणो वृष्यः पुराणस्त्वतिलेखनः ॥ ४२ ॥ स्निग्धः काञ्चनसंकाशः पक्वजम्बूफलोपमः । नूतनो गुग्गुलुः प्रोक्त सुगन्धिर्यस्तु पिच्छिलः ॥ ४३ ॥ शुष्को दुर्गन्धकश्चैव त्यक्तप्रकृतिवर्णकः । पुराणः स तु विज्ञेयो गुग्गुलुवर्यिवर्जितः ॥ ४४ ॥ नवीन और पुराने गूगल के गुण तथा लक्षण-नवीन गूगल-बृंहण (धातुवर्धक ) तथा वृष्य (वीर्यजनक ) होता है और पुराना गूगल-अतिलेखन (शरीर के धातु तथा मलों को सुखा कर खुरचने वाला ) होता है। नवीन गूगल वह कहलाता है जो स्निग्ध, सोने के समान वर्ण वाला, पके हुये जामुन के समान स्वरूप वाला, सुगन्ध युक्त तथा पिच्छिल गुण युक्त होता है। पुराना गूगल-वह कहलाता है कि जो शुष्क, दुर्गन्धयुक्त, स्वाभाविक वर्ण हीन तथा वीर्य्य रहित होता है ॥ ४२-४४ ॥ गुग्गुलुसेविनां त्याज्यान्याह अम्लं तीक्ष्णमजीर्णञ्च व्यवायं श्रममातपम् । मद्यं रोषं त्यजेत्सम्यग् गुणार्थी पुरसेवकः ॥४५॥ गूगल सेवन करने वालों के लिये अहितकर अत एव त्याज्य विषय- गूगल का सेवन करने वाला पुरुष यदि गूगल का भली भांति गुण प्राप्त करना चाहे तो वह अम्ल रस युक्त, तीक्ष्ण तथा अजीर्णकारक द्रव्य, मैथुन, परिश्रम, धूप में फिरना, शराब पीना तथा क्रोध करना छोड़ दे ॥ १५ गूगल हि०-गूगल, गुग्गुल । बं-गुग्गुल, मुकुल । म०-गुग्गुल । गु०-गुगल । क०-गुग्गुल । ते०-गुक्कुलु चेट्टु । ता०-मैशाक्षी, गुक्कल । सिंध-गुगरू । फ०-बूएजहूदोन । अ०-मुक्कु-अर्जक, अफलात(तु)न । अ०-Indian Bdellium (इण्डियन डेलिअम्) । लै०-Balsamodendron mukul Hook. ex Stocks (बाल्सेमोडेन्ड्रोन् मुकुल, हुक एक्स स्टॉक्स) । Fam. Burseraceae (बर्सेरेसी) । गूगल के वृक्ष-सिन्ध, राजपूताना, खानदेश, बरार, मैसूर, काठियावाड एवं बेलरी आदि स्थानों में अधिक पाये जाते हैं । इसका वृक्ष- छोटा, ४ से ८ फीट ऊँचा एवं झाड़ीदार होता है जिसकी मोटी फैली हुई शाखाओं के अग्र भाग कंटकित होते हैं। छाल-हरापन युक्त पीली होती है। इससे कागज के समान लम्बे, पतले, चमकीले परत निकलते रहते हैं। लकड़ी-सफेद और कोमल होती है। पत्ते-पत्रक १ से ३ तक, ऊपर से लट्वाकार, अग्र की तरफ दन्त मय धार वाले, चिकने, चमकीले तथा विशेष कर छोटी मोटी प्रशाखाओं के अन्त में रहते हैं। फूल-४-५ दल वाले, छोटे-छोटे तथा भूरापन लिये लाल रंग के आते हैं। फल-छोटे छोटे, मांसल, लंगोल तथा पकने पर लाल हो जाते हैं। उक्त वृक्ष की त्वचा में जाड़े के दिनों में घाव करने से एक प्रकार का तैलीय रालदार गोंद (Oleo gum-resin) निकलता है जिसे गूगल कहते हैं ।