भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

उपासना करनेवाला व्यक्ति मुक्तिको प्राप्त करता है। जो उत्तम लेप, सुन्दर पुष्प, अतिशय सुगन्धित धूप प्रतिदिन सूर्यनारायणको अर्पित करता है, वह यज्ञके फलको प्राप्त करता है। यज्ञमें बहुत सामग्रियोंकी अपेक्षा रहती है, इसलिये मनुष्य यज्ञ नहीं कर सकते, परंतु भक्तिपूर्वक दूवासे भी सूर्यनारायणकी पूजा करनेसे यज्ञ करनेसे भी अधिक फलकी प्राप्ति हो जाती है—

बहूपकरणा यज्ञा नानासम्भारविस्तराः ॥

न दिण्डिन्नवाप्यन्ते मनुष्यैरल्पसंचयैः ।

भक्त्या तु पुरुषैः पूजा कृता दूर्वाङ्कुरेरपि ।

भानोर्ददाति हि फलं सर्वयज्ञैः सुदुर्लभम् ॥

(ब्राह्मपर्व ६३।३२-३३)

दिण्डिन्! गन्ध, पुष्प, धूप, वस्त्र, आभूषण तथा विविध प्रकारके नैवेद्य जो भी प्राप्त हों और

तुम्हें जो प्रिय हों, उन्हें भक्तिपूर्वक सूर्यनारायणको निवेदित करो। तीर्थके जल, दही, दूध, घृत शर्करा और शहदसे उन्हें स्नान कराओ। गीत-वाद्य, नृत्य, स्तुति, ब्राह्मण-भोजन, हवन आदिसे भगवान्को प्रसन्न करो, किंतु सभी पूजाएँ भक्तिपूर्वक होनी चाहिये। मैंने भगवान् सूर्यकी आराधना करके ही सृष्टि की है। विष्णु उनके अनुग्रहसे ही जगत्का पालन करते हैं और रुद्रने उनकी प्रसन्नतासे ही संहारशक्ति प्राप्त की है। ऋषिगण भी उनके ही कृपाप्रसादको प्राप्तकर मन्त्रोंका साक्षात्कार करनेमें समर्थ होते हैं। इसलिये तुम भी पूजन, व्रत, उपवास आदिसे वर्षपर्यन्त भगवान् सूर्यकी आराधना करो, जिससे सभी क्लेश दूर हो जायेंगे और तुम शान्ति प्राप्त करोगे१।

(अध्याय ६१-६३)

भगवान् सूर्यके व्रतोंके अनुष्ठान तथा उनके मन्दिरोंमें अर्चन-पूजनकी विधि तथा फल-समयी-व्रतका फल

दिण्डीने ब्रह्माजीसे पूछा—ब्रह्मन्! आपने आदित्य-क्रियायोगको मुझे बतलाया, अब आप यह बतलानेकी कृपा करें कि भगवान् सूर्य उपवाससे कैसे प्रसन्न होते हैं? उपवास करनेवालोंके लिये क्या-क्या त्याज्य है? आराधनामें क्या-क्या करना चाहिये, इसका आप विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

ब्रह्माजी बोले—दिण्डिन्! भगवान् सूर्य पुष्प आदिद्वारा पूजन करनेसे ही प्रसन्न हो जाते हैं और उत्तम फल देते हैं। पापोंसे रहित होकर सदगुणोंका आश्रय ग्रहण कर, सभी भोगोंका परित्याग करना ही उपवास कहलाता है२। अतः ऐसे उपवाससे क्यों नहीं मनोवाञ्छित फल प्राप्त होगा? एक रात, दो रात, तीन रात या नक्त-व्रत करनेवाला

निष्काम होकर उपवासकर मन, वचन और कर्मसे सूर्यनारायणकी आराधनामें तत्पर रहे तो ब्रह्मलोकको प्राप्त कर सकता है। यदि साधक किसी कामनासे दत्तचित्त होकर भगवान् सूर्यकी उपासना करता है तो प्रसन्न होकर भगवान् उसकी कामना पूर्ण कर देते हैं। अन्धकारका नाश करनेवाले जगदात्मा सूर्यनारायणकी तन्मयतापूर्वक आराधनाके बिना किसी प्रकार भी सदगति नहीं मिलती। अतः पुष्प, धूप, चन्दन, नैवेद्य आदिसे भक्तिपूर्वक सूर्यकी पूजा और उनकी प्रसन्नताके लिये उपवास करना चाहिये। उत्तम पुष्पके न मिलनेपर वृक्षोंके कोमल पत्ते अथवा दूर्वाङ्कुसे पूजन करना चाहिये। पुष्प, पत्र, फल, जल जो भी यथाशक्ति मिले, उसे

१-क्रियायोगका वर्णन सभी पुराणोंमें मिलता है, विशेषरूपसे पद्मपुराणका क्रियायोगसार-खण्ड दृष्टव्य है। २-उपावृतस्य पापेभ्यो यस्तु वासो गुणैः सह। उपवासः स विज्ञेयः सर्वभोगविर्जितः ॥ (ब्राह्मपर्व ६४।४)

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