भविष्य पुराण

भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
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[ १० ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ३१८-वृषोत्सर्गकी महिमा | ५४० | $\quad$ कथा | ५९१ |
| ३१९-फाल्गुन-पूर्णिमोत्सव | ५४१ | ३५२-दासीदान-विधि | ५९२ |
| ३२०-दमनकोत्सव, दोलोत्सव तथा रथयात्रोत्सव आदिका वर्णन | ५४२ | ३५३-प्रपा (पौंसला) और अग्नीष्टिका (अँगीठी)-दानकी महिमा | ५९३ |
| ३२१-श्रावणपूर्णिमाको रक्षाबन्धनकी विधि | ५४६ | ३५४-विद्यादानकी महिमा | ५९४ |
| ३२२-महानवमी (विजयादशमी)-व्रत | ५४७ | ३५५-तुलापुरुषदानकी विधि | ५९५ |
| ३२३-इन्द्रध्वजोत्सवके प्रसंगमें उपरिचर वसुका वृत्तान्त | ५४९ | ३५६-हिरण्यगर्भ-दानकी विधि | ५९९ |
| ३२४-दीपमालिकोत्सव | ५५० | ३५७-ब्रह्माण्डदान-विधि | ६०१ |
| ३२५-शान्तिक एवं पौष्टिक कर्मों तथा नवग्रह-शान्तिकी विधिक वर्णन | ५५२ | ३५८-कल्पवृक्ष एवं कल्पलतादानकी विधि | ६०३ |
| ३२६-कोटिहोमका विधान | ५५८ | ३५९-गजरथ-अश्वरथदान-विधि | ६०५ |
| ३२७-महाशान्ति-विधान | ५६० | ३६०-कालपुरुषदान-विधि | ६०७ |
| ३२८-विनायक-शान्ति | ५६२ | ३६१-सप्तसागरदान-विधि | ६०८ |
| ३२९-नक्षत्राच्चर्न-विधि (रोगावलिचक्र) | ५६३ | ३६२-महाभूतघटदान-विधि | ६०९ |
| ३३०-अपराधशतशमन-व्रत | ५६४ | ३६३-शय्यादान एवं मृतशय्यादान-विधि | ६०९ |
| ३३१-काञ्चनपुरीव्रत-विधि | ५६५ | ३६४-आत्मप्रतिकृतिदान-विधि | ६१० |
| ३३२-कन्यादान एवं ब्राह्मणोंकी परिचर्याका माहात्म्य | ५६७ | ३६५-हिरण्याश्वदान-विधि | ६११ |
| ३३३-दानकी महिमा और प्रत्यक्ष धेनु-दानकी विधि | ५६८ | ३६६-हिरण्याश्वरथ-दानकी विधि | ६१२ |
| ३३४-तिलधेनु-दानकी विधि | ५७० | ३६७-कृष्णाजिन (मृगछाला)-दान-विधि | ६१३ |
| ३३५-जलधेनु-दानके प्रसंगमें महर्षि मुद्गलका आख्यान | ५७१ | ३६८-हेमहस्तिरथ-दानकी विधि | ६१३ |
| ३३६-घृतधेनुदान-विधि | ५७३ | ३६९-विश्वरथदान-विधि | ६१४ |
| ३३७-लवणधेनुदान-विधि | ५७४ | ३७०-भुवनप्रतिष्ठाका माहात्म्य, धर्मात्मा रजिकी कथा | ६१६ |
| ३३८-सुवर्णधेनुदान-विधि | ५७५ | ३७१-नक्षत्रदान (नक्षत्रोंमें दानके पदार्थ) | ६१८ |
| ३३९-रत्नधेनुदान-विधि | ५७५ | ३७२-तिथिदान (तिथियोंमें दानके पदार्थ) | ६१९ |
| ३४०-उभयमुखी धेनु-दानका माहात्म्य | ५७६ | ३७३-वराहदानका विधान | ६२२ |
| ३४१-गोसहस्रदान-विधि | ५७७ | ३७४-दशविध पर्वतदानोंमें धान्यशैलदानकी विधि और महिमा | ६२२ |
| ३४२-वृषभदानकी महिमा | ५७८ | ३७५-लवणाचलदान-विधि तथा गुड़पर्वतकी महिमाके प्रसंगमें सुलभाका आख्यान | ६२५ |
| ३४३-कपिलादानकी महिमा | ५७९ | ३७६-सुवर्ण एवं तिलशैलदान-विधि, तिलोंकी महिमा | ६२७ |
| ३४४-महिषी एवं मेषी-दानकी विधि | ५८१ | ३७७-कपास एवं घृतपर्वतोंके दानकी महिमा | ६२८ |
| ३४५-भूमिदानकी महिमा | ५८२ | ३७८-रत्नाचल और रौप्याचलदानका माहात्म्य | ६२९ |
| ३४६-सुवर्णरचित भूदानकी विधि | ५८३ | ३७९-शर्कराचल और लवणाचलदानकी महिमा | ६३० |
| ३४७-हलपंक्तिदान-विधि | ५८४ | ३८०-सदाचारधर्मका निरूपण | ६३२ |
| ३४८-आपाकदानके प्रसंगमें राजा हव्यवाहनकी कथा | ५८५ | ३८१-रोहिणीचन्द्रशयन-व्रत | ६३८ |
| ३४९-गृहदान-विधि | ५८७ | ३८२-श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवादका उपसंहार और भगवान्का द्वारकागमन | ६३९ |
| ३५०-अन्नदानकी महिमाके प्रसंगमें राजा श्वेत और एक वैश्यकी कथा | ५८८ | ३८३-भविष्योत्तरपर्वकी संक्षिप्त अनुक्रमणिका | ६४० |
| ३५१-स्थालीदानकी महिमामें द्रौपदीके पूर्वजन्मकी |