भविष्य पुराण

भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| २५१-कल्याणसप्तमी-व्रतकी विधि | ४३५ | २८६-धर्मराजका समाराधन-व्रत | ४८७ |
| २५२-शर्करासप्तमी-व्रतकी विधि | ४३६ | २८७-अनङ्ग-त्रयोदशी-व्रत | ४८८ |
| २५३-कमलसप्तमी-व्रत | ४३७ | २८८-पाली-व्रत एवं रम्भा (कदली)-व्रत | ४८९ |
| २५४-शुभसप्तमी-व्रतकी विधि | ४३७ | २८९-आग्नेयी शिवचतुर्दशी-व्रतके प्रसंगमें महर्षि अङ्गिराका आख्यान | ४९० |
| २५५-सप्तमी-स्नपनव्रत और उसकी विधि | ४३८ | २९०-अनन्तचतुर्दशी-व्रत-विधान | ४९२ |
| २५६-अचलासप्तमी-व्रत-कथा तथा व्रत-विधि | ४४० | २९१-श्रवणिकाव्रत-कथा एवं व्रत-विधि | ४९४ |
| २५७-बुधाष्टमीव्रत-कथा तथा माहात्म्य | ४४२ | २९२-नक्त एवं शिवचतुर्दशी-व्रतकी विधि | ४९६ |
| २५८-श्रीकृष्ण-जन्माष्टमीव्रतकी कथा एवं विधि | ४४४ | २९३-सर्वफलत्याग-चतुर्दशीव्रत | ४९७ |
| २५९-दूर्वाकी उत्पत्ति एवं दूर्वाष्टमीव्रतका विधान | ४४७ | २९४-पौर्णमासी-व्रत-विधान एवं अमावास्यामें श्राद्ध-तर्पणकी महिमा | ४९८ |
| २६०-मासिक कृष्णाष्टमी-व्रतोंकी विधि | ४४७ | २९५-वैशाखी, कार्तिकी और माघी पूर्णिमाकी विधि | ४९९ |
| २६१-अनघाष्टमी-व्रतकी कथा एवं विधि | ४४९ | २९६-युगादि तिथियोंकी विधि | ५०० |
| २६२-सोमाष्टमी-व्रत-विधान | ४५१ | २९७-सावित्री-व्रतकथा एवं व्रत-विधि | ५०० |
| २६३-श्रीवृक्षनवमी-व्रत-कथा | ४५१ | २९८-महाकार्तिकी-व्रतके प्रसंगमें रानी कलिंगभद्रका आख्यान | ५०३ |
| २६४-ध्वजनवमी-व्रत-कथा | ४५२ | २९९-मनोरथपूर्णिमा तथा अशोकपूर्णिमाव्रत-विधि | ५०४ |
| २६५-उल्का-नवमी-व्रतका विधान और फल | ४५३ | ३००-अनन्तव्रत-माहात्म्यमें कार्तवीर्यके आविर्भावका वृत्तान्त | ५०६ |
| २६६-दशावतारव्रत-कथा, विधान और फल | ४५४ | ३०१-मास-नक्षत्र-व्रतके माहात्म्यमें साम्भ्रायणीकी कथा | ५०७ |
| २६७-आशादशमी-व्रत-कथा एवं व्रत-विधान | ४५५ | ३०२-वैष्णव एवं शैव नक्षत्रपुरुष-व्रतोंका विधान | ५०९ |
| २६८-तारकद्वादशीके प्रसंगमें राजा कुशध्वजकी कथा तथा व्रत-विधान | ४५७ | ३०३-भग्नव्रतकी प्रायश्चित्त-विधि तथा पण्यस्त्री-व्रत | ५११ |
| २६९-अरण्यद्वादशी-व्रतका विधान और फल | ४५८ | ३०४-वृन्ताक-त्याग एवं ग्रह-नक्षत्रव्रतकी विधि | ५१२ |
| २७०-रोहिणीचन्द्र-व्रत तथा अवियोग-व्रतका विधान | ४५८ | ३०५-शनैश्चर-व्रतके प्रसंगमें महामुनि पिप्पलादका आख्यान | ५१३ |
| २७१-गोवत्सद्वादशीका विधान, गौओंका माहात्म्य, मुनियों और राजा उत्तानपादकी कथा | ४५९ | ३०६-आदित्यवार नक्त-व्रत तथा संक्रान्ति-व्रतके उद्यापनकी विधि | ५१५ |
| २७२-देवशयनी एवं देवोत्थानी द्वादशी-व्रतोंका विधान | ४६३ | ३०७-भद्राका चरित्र एवं उसके व्रतकी विधि | ५१६ |
| २७३-नीराजनद्वादशी-व्रत-कथा एवं व्रत-विधान | ४६६ | ३०८-महर्षि अगस्त्यकी कथा और उनके अर्घ्य-दानकी विधि | ५१८ |
| २७४-भीष्मपञ्चक-व्रतकी विधि एवं महिमा | ४६७ | ३०९-नवोदित चन्द्र, गुरु एवं शुक्रको अर्घ्य देनेकी विधि | ५२१ |
| २७५-मल्लद्वादशी एवं भीमद्वादशी-व्रतका विधान | ४६८ | ३१०-प्रकीर्ण-व्रत | ५२२ |
| २७६-श्रवणद्वादशी-व्रतके प्रसंगमें एक वणिक्की कथा | ४७० | ३११-माघ-स्नान-विधि | ५२८ |
| २७७-विजय-श्रवण-द्वादशीव्रतमें वामनावतारकी कथा तथा व्रत-विधि | ४७२ | ३१२-स्नान और तर्पण-विधि | ५३० |
| २७८-सम्प्राप्ति-द्वादशी एवं गोविन्द-द्वादशीव्रत | ४७४ | ३१३-रुद्र-स्नानकी विधि | ५३२ |
| २७९-अखण्ड-द्वादशी, मनोरथ-द्वादशी एवं तिल-द्वादशी-व्रतोंका विधान | ४७४ | ३१४-ग्रहण-स्नानका माहात्म्य और विधान | ५३३ |
| २८०-सुकृत-द्वादशीके प्रसंगमें सौरभद्र वैश्यकी कथा | ४७६ | ३१५-मरणासन्न (मृत्युके पूर्व) प्राणीके कर्तव्य तथा ध्यानके चतुर्विध भेद | ५३४ |
| २८१-धरणी-व्रत (अर्चावतार-व्रत) | ४७७ | ३१६-इष्टापूर्तकी महिमा | ५३६ |
| २८२-विशोकद्वादशी-व्रत और गुडधेनु आदि दस धेनुओंके दानकी विधि तथा उसकी महिमा | ४७९ | ३१७-दीपदानकी महिमाके प्रसंगमें जातिस्मरा रानी ललिताका आख्यान | ५३८ |
| २८३-विभूतिद्वादशी-व्रतमें राजा पुष्पवाहनकी कथा | ४८१ | ||
| २८४-मदनद्वादशी-व्रतमें मरुद्गणोंका आख्यान | ४८४ | ||
| २८५-अबाधक-व्रत एवं दौर्भाग्य-दौर्गन्ध्यनाशक-व्रतका माहात्म्य | ४८६ |