भविष्य पुराण

भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १९७-वैद्यराज धन्वन्तरि, सुश्रुत और भक्त कवि जयदेवजीका चरित्र | ३५० | युधिष्ठिरकी प्रार्थना | ३८३ |
| १९८-चैतन्य महाप्रभु, वाल्मीकि और शंकराचार्यके आविर्भावकी कथा | ३५२ | २१४-भुवनकोशका संक्षिप्त वर्णन | ३८४ |
| १९९-गिरिशर्मा, वनशर्मा तथा पुरीशर्माके आविर्भावका आख्यान | ३५५ | २१५-नारदजीको विष्णु-मायाका दर्शन | ३८६ |
| २००-भारती, नाथशर्मा, क्षेत्रशर्मा तथा ढुंढिराजकी उत्पत्ति-कथा | ३५६ | २१६-संसारके दोषोंका वर्णन | ३८८ |
| २०१-अघोरपंथी भैरव तथा बालशर्माकी उत्पत्तिकी कथामें रावण तथा हनुमान्जीका चरित्र | ३६० | २१७-विविध प्रकारके पापों एवं पुण्य-कर्मोंका फल | ३९२ |
| २०२-रुद्रमाहात्म्य, भवके अंशसे रामानुजाचार्यका आविर्भाव | ३६१ | २१८-व्रतोपवासकी महिमामें शकटव्रतकी कथा | ३९६ |
| २०३-वसुदेवताओंके अंशसे कुबेर आदिकी उत्पत्ति, रामायणकी संक्षिप्त कथा एवं त्रिलोचन भक्तका वृत्तान्त | ३६२ | २१९-तिलकव्रतके माहात्म्यमें चित्रलेखाका चरित्र | ३९७ |
| २०४-रामानन्दजीके शिष्य नामदेव, भक्त रंकण (राँका) एवं बंकणा (बाँका)-का चरित्र, वरुणदेव और पराम्बाकी महिमा | ३६४ | २२०-अशोकव्रत तथा करवीरव्रतका माहात्म्य | ३९८ |
| २०५-संत कबीर, भक्त नरसी मेहता, पीपा, नानक तथा साधु नित्यानन्दजीके पूर्वजन्मोंकी कथा | ३६५ | २२१-कोकिलाब्रतका विधान और माहात्म्य | ३९९ |
| २०६-अश्विनीकुमारोंके अंशसे सधन (सदन कसाई) और रैदासकी उत्पत्ति-कथा | ३६७ | २२२-बृहत्तपोव्रतका विधान और फल | ३९९ |
| २०७-यज्ञांश चैतन्यमहाप्रभुका चरित्र एवं अन्य आचार्योंका भी उनके भक्ति-भावसे प्रभावित होना | ३६८ | २२३-जातिस्मर-भद्रव्रतका फल और विधान तथा स्वर्णष्ठीवीकी कथा | ४०१ |
| २०८-भक्तोंसहित चैतन्यमहाप्रभुकी जगन्नाथपुरी-यात्रा एवं साक्षात् भगवान्से वार्तालाप | ३७० | २२४-यमद्वितीया तथा अशून्यशयन-व्रतकी विधि | ४०४ |
| २०९-मुनिश्रेष्ठ कण्वके उपाध्याय, दीक्षित तथा पाठक आदि दस पुत्रोंकी उत्पत्ति, चैतन्य महाप्रभु आदि आचार्योंद्वारा शुद्धिपूवर्क वैष्णवधर्मका विस्तार | ३७१ | २२५-मधुकतृतीया एवं मेघपाली तृतीयाव्रत | ४०५ |
| २१०-अकबर आदि अन्तिम मुगल शासकोंका चरित्र, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, तानसेन तथा बीरबल आदिके पूर्वजन्मोंका वृत्तान्त, गुरुण्ड, मौन और सर्वत्र म्लेच्छराज्यका विस्तार | ३७४ | २२६-पञ्चाग्निसाधन नामक रम्भा-तृतीया तथा गोष्पद-तृतीयाव्रत | ४०६ |
| २११-कलिके द्वितीय, तृतीय तथा चतुर्थ चरणोंका वृत्तान्त तथा कल्कि भगवान्का अवतार | ३७९ | २२७-हरकालीव्रत-कथा | ४०८ |
| २१२-भगवान् कल्किकी विजय, सत्ययुगकी उत्पत्तिकथा, अक्षयनावमीमें आँवलेके पूजनका माहात्म्य, अयोध्यामें महाराज वैवस्वतका प्रतिष्ठित होना तथा प्रतिसर्गपर्वका उपसंहार | ३८१ | २२८-ललितातृतीया-व्रतकी विधि | ४०९ |
| उत्तरपर्व | २२९-अवियोगतृतीया-व्रत | ४१० | |
| २१३-महाराज युधिष्ठिरके पास व्यासादि महर्षियोंका आगमन एवं उनसे उपदेश करनेके लिये | २३०-उमा-महेश्वर-व्रतकी विधि | ४११ | |
| २३१-रम्भातृतीया-व्रतका माहात्म्य | ४१२ | ||
| २३२-सौभाग्यशयन-व्रतकी विधि | ४१४ | ||
| २३३-अनन्त-तृतीया तथा रसकल्याणिनी तृतीया-व्रत | ४१५ | ||
| २३४-आर्द्रानन्दकरी तृतीयाव्रत | ४१८ | ||
| २३५-चैत्र, भाद्रपद और माघ शुक्ल तृतीया-व्रतका विधान और फल | ४१९ | ||
| २३६-आनन्तर्य-तृतीयाव्रत | ४२० | ||
| २३७-अक्षय-तृतीयाव्रतके प्रसंगमें धर्म वणिक्का चरित्र | ४२३ | ||
| २३८-शान्तिव्रत | ४२४ | ||
| २३९-सरस्वतीव्रतका विधान और फल | ४२४ | ||
| २४०-श्रीपञ्चमीव्रत-कथा | ४२५ | ||
| २४१-विशोक-षष्ठी-व्रत | ४२७ | ||
| २४२-कमलषष्ठी (फलषष्ठी)-व्रत | ४२८ | ||
| २४३-मन्दारषष्ठी-व्रत | ४२८ | ||
| २४४-ललिताषष्ठी-व्रतकी विधि | ४२९ | ||
| २४५-कुमारषष्ठी-व्रतकी कथा | ४३० | ||
| २४६-विजया-सप्तमीव्रत | ४३१ | ||
| २४७-आदित्य-मण्डलदान-विधि | ४३२ | ||
| २४८-वर्ज्यसप्तमीव्रत | ४३२ | ||
| २४९-कुक्कुट-मर्कटी-व्रतकथा (मुक्ताभरण सप्तमीव्रत-कथा) | ४३२ | ||
| २५०-उभय-सप्तमीव्रत | ४३४ |