भविष्य पुराण

भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १४४-काल-विभाग, तिथि-निर्णय एवं वर्षभरके विशेष पर्वों तथा तिथियोंके पुण्यप्रद कृत्य ........ | २५६ | १७०-साधनामें मनोयोगकी महत्ता .......................... | ३०४ |
| १४५-गोत्र-प्रवर आदिके ज्ञानकी आवश्यकता ......... | २५९ | १७१-संतानमें समान-भाव रखें ............................ | ३०५ |
| १४६-वास्तु-मण्डलके निर्माण एवं वास्तु-पूजनकी संक्षिप्त विधि ........................................ | २५९ | १७२-पढ़ो कम, समझो ज्यादा ............................ | ३०७ |
| १४७-कुशकण्डिका-विधान तथा अग्नि-जिह्वाओंके नाम ....... | २६२ | १७३-सत्यनारायणव्रत-कथा ............................... | ३०९ |
| १४८-अधिवासनकर्म एवं यज्ञकर्ममें उपयोज्य उत्तम ब्राह्मण तथा धर्मदेवताका स्वरूप ................. | २६४ | १७४-सत्यनारायणव्रत-कथामें शतानन्द ब्राह्मणकी कथा ....... | ३१२ |
| १४९-प्रतिष्ठा-मुहूर्त एवं जलाशय आदिकी प्रतिष्ठा-विधि .................................................. | २६५ | १७५-सत्यनारायणव्रत-कथामें राजा चन्द्रचूड़का आख्यान ................................................ | ३१५ |
| मध्यमपर्व ( तृतीय भाग ) | १७६-सत्यनारायण-व्रतके प्रसंगमें लकड़हारोंकी कथा ......... | ३१६ | |
| १५०-उद्यान-प्रतिष्ठा-विधि .................................... | २६८ | १७७-सत्यनारायण-व्रतके प्रसंगमें साधु वणिक् एवं जामाताकी कथा ..................................... | ३१७ |
| १५१-गोचर-भूमिके उत्सर्ग तथा लघु उद्यानोंकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................ | २७० | १७८-सत्यधर्मके आश्रयसे सबका उद्धार ................... | ३१९ |
| १५२-अश्वत्थ, पुष्करिणी तथा जलाशयके प्रतिष्ठाकी विधि .................................................. | २७२ | १७९-पितृशर्मा और उनके वंशज—व्याडि, पाणिनि और वररुचि आदिकी कथा .......................... | ३२३ |
| १५३-वट, बिल्व तथा पूगीफल आदि वृक्ष-युक्त उद्यानकी प्रतिष्ठा-विधि ............................. | २७३ | १८०-महर्षि पाणिनिका इतिवृत्त ............................ | ३२४ |
| १५४-मण्डप, महायूप और पौंसले आदिकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................ | २७४ | १८१-बोपदेवके चरित्र-प्रसंगमें श्रीमद्भागवत-माहात्म्य ......... | ३२५ |
| १५५-पुष्पवाटिका तथा तुलसीकी प्रतिष्ठा-विधि ........ | २७५ | १८२-श्रीदुर्गासप्तशतीके आदिचरित्रका माहात्म्य ......... | ३२६ |
| १५६-एकाह-प्रतिष्ठा तथा काली आदि देवियोंकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................ | २७६ | १८३-श्रीदुर्गासप्तशतीके मध्यमचरित्रका माहात्म्य ........ | ३२७ |
| १५७-दिव्य, भौम एवं अन्तरिक्षजन्य उत्पात तथा उनकी शान्तिके उपाय ........................................ | २७७ | १८४-श्रीदुर्गासप्तशतीके उत्तरचरित्रकी महिमाके प्रसंगमें योगाचार्य महर्षि पतञ्जलिका चरित्र ................ | ३२८ |
| प्रतिसर्गपर्व ( प्रथम खण्ड ) | प्रतिसर्गपर्व ( तृतीय खण्ड ) | ||
| १५८-सत्ययुगके राजवंशका वर्णन ........................ | २८१ | १८५-आल्हा खण्ड (आल्हा-ऊदलकी कथा)-का उपक्रम ................................................ | ३२९ |
| १५९-त्रेतायुगके सूर्य एवं चन्द्र-राजवंशोंका वर्णन ...... | २८४ | १८६-राजा शालिवाहन तथा ईशामसीहकी कथा ........ | ३३० |
| १६०-द्वापरयुगके चन्द्रवंशीय राजाओंका वृत्तान्त ......... | २८६ | १८७-राजा भोज और महामदकी कथा ................... | ३३२ |
| १६१-म्लेच्छवंशीय राजाओंका वर्णन तथा म्लेच्छ-भाषा आदिका संक्षिप्त परिचय ........................... | २८८ | १८८-देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओंका आविर्भाव ...... | ३३२ |
| १६२-काश्यपके उपाध्याय, दीक्षित आदि दस पुत्रोंका नामोल्लेख, मगधके राजवंश और बौद्ध राजाओंका तथा चौहान और परमार आदि राजवंशोंका वर्णन ....... | २९२ | प्रतिसर्गपर्व ( चतुर्थ खण्ड ) | |
| १६३-महाराज विक्रमादित्यके चरित्रका उपक्रम ......... | २९४ | १८९-कलियुगमें उत्पन्न आन्ध्रवंशीय राजाओंके वंश-वृक्षका वर्णन ......................................... | ३३४ |
| प्रतिसर्गपर्व ( द्वितीय खण्ड ) | १९०-राजपूताना तथा दिल्लीनगरके राजवंशका इतिहास ..... | ३३६ | |
| १६४-स्वामी एवं सेवककी परस्पर भक्तिका आदर्श .... | २९६ | १९१-ब्राह्मणोंकी उत्पत्तिके प्रसंगमें शुक्लवंश एवं उसके आगे होनेवाले विभिन्न क्षत्रियवंशोंका वर्णन ........ | ३३७ |
| १६५-ब्राह्मण-पुत्री महादेवीकी कथा ........................ | २९७ | १९२-परिहारवंश और बंगालके शूरवंश आदिका वर्णन ....... | ३३९ |
| १६६-समान-वर्णमें विवाह-सम्बन्धका औचित्य ....... | २९९ | १९३-भगवान्से चारों वर्णोंकी उत्पत्ति, चारों युगोंमें भगवान्के अवतारों एवं चारों युगोंके मनुष्योंकी आयुका निरूपण ................................... | ३४१ |
| १६७-विषयी राजा राज्यके विनाशका कारण बनता है • | ३०० | १९४-दिल्ली नगरपर पठानोंका शासन और तैमूरलंगका उत्पात .................................................. | ३४२ |
| १६८-किये गये कर्मोंका फल अवश्य भोगना पड़ता है ......... | ३०२ | १९५-भगवान् सूर्यके तेजसे आचार्य ईश्वरपुरी, आचार्य रामानन्द और निम्बार्काचार्यका आविर्भाव ......... | ३४३ |
| १६९-जीवन-दानका आदर्श .................................. | ३०३ | १९६-आचार्य मध्व, श्रीधरस्वामी, विष्णुस्वामी, वाणीभूषण, भट्टोजिदीक्षित तथा वराहमिहिर आदिके आविर्भावकी कथा .................................... | ३४६ |