भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 654 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 10

[ ७ ]

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
१४४-काल-विभाग, तिथि-निर्णय एवं वर्षभरके विशेष पर्वों तथा तिथियोंके पुण्यप्रद कृत्य ........२५६१७०-साधनामें मनोयोगकी महत्ता ..........................३०४
१४५-गोत्र-प्रवर आदिके ज्ञानकी आवश्यकता .........२५९१७१-संतानमें समान-भाव रखें ............................३०५
१४६-वास्तु-मण्डलके निर्माण एवं वास्तु-पूजनकी संक्षिप्त विधि ........................................२५९१७२-पढ़ो कम, समझो ज्यादा ............................३०७
१४७-कुशकण्डिका-विधान तथा अग्नि-जिह्वाओंके नाम .......२६२१७३-सत्यनारायणव्रत-कथा ...............................३०९
१४८-अधिवासनकर्म एवं यज्ञकर्ममें उपयोज्य उत्तम ब्राह्मण तथा धर्मदेवताका स्वरूप .................२६४१७४-सत्यनारायणव्रत-कथामें शतानन्द ब्राह्मणकी कथा .......३१२
१४९-प्रतिष्ठा-मुहूर्त एवं जलाशय आदिकी प्रतिष्ठा-विधि ..................................................२६५१७५-सत्यनारायणव्रत-कथामें राजा चन्द्रचूड़का आख्यान ................................................३१५
मध्यमपर्व ( तृतीय भाग )१७६-सत्यनारायण-व्रतके प्रसंगमें लकड़हारोंकी कथा .........३१६
१५०-उद्यान-प्रतिष्ठा-विधि ....................................२६८१७७-सत्यनारायण-व्रतके प्रसंगमें साधु वणिक् एवं जामाताकी कथा .....................................३१७
१५१-गोचर-भूमिके उत्सर्ग तथा लघु उद्यानोंकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................२७०१७८-सत्यधर्मके आश्रयसे सबका उद्धार ...................३१९
१५२-अश्वत्थ, पुष्करिणी तथा जलाशयके प्रतिष्ठाकी विधि ..................................................२७२१७९-पितृशर्मा और उनके वंशज—व्याडि, पाणिनि और वररुचि आदिकी कथा ..........................३२३
१५३-वट, बिल्व तथा पूगीफल आदि वृक्ष-युक्त उद्यानकी प्रतिष्ठा-विधि .............................२७३१८०-महर्षि पाणिनिका इतिवृत्त ............................३२४
१५४-मण्डप, महायूप और पौंसले आदिकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................२७४१८१-बोपदेवके चरित्र-प्रसंगमें श्रीमद्भागवत-माहात्म्य .........३२५
१५५-पुष्पवाटिका तथा तुलसीकी प्रतिष्ठा-विधि ........२७५१८२-श्रीदुर्गासप्तशतीके आदिचरित्रका माहात्म्य .........३२६
१५६-एकाह-प्रतिष्ठा तथा काली आदि देवियोंकी प्रतिष्ठा-विधि ........................................२७६१८३-श्रीदुर्गासप्तशतीके मध्यमचरित्रका माहात्म्य ........३२७
१५७-दिव्य, भौम एवं अन्तरिक्षजन्य उत्पात तथा उनकी शान्तिके उपाय ........................................२७७१८४-श्रीदुर्गासप्तशतीके उत्तरचरित्रकी महिमाके प्रसंगमें योगाचार्य महर्षि पतञ्जलिका चरित्र ................३२८
प्रतिसर्गपर्व ( प्रथम खण्ड )प्रतिसर्गपर्व ( तृतीय खण्ड )
१५८-सत्ययुगके राजवंशका वर्णन ........................२८११८५-आल्हा खण्ड (आल्हा-ऊदलकी कथा)-का उपक्रम ................................................३२९
१५९-त्रेतायुगके सूर्य एवं चन्द्र-राजवंशोंका वर्णन ......२८४१८६-राजा शालिवाहन तथा ईशामसीहकी कथा ........३३०
१६०-द्वापरयुगके चन्द्रवंशीय राजाओंका वृत्तान्त .........२८६१८७-राजा भोज और महामदकी कथा ...................३३२
१६१-म्लेच्छवंशीय राजाओंका वर्णन तथा म्लेच्छ-भाषा आदिका संक्षिप्त परिचय ...........................२८८१८८-देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओंका आविर्भाव ......३३२
१६२-काश्यपके उपाध्याय, दीक्षित आदि दस पुत्रोंका नामोल्लेख, मगधके राजवंश और बौद्ध राजाओंका तथा चौहान और परमार आदि राजवंशोंका वर्णन .......२९२प्रतिसर्गपर्व ( चतुर्थ खण्ड )
१६३-महाराज विक्रमादित्यके चरित्रका उपक्रम .........२९४१८९-कलियुगमें उत्पन्न आन्ध्रवंशीय राजाओंके वंश-वृक्षका वर्णन .........................................३३४
प्रतिसर्गपर्व ( द्वितीय खण्ड )१९०-राजपूताना तथा दिल्लीनगरके राजवंशका इतिहास .....३३६
१६४-स्वामी एवं सेवककी परस्पर भक्तिका आदर्श ....२९६१९१-ब्राह्मणोंकी उत्पत्तिके प्रसंगमें शुक्लवंश एवं उसके आगे होनेवाले विभिन्न क्षत्रियवंशोंका वर्णन ........३३७
१६५-ब्राह्मण-पुत्री महादेवीकी कथा ........................२९७१९२-परिहारवंश और बंगालके शूरवंश आदिका वर्णन .......३३९
१६६-समान-वर्णमें विवाह-सम्बन्धका औचित्य .......२९९१९३-भगवान्से चारों वर्णोंकी उत्पत्ति, चारों युगोंमें भगवान्के अवतारों एवं चारों युगोंके मनुष्योंकी आयुका निरूपण ...................................३४१
१६७-विषयी राजा राज्यके विनाशका कारण बनता है •३००१९४-दिल्ली नगरपर पठानोंका शासन और तैमूरलंगका उत्पात ..................................................३४२
१६८-किये गये कर्मोंका फल अवश्य भोगना पड़ता है .........३०२१९५-भगवान् सूर्यके तेजसे आचार्य ईश्वरपुरी, आचार्य रामानन्द और निम्बार्काचार्यका आविर्भाव .........३४३
१६९-जीवन-दानका आदर्श ..................................३०३१९६-आचार्य मध्व, श्रीधरस्वामी, विष्णुस्वामी, वाणीभूषण, भट्टोजिदीक्षित तथा वराहमिहिर आदिके आविर्भावकी कथा ....................................३४६