भविष्य पुराण

भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
पृष्ठ 9, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 9
[ ६ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ८५-सूर्य-प्रतिष्ठाका मुहूर्त और मण्डप बनानेका विधान ........ | १६१ | ११८-पातक, उपपातक, यममार्ग एवं यमयातनाका वर्णन ............................................................... | २१६ |
| ८६-साम्बोपाख्यानके प्रसंगमें सूर्यकी अभिषेक-विधि ............ | १६२ | ११९-सप्तमी-व्रतमें दन्तधावन-विधि-वर्णन................. | २१७ |
| ८७-भगवान् सूर्यकी प्रतिमाके अधिवासन और प्रतिष्ठाका विधान तथा फल ................................... | १६३ | १२०-स्वप्न-फल-वर्णन तथा उदक-सप्तमी-व्रत ......... | २१८ |
| ८८-ध्वजारोपणका विधान और फल ................................ | १६५ | १२१-सूर्यनारायणकी महिमा, अर्घ्य प्रदान करनेका फल तथा आदित्य-पूजनकी विधियाँ ................. | २१९ |
| ८९-साम्बोपाख्यानमें मगोंका वर्णन ................................... | १६६ | १२२-भगवान् भास्करके व्योम-पूजनकी विधि तथा आदित्य-माहात्म्य ............................................ | २२३ |
| ९०-अव्यङ्गका लक्षण और उसका माहात्म्य ..................... | १६७ | १२३-सप्त-सप्तमी तथा द्वादश मास-सप्तमी-व्रतोंका वर्णन .............................................................. | २२५ |
| ९१-साम्बोपाख्यानमें भगवान् सूर्यको अर्घ्य प्रदान करने और धूप दिखानेकी महिमा........................... | १६८ | १२४-अर्कसम्पुटिका-सप्तमीव्रत-विधि, सप्तमी-व्रत-माहात्म्यमें कौथुमिका आख्यान ..................... | २२६ |
| ९२-सूर्यमण्डलस्थ पुरुषका वर्णन ..................................... | १६९ | १२५-मरिच-सप्तमी-व्रत-वर्णन ................................... | २२८ |
| ९३-भगवान् व्यासद्वारा योग-ज्ञानका वर्णन ....................... | १६९ | १२६-निम्ब-सप्तमी तथा फलसप्तमी-व्रतका वर्णन ..... | २२८ |
| ९४-उत्तम एवं अधम भोजकोंके लक्षण ............................ | १७१ | १२७-ब्राह्मपर्व-श्रवणका माहात्म्य, पुराण-श्रवणकी विधि, पुराणों तथा पुराणवाचक व्यासकी महिमा .......... | २३० |
| ९५-भगवान् सूर्यके कालात्मक चक्रका वर्णन ................... | १७२ | मध्यमपर्व ( प्रथम भाग ) | |
| ९६-सूर्यचक्रका निर्माण और सूर्य-दीक्षाकी विधि ....... | १७३ | १२८-गृहस्थाश्रम एवं धर्मकी महिमा ............................. | २३३ |
| ९७-भगवान् आदित्यकी सप्तावरण-पूजन-विधि ....... | १७४ | १२९-सृष्टि तथा सात ऊर्ध्व एवं सात पाताल लोकोंका वर्णन ............................................................... | २३४ |
| ९८-सौरधर्मका वर्णन .................................................... | १७५ | १३०-भूगोल एवं ज्योतिश्चक्रका वर्णन ........................... | २३६ |
| ९९-ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान् सूर्यकी स्तुति एवं वर-प्राप्ति ........................................................... | १७६ | १३१-ब्राह्मणोंकी महिमा तथा छब्बीस दोषोंका वर्णन .. | २३७ |
| १००-सौर-धर्म-निरूपणमें सूर्यावतारका कथन ........... | १८२ | १३२-माता, पिता एवं गुरुकी महिमा ............................ | २३९ |
| १०१-ब्रह्मादि देवताओंद्वारा सूर्यके विराट्-रूपका दर्शन ...... | १८४ | १३३-पुराण-श्रवणकी विधि तथा पुराण-वाचककी महिमा.............................................................. | २४० |
| १०२-सूर्योपासनाका फल ............................................. | १८५ | १३४-पूर्त-कर्म-निरूपण ............................................. | २४२ |
| १०३-विभिन्न पुष्पोंद्वारा सूर्य-पूजनका फल .................. | १८६ | १३५-प्रासाद, उद्यान आदिके निर्माणमें भूमि-परीक्षण तथा वृक्षारोपणकी महिमा ................................ | २४४ |
| १०४-सूर्यषष्ठी-व्रतकी महिमा ........................................ | १८८ | १३६-देव-प्रतिमा-निर्माण-विधि ................................... | २४६ |
| १०५-उभयसप्तमी-व्रतका वर्णन ..................................... | १८९ | १३७-कुण्ड-निर्माण एवं उनके संस्कारकी विधि और ग्रह-शान्तिका माहात्म्य .................................... | २४७ |
| १०६-निक्षुभार्क-सप्तमी तथा निक्षुभार्क-चतुष्टय-व्रत-माहात्म्य-वर्णन .............................................. | १९० | १३८-अग्नि-पूजन-विधि ............................................. | २४९ |
| १०७-कामप्रद स्त्री-व्रतका वर्णन ................................... | १९१ | १३९-विविध कर्मोंमें अग्निके नाम तथा होम-द्रव्योंका वर्णन .............................................................. | २५० |
| १०८-भगवान् सूर्यके निमित्त गृह एवं रथ आदिके दानका माहात्म्य .......................................................... | १९१ | १४०-यज्ञ-पात्रोंका स्वरूप और पूर्णाहुतिकी विधि ..... | २५१ |
| १०९-सौर-धर्ममें सदाचरणका वर्णन .............................. | १९२ | मध्यमपर्व ( द्वितीय भाग ) | |
| ११०-सौर-धर्मकी महिमाका वर्णन, ब्रह्माकृत सूर्य-स्तुति ......................................................... | १९३ | १४१-यज्ञादि कर्मोंके मण्डल-निर्माणका विधान तथा क्रौञ्चादि पक्षियोंके दर्शनका फल........................ | २५३ |
| १११-सौर-धर्ममें शान्तिक कर्म एवं अभिषेक-विधि .. | १९५ | १४२-यज्ञादि कर्ममें दक्षिणाका माहात्म्य, विभिन्न कर्मोंमें पारिश्रमिक व्यवस्था और कलश-स्थापनका वर्णन .............................................................. | २५३ |
| ११२-विविध स्मृति-धर्मों तथा संस्कारोंका वर्णन ...... | २०७ | १४३-चतुर्विध मास-व्यवस्था एवं मलमास-वर्णन ..... | २५५ |
| ११३-श्राद्धके विविध भेद तथा वैश्वदेव-कर्मकी महिमा........ | २०८ | ||
| ११४-मातृ-श्राद्धकी संक्षिप्त विधि ............................... | २०९ | ||
| ११५-सौर-धर्ममें शुद्धि-प्रकरण..................................... | २१० | ||
| ११६-श्राद्धाकी महिमा, खखोल्क-मन्त्रका माहात्म्य तथा गौकी महिमा............................................... | २११ | ||
| ११७-पञ्चमहायज्ञ एवं अतिथि-माहात्म्य-वर्णन, सौर-धर्ममें दानकी महत्ता और पात्रापात्रका निर्णय तथा पञ्च महापातक .................................................... | २१३ |