भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
३६-भगवान् सूर्यका अभिषेक एवं उनकी रथयात्रा८८६०-जया-सप्तमी-व्रतका वर्णन१२५
३७-रथयात्रा में विघ्न होनेपर एवं गोचरमें दुष्ट ग्रहोंके आ जानेपर शान्तिका विधान और तिलककी महिमा९१६१-जयन्ती-सप्तमीका विधान और फल१२६
३८-सूर्यनारायणकी रथयात्राका फल९३६२-अपराजिता-सप्तमी एवं महाजया-सप्तमी-व्रतका वर्णन१२७
३९-रथसप्तमी तथा भगवान् सूर्यकी महिमाका वर्णन९४६३-नन्दा-सप्तमी तथा भद्रा-सप्तमी-व्रतका विधान१२८
४०-भगवान् सूर्यद्वारा योगका वर्णन एवं ब्रह्माजीद्वारा दिण्डीको दिया गया क्रियायोगका उपदेश९५६४-तिथियों और नक्षत्रोंके देवता तथा उनके पूजनका फल१२९
४१-भगवान् सूर्यके व्रतोंके अनुष्ठान तथा उनके मन्दिरोंमें अर्चन-पूजनकी विधि तथा फल-सप्तमी-व्रतका फल९८६५-सूर्य-पूजाका माहात्म्य१३२
४२-रहस्य-सप्तमी-व्रतके दिन त्याज्य पदार्थका निषेध तथा व्रतका विधान एवं फल१००६६-त्रिवर्ग-सप्तमीकी महिमा१३४
४३-शंख एवं द्विज, वसिष्ठ एवं साम्ब तथा याज्ञवल्क्य और ब्रह्माके संवादमें आदित्यकी आराधनाका माहात्म्य-कथन, भगवान् सूर्यकी ब्रह्मरूपता१०१६७-कामदा एवं पापनाशिनी-सप्तमी-व्रत-वर्णन१३५
४४-सूर्यनारायणके प्रिय पुष्प, सूर्यमन्दिरमें मार्जन-लेपन आदिका फल, दीपदानका फल तथा सिद्धार्थ-सप्तमी-व्रतका विधान और फल१०४६८-सूर्यपदद्वय-व्रत, सर्वाप्ति-सप्तमी एवं मार्तण्ड-सप्तमीकी विधि१३६
४५-शुभाशुभ स्वप्न और उनके फल१०६६९-अनन्त-सप्तमी तथा अव्यङ्ग-सप्तमीका विधान१३७
४६-सिद्धार्थ (सर्षप)-सप्तमी-व्रतके उद्यापनकी विधि१०७७०-सूर्यपूजामें भाव-शुद्धिकी आवश्यकता एवं त्रिप्ताप्ति-सप्तमी-व्रत१३८
४७-ब्रह्माद्वारा कहा गया भगवान् सूर्यका नाम-स्तोत्र१०७७१-सूर्यमन्दिर-निर्माणका फल तथा यमराजका अपने दूतोंको सूर्यभक्तोंसे दूर रहनेका आदेश, घृत तथा दूधसे अभिषेकका फल१३९
४८-जम्बूद्वीपमें सूर्यनारायणकी आराधनाके तीन प्रमुख स्थान, दुर्वासा मुनिका साम्बको शाप देना१०८७२-कौसल्या और गौतमीके संवादरूपमें भगवान् सूर्यका माहात्म्य-निरूपण तथा भगवान् सूर्यके प्रिय पत्र-पुष्पादिका वर्णन१४०
४९-सूर्यनारायणकी द्वादश मूर्तियोंका वर्णन११०७३-सूर्य-भक्त सत्राजित्की कथा तथा त्रिविक्रम-व्रतकी विधि१४१
५०-देवर्षि नारदद्वारा सूर्यके विराट्रूप तथा उनके प्रभावका वर्णन१११७४-भोजकोंकी उत्पत्ति तथा उनके लक्षणोंका वर्णन१४४
५१-भगवान् सूर्यका परिवार११४७५-भद्र ब्राह्मणकी कथा एवं कार्तिक मासमें सूर्य-मन्दिरमें दीपदानका फल१४६
५२-सूर्यभगवान्‌को नमस्कार एवं प्रदक्षिणा करनेका फल और विजया-सप्तमी-व्रतकी विधि११७७६-यमदूत और नारकीय जीवोंके संवादके प्रसंगमें सूर्य-मन्दिरमें दीपदान करने एवं दीप चुरानेके पुण्य-पापोंका परिणाम१४७
५३-द्वादश रविवारोंका वर्णन और नन्दादित्य-व्रतकी विधि११७७७-वैवस्वतके लक्षण और सूर्यनारायणकी महिमा१४८
५४-भद्रादित्य, सौम्यादित्य और कामदादित्यवार-व्रतोंकी विधिका निरूपण११८७८-भगवान् सूर्यनारायणके सौम्य रूपकी कथा, उनकी स्तुति और परिवार तथा देवताओंका वर्णन१५०
५५-पुत्रद, जय, जयन्तसंज्ञक आदित्यवार-व्रतोंकी विधि११९७९-श्रीसूर्यनारायणके आयुध—व्योमका लक्षण और माहात्म्य१५२
५६-विजय, आदित्याभिमुख तथा हृदयवार-व्रतोंकी विधि११९८०-साम्बद्वारा भगवान् सूर्यकी आराधना, कुष्ठरोगसे मुक्ति तथा सूर्यस्तवराजका कथन१५४
५७-रोगहा एवं महाश्वेतवार-व्रतकी विधि१२०८१-साम्बको सूर्य-प्रतिमाकी प्राप्ति१५७
५८-सूर्यदेवकी पूजामें विविध उपचार और फल आदि निवेदन करनेका माहात्म्य१२१८२-मन्दिर-निर्माण-योग्य भूमि एवं मन्दिरमें प्रतिमाओंके स्थानका निरूपण१५८
५९-एक वैश्य तथा ब्राह्मणकी कथा, सूर्यमन्दिरमें पुराण-वाचन एवं भगवान् सूर्यको स्नानादि करानेका फल१२३८३-सात प्रकारकी प्रतिमा एवं काष्ठ-प्रतिमाके निर्माणोपयोगी वृक्षोंके लक्षण१५९
८४-सूर्य-प्रतिमाकी निर्माण-विधि१६०