भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 212, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें- ब्राह्मपर्व *
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तत्पर, शंकरपुत्र विनायक आपको महाशान्ति प्रदान करें। इन्द्रनीलके समान आभावाले, त्रिनेत्रधारी, प्रदीप्त त्रिशूल धारण करनेवाले, नागोंसे विभूषित, पापोंको दूर करनेवाले तथा अलक्ष्य रूपवाले, मलोंके नाशक भगवान् शंकर प्रसन्नचित्तसे आपको महाशान्ति प्रदान करें। नाना अलंकारोंसे विभूषित, सुन्दर वस्त्रोंको धारण करनेवाली, देवताओंकी जननी, सारे संसारसे नमस्कृत, समस्त सिद्धियोंकी प्रदायिनी, प्रसाद-प्राप्तिकी एकमात्र स्थान जगन्माता भगवती पार्वती आपको शान्ति प्रदान करें। स्निग्ध श्यामल वर्णवाली, धनुष-चक्र, खड्ग तथा पट्टिश आयुधोंको धारण की हुई, सभी उपद्रवोंका नाश करनेवाली, विशाल बाहुओंवाली, महामहिष-मर्दिनी भगवती भवानी दुर्गा आपको शान्ति प्रदान करें। अत्यन्त सूक्ष्म, अतिक्रोधी, तीन नेत्रोंवाले, महावीर, सूर्यभक्त भूमिरिटि आपको नित्य कल्याण करें। विशाल घण्टा तथा रुद्राक्ष-माला धारण किये हुए, ब्रह्महत्यादि उत्कट पापोंका नाश करनेवाले, प्रचण्डगणोंके सेनापति, आदित्यकी आराधनामें तत्पर महायोगी चण्डेश्वर आपको शान्ति एवं कल्याण प्रदान करें। दिव्य आकाश-मातृकाएँ, अन्य देव-मातृकाएँ, देवताओंद्वारा पूजित मातृकाएँ जो संसारको व्याप्त करके अवस्थित हैं और सूर्यार्चनमें तत्पर रहती हैं, वे आपको शान्ति प्रदान करें। रौद्र कर्म करनेवाले तथा रौद्र स्थानमें निवास करनेवाले रुद्रगण, अन्य समस्त गणाधिप, दिशाओं तथा विदिशाओंमें जो विघ्नरूपसे अवस्थित रहते हैं, वे सभी प्रसन्नचित्त होकर मेरे द्वारा दी गयी इस बलि (नैवेद्य)-को ग्रहण करें। ये आपको नित्य सिद्धि प्रदान करें और आपकी भयोंसे रक्षा करें।
हाथोंमें वज्र लिये हुए, महाबलशाली, सफेद, नीले, काले तथा लाल वर्णवाले, पृथ्वी, आकाश, पाताल तथा अन्तरिक्षमें रहनेवाले ऐन्द्रगण निरन्तर
आपका कल्याण करें और शान्ति प्रदान करें। आग्नेय दिशामें रहनेवाले निरन्तर ज्वलनशील, जपाकुसुमके समान लाल तथा लोहित वर्णवाले, हाथमें निरन्तर दण्ड धारण करनेवाले सूर्यके भक्त भास्कर आदि मेरे द्वारा दिये गये बलि (नैवेद्य)-को ग्रहण करें और आपको नित्य शान्ति एवं कल्याण प्रदान करें। ईशानकोणमें अवस्थित शान्ति-स्वभावयुक्त, त्रिशूलधारी, अङ्गोंमें भस्म धारण किये हुए, नीलकण्ठ, रक्तवर्णवाले, सूर्य-पूजनमें तत्पर, अन्तरिक्ष, आकाश, पृथ्वी तथा स्वर्गमें निवास करनेवाले रुद्रगण आपको नित्य शान्ति एवं कल्याण प्रदान करें।
रत्नोंके प्राकारों एवं महारत्नोंसे शोभित, विद्याधर एवं सिद्ध-गन्धर्वोंसे सुसेवित पूर्वदिशामें अवस्थित अमरावती नामवाली नगरीमें महाबली, वज्रपाणि, देवताओंके अधिपति इन्द्र निवास करते हैं। वे ऐरावतपर आरूढ़ एवं स्वर्णकी आभाके समान प्रकाशमान हैं, सूर्यकी आराधनामें तत्पर तथा नित्य प्रसन्न-चित्त रहनेवाले हैं, वे परम शान्ति प्रदान करें। विविध देवगणोंसे व्याप्त, भाँति-भाँतिके रत्नोंसे शोभित, अग्रिकोणमें अवस्थित तेजस्वती नामकी पुरी है, उसमें स्थित जलते हुए अंगारोंके समान प्रकाशवाले, ज्वालमालाओंसे व्याप्त, निरन्तर ज्वलन एवं दहनशील, पापनाशक, आदित्यकी आराधनामें तत्पर अग्निदेव आपके पापोंका सर्वथा नाश करें एवं शान्ति प्रदान करें। दक्षिण दिशामें संयमनीपुरी स्थित है, वह नाना रत्नोंसे सुशोभित एवं सैकड़ों सुरासुरोंसे व्याप्त है, उसमें रहनेवाले हरित-पिङ्गल नेत्रोंवाले महामहिषपर आरूढ़, कृष्ण वस्त्र एवं मालासे विभूषित, सूर्यकी आराधनामें तत्पर महातेजस्वी यमराज आपको क्षेम एवं आरोग्य प्रदान करें। नैऋत्यकोणमें स्थित कृष्णा नामकी पुरी है, जो महान् रक्षोगण, प्रेत
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