भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

त्रेतायुगके सूर्य एवं चन्द्र-राजवंशोंका वर्णन

सूतजी बोले—महामुने! वैशाख मासके शुक्ल पक्षकी तृतीया तिथिमें बृहस्पतिवारके दिन महाराज सुदर्शन अपने परिकरोंके साथ हिमालयपर्वतसे पुनः अयोध्या लौट आये। मायादेवीके प्रभावसे अयोध्यापुरी पुनः विविध अन्न-धनसे परिपूर्ण एवं समृद्धिसम्पन्न हो गयी। महाराज सुदर्शनने१ दस हजार वर्षोंतक राज्यकर नित्यलोकको प्राप्त किया। उनके पुत्र दिलीप (द्वितीय) हुए, उन्हें नन्दिनी गौके वरदानसे श्रेष्ठ रघु नामक एक पुत्र उत्पन्न हुआ। राजा दिलीपने दस हजार वर्षोंतक भलीभाँति राज्य किया। दिलीपके बाद पिताके ही समान महाराज रघुने भी राज्य किया। भृगुनन्दन! त्रेतामें ये सूर्यवंशी क्षत्रिय रघुवंशी नामसे प्रसिद्ध हुए। ब्राह्मणके वरदानसे उनके अज नामक पुत्र हुआ, उन्होंने भी पिताके समान ही राज्य किया। उनके पुत्र महाराज दशरथ (द्वितीय) हुए, दशरथके पुत्ररूपमें (भगवान् विष्णुके अवतार) स्वयं राम उत्पन्न हुए। उन्होंने ग्यारह हजार वर्षोंतक राज्य किया। श्रीरामके पुत्र कुशने दस हजार वर्षोंतक राज्य किया। कुशके पुत्र अतिथि, अतिथिके निषध, निषधके पुत्र नल२ हुए, जो शक्तिके परम उपासक थे। नलके पुत्र नभ, नभके पुत्र पुण्डरीक, उनके पुत्र क्षेमधन्वा, क्षेमधन्वाके देवानीक और देवानीकके पुत्र अहीनग तथा अहीनगके पुत्र कुरु हुए। इन्होंने त्रेतामें सौ योजना विस्तारका कुरुक्षेत्र बनाया। कुरुके पुत्र पारियात्र, उनके बलस्थल, बलस्थलके पुत्र उकथ, उनके वज्रनाभि, वज्रनाभिके पुत्र शङ्खनाभि और उनके व्युत्थनाभि हुए। व्युत्थनाभिके पुत्र विश्वपाल, उनके स्वर्णनाभि और स्वर्णनाभिके पुत्र पुष्पसेन

हुए। पुष्पसेनके पुत्र ध्रुवसन्धि तथा ध्रुवसन्धिके पुत्र अपवर्मा हुए। अपवर्माके पुत्र शीघ्रगन्ता, शीघ्रगन्ताके पुत्र मरुपाल और उनके पुत्र प्रसुश्रुत हुए। प्रसुश्रुतके पुत्र सुसंधि हुए। उन्होंने पृथ्वीके एक छोरसे दूसरे छोरतक राज्य किया। उनके पुत्र अमर्षण हुए। उन्होंने पिताके समान राज्य किया। उनके पुत्र महाक्ष, महाक्षके पुत्र बृहद्दल और इनके पुत्र बृहद्दशन हुए। बृहद्दशानके पुत्र मुरुक्षेप, उनके वत्सपाल और उनके पुत्र वत्सव्यूह हुए। वत्सव्यूहके पुत्र राजा प्रतिव्योम हुए। उनके पुत्र देवकर और उनके पुत्र सहदेव हुए। सहदेवके पुत्र बृहदक्ष, उनके भानुरत्न तथा भानुरत्नके सुप्रतीक हुए। उनके मरुदेव३ और मरुदेवके पुत्र सुनक्षत्र हुए। सुनक्षत्रके पुत्र केशीनर, उनके पुत्र अन्तरिक्ष और अन्तरिक्षके पुत्र सुवर्णाङ्ग हुए। सुवर्णाङ्गके पुत्र अमित्रजित्, उनके पुत्र बृहद्राज और बृहद्राजके पुत्र धर्मराज हुए। धर्मराजके पुत्र कृतञ्जय और उनके पुत्र रणञ्जय हुए। रणञ्जयके पुत्र सञ्जय, उनके पुत्र शाक्यवर्धन और शाक्यवर्धनके पुत्र क्रोधदान हुए। क्रोधदानके पुत्र अतुलविक्रम, उनके पुत्र प्रसेनजित् और प्रसेनजित्के पुत्र शूद्रक हुए। शूद्रकके पुत्र सुरथ हुए। ये सभी महाराज रघुके वंशज तथा देवीकी आराधनामें रत रहते थे। यज्ञ-यागादिमें तत्पर रहकर अन्तमें इन सभी राजाओंने स्वर्गलोक प्राप्त किया। जो बुद्धके वंशज हुए, वे सब पूर्ण शुद्ध क्षत्रिय नहीं थे।

त्रेतायुगके तृतीय चरणके प्रारम्भसे नवीनता आ गयी। देवराज इन्द्रने रोहिणी-पति चन्द्रमाको पृथ्वीपर भेजा। चन्द्रमाने तीर्थराज प्रयागको अपनी राजधानी

१-राजा सुदर्शनकी विस्तृत कथा देवीभागवतके तृतीय स्कन्धमें प्राप्त होती है।

२-ये नल दमयन्तीके पति अत्यन्त प्रसिद्ध महाराज नलसे भिन्न हैं।

३-अन्य सभी पुराणोंमें सूर्यवंशका यहाँतक वर्णन है। पुराणोंके अनुसार मरु देवापिके साथ कलाप ग्राममें निवासकर साधना कर रहे हैं, किंतु इस पुराणके अनुसार सूर्यवंशका वर्णन सुदूर आगेतक हुआ है, जो प्रायः कलियुगतक पहुँच जाता है।

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