भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 294, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें- प्रतिसर्गपर्व, प्रथम खण्ड *
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सम्पन्न थे। उनके (एक रानीसे उत्पन्न साठ हजार) पुत्र सागर नामसे प्रसिद्ध हुए। मुनियोंने तीस हजार वर्षांतक उनका राज्य-काल माना है। (कपिल मुनिके शापसे) सगर-पुत्र नष्ट हो गये। दूसरी रानीसे असमंजस नामका एक पुत्र हुआ। उनके पुत्र अंशुमान् हुए। उनके दिलीप और दिलीपके पुत्र भगीरथ हुए, जिनके द्वारा पृथ्वीपर लायी गयी गङ्गा भागीरथी नामसे प्रसिद्ध हुई। भगीरथके पुत्र श्रुतसेन हुए। महाराज सगरसे श्रुतसेनतक सभी राजा शैव थे। श्रुतसेनके पुत्र नाभाग तथा नाभागेके पुत्र राजा अम्बरीष अत्यन्त प्रसिद्ध विष्णुभक्त हुए, जिनकी रक्षामें सुदर्शनचक्र रात-दिन नियुक्त रहता था। तबतक भारतमें सत्ययुगका तीसरा चरण समाप्त हो चुका था।
सत्ययुगके चतुर्थ चरणमें महाराज अम्बरीषके पुत्र सिन्धुद्वीप हुए, उनके पुत्र अयुताश्व, अयुताश्वके पुत्र ऋतुर्पण, उनके पुत्र सर्वकाम तथा उनके पुत्र कल्माषपाद हुए। कल्माषपादके पुत्र सुदासको वसिष्ठजीके आशीर्वादसे मदयन्तीसे उत्पन्न अश्वमक (सौदास) नामका पुत्र प्राप्त हुआ। सौदासतकके ये सात राजा वैष्णव कहे गये हैं। गुरुके शापसे सौदासने अङ्गोंसहित अपना सम्पूर्ण राज्य गुरुको समर्पित कर दिया। गोकर्ण लिङ्ग-भक्त शैव कहा जाता है। राजा अश्वमकके पुत्र हरिवर्मा साधुओंके पूजक थे। उनके पुत्र दशरथ (प्रथम) हुए, उनके पुत्र दिलीप (प्रथम) हुए, उनके पुत्र विश्वासह हुए, उन्होंने दस हजार वर्षांतक राज्य किया। उनके अधर्म-आचरणके कारण उस समय सौ
वर्षांतक भयंकर अनावृष्टि हुई, जिससे उनका राज्य विनष्ट हो गया और रानीके आग्रह करनेपर महर्षि वसिष्ठने यज्ञकर यज्ञके द्वारा खट्वाङ्ग नामक पुत्र उत्पन्न किया। राजा खट्वाङ्गने शस्त्र धारण कर इन्द्रकी सहायतासे तीस हजार वर्षांतक राज्य किया। तदनन्तर देवताओंसे वर प्राप्त कर मुक्ति प्राप्त की। उनके पुत्र दीर्घबाहु हुए, उन्होंने बीस हजार वर्षांतक राज्य किया। उनके पुत्र सुदर्शन हुए। महामनीषी सुदर्शनने राजा काशीराजकी पुत्रीसे विवाह कर देवीके प्रसादसे राजाओंको जीतकर धर्मपूर्वक सम्पूर्ण भरतखण्डपर पाँच हजार वर्षांतक राज्य किया।
एक दिन स्वप्नमें महाकालीने राजा सुदर्शनसे कहा—‘वत्स! तुम अपनी पत्नीके साथ तथा महर्षि वसिष्ठ आदिसे समन्वित होकर हिमालयपर जाकर निवास करो; क्योंकि शीघ्र ही भीषण झंझावातके प्रभावसे भरतखण्डका प्रायः क्षय हो जायगा। पूर्व, पश्चिम आदि दिशाओंके अनेक उपद्वीप झंझावातोंके कारण समुद्रके गर्तमें विलीन-से हो गये हैं। भारतवर्षमें भी आजके सातवें दिन भीषण झंझावात आयेगा।’ स्वप्नमें भगवतीद्वारा प्रलयका निर्देश पाकर महाराज सुदर्शन प्रधान राजाओं, वैश्यों तथा ब्राह्मणों और अपने परिकरोंके साथ हिमालयपर चले गये और भारतका बड़ा-सा भूभाग समुद्री-तूफान आदिके प्रभावसे नष्ट हो गया। सम्पूर्ण प्राणी विनष्ट हो गये और सारी पृथ्वी जलमग्न हो गयी। पुनः कुछ समयके अनन्तर भूमि स्थलरूपमें दिखलाई देने लगी। (अध्याय १)
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