भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

द्वापरयुगके चन्द्रवंशीय राजाओंका वृत्तान्त

महर्षि शौनकने पूछा—लोमहर्षणजी! आप यह बताइये कि महाराज संवरण* किस समय पृथ्वीपर आये और उन्होंने कितने समयतक राज्य किया तथा द्वापरमें कौन-कौन राजा हुए, यह सब भी बतायें।

सूतजी बोले—महर्षे! महाराज संवरण भाद्रपदके कृष्ण पक्षकी त्रयोदशी तिथिको शुक्रवारके दिन मुनियोंके साथ प्रतिष्ठानपुर (झूँसी)-में आये। विश्वकर्माने वहाँ एक ऐसे विशाल प्रासादका निर्माण किया, जो ऊँचाईमें आधा कोस या डेढ़ किलोमीटरके लगभग था। महाराज संवरणने पाँच योजना या बीस कोसके क्षेत्रमें प्रतिष्ठानपुरको अत्यन्त सुन्दरता एवं स्वच्छतापूर्वक बसाया। एक ही समयमें (चन्द्रमाके पुत्र) बुधके वंशमें उत्पन्न प्रसेन और यदुवंशीय राजा सात्वत शूरसेन मथुरा (मथुरा)-के शासक हुए। म्लेच्छवंशीय शमश्रुपाल (दाढ़ी रखनेवाला) मरुदेश (अरब, ईरान और ईराक)-के शासक हुए। क्रमशः प्रजाओंके साथ राजाओंकी संख्या बढ़ती गयी। राजा संवरणने दस हजार वर्षोंतक राज्य किया। इसके बाद उनके पुत्र अर्चाज्ञ हुए, उन्होंने भी दस हजार वर्षोंतक शासन किया। उनके पुत्र सूर्यजापीने पिताके शासनकालके आधे समयतक राज्य किया। उनके पुत्र सौरयज्ञपरायण सूर्ययज्ञ हुए। उनके पुत्र आदित्यवर्धन, आदित्यवर्धनके पुत्र द्वादशात्मा और उनके पुत्र दिवाकर हुए। इन्होंने भी प्रायः अपने पितासे कुछ कम ही दिनोंतक राज्य किया। दिवाकरके पुत्र प्रभाकर और प्रभाकरके पुत्र भास्वदात्मा हुए। भास्वदात्माके पुत्र विवस्वज्ज, उनके पुत्र हरिदक्षार्चन और उनके पुत्र वैकर्तन हुए। वैकर्तनके पुत्र अर्कष्टिमान्, उनके पुत्र मार्तण्डवत्सल और मार्तण्डवत्सलके पुत्र मिहिर्श

तथा उनके अरुणपोषण हुए। अरुणपोषणके पुत्र घुमणि, घुमणिके पुत्र तरणि यज्ञ और उनके पुत्र मैत्रेष्टिवर्धन हुए। मैत्रेष्टिवर्धनके पुत्र चित्रभानूर्जक, उनके वैरोचन और वैरोचनके पुत्र हंसन्यायी हुए। उनके पुत्र वेदप्रवर्धन, वेदप्रवर्धनके पुत्र सावित्र और इनके पुत्र धनपाल हुए। धनपालके पुत्र म्लेच्छहन्ता, म्लेच्छहन्ताके आनन्दवर्धन, इनके धर्मपाल और धर्मपालके पुत्र ब्रह्मभक्त हुए। उनके पुत्र ब्रह्मोष्टिवर्धन, उनके पुत्र आत्मप्रपूजक हुए और उनके परमेश्वी नामक पुत्र हुए। परमेश्वीके पुत्र हैरण्यवर्धन, उनके धातुयाजी, उनके विधातृप्रपूजक और उनके पुत्र द्रुहिणक्रतु हुए। द्रुहिणक्रतुके पुत्र वैरंच्य, उनके पुत्र कमलासन और कमलासनके पुत्र शमवर्ती हुए। शमवर्तीके पुत्र श्राद्धदेव और उनके पितृवर्धन, उनके सोमदत्त और सोमदत्तके पुत्र सौमदत्ति हुए। सौमदत्तिके पुत्र सोमवर्धन, उनके अवतंस, अवतंसके पुत्र प्रतंस और प्रतंसके पुत्र परातंस हुए। परातंसके पुत्र अयतंस, उनके पुत्र समातंस, उनके पुत्र अनुतंस और अनुतंसके पुत्र अधितंस हुए। अधितंसके अधितंस, उनके पुत्र समुतंस, उनके तंस और तंसके पुत्र दुष्यन्त हुए।

महाराज दुष्यन्तकी पत्नी शकुन्तलासे भरत नामके पुत्र हुए, जो सदा सूर्यदेवकी पूजामें तत्पर रहते थे। महाराज भरतने महामाया भगवतीकी कृपासे सम्पूर्ण पृथ्वीपर छत्तीस हजार वर्षोंतक चक्रवर्ती सम्राट्के रूपमें राज्य किया और उनके पुत्र महाबल हुए। महाबलके पुत्र भरद्वाज हुए। भरद्वाजके पुत्र मन्युमान् हुए, जिन्होंने अद्वाह्र हजार वर्षोंतक पृथ्वीपर शासन किया। उनके पुत्र बृहत्क्षेत्र, उनके पुत्र सुहोत्र और सुहोत्रके पुत्र वीतिहोत्र हुए, इन्होंने दस हजार वर्षोंतक राज्य

  • इनकी विस्तृत कथा महाभारतके आदिपर्व (अ० १४)-में विस्तारसे, किंतु १७२ तक प्रायः आती रही है।

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