भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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  • प्रतिसर्गपर्व, प्रथम खण्ड *

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किया। वीतिहोत्रके पुत्र यज्ञहोत्र, यज्ञहोत्रके पुत्र शक्रहोत्र हुए। इन्द्रदेवने प्रसन्न होकर इन्हें स्वर्ग प्रदान किया। उस समय अयोध्यामें महाबली प्रतापेन्द्र नामक राजा हुए, उन्होंने दस हजार वर्षांतक भारतपर शासन किया। इनके पुत्र मण्डलीक हुए। मण्डलीकके पुत्र विजयेन्द्र, विजयेन्द्रके पुत्र धनुर्दीप्त हुए।

महाराज शक्रहोत्र इन्द्रकी आज्ञासे घृताचीके साथ पुनः भूतलपर आये और उन्होंने राजा धनुर्दीप्तको जीतकर पृथ्वीपर शासन किया। शक्रहोत्रके घृताचीसे हस्ती नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। हस्तीने ऐरावत हाथीके बच्चेपर आरूढ़ होकर पश्चिममें अपने नामसे हस्तिना नामक नगरीका निर्माण किया। यह दस योजना विस्तृत है तथा स्वर्गङ्गाके तटपर अवस्थित है। वहाँ उन्होंने दस हजार वर्षांतक निवासकर राज्य किया। महाराज हस्तीके पुत्र अजमीढ, अजमीढके पुत्र रक्षपाल, रक्षपालके पुत्र सुशाम्यर्ण और उनके पुत्र कुरु हुए। इन्द्रके वरदानसे वे सदेह स्वर्ग चले गये।

उस समय मथुरामें सात्वत-वंशमें वृष्णि नामके एक महाबली राजा हुए। उन्होंने भगवान् विष्णुके वरदानसे पाँच हजार वर्षांतक सम्पूर्ण राज्यको अपने अधीन रखा। राजा वृष्णिके पुत्र निरावृत्ति हुए, निरावृत्तिके पुत्र दशारी, दशारीके पुत्र व्यामुन और व्यामुनके पुत्र जीमूत और इनके पुत्र विकृति हुए। विकृतिके पुत्र भीमरथ, उनके पुत्र नवरथ और नवरथके दशरथ हुए। उनके पुत्र शकुनि, उनके कुशुम्भ और कुशुम्भके पुत्र देवरथ हुए। देवरथके पुत्र देवक्षेत्र, उनके पुत्र मधु और मधुके पुत्र नवरथ और उनके कुरुवत्स हुए। इन सभी लोगोंने अपने-अपने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। कुरुवत्सके पुत्र अनुरथ, उनके पुरुहोत्र और पुरुहोत्रके पुत्र विचित्राङ्ग हुए, उनके सात्वतवान्

और उनके पुत्र भजमान हुए। उनके पुत्र विदूरथ, उनके सुरभक्त और सुरभक्तके सुमना हुए। इन सभीने अपने-अपने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। सुमनाके पुत्र ततिक्षेत्र, उनके स्वायम्भुव, उनके हरिदीपक और हरिदीपकके देवमेधा हुए। इन सभीने अपने-अपने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। देवमेधाके पुत्र सुरपाल हुए।

द्रापरके तृतीय चरणके समाप्त होनेपर देवराज इन्द्रकी आज्ञासे आयी सुकेशी नामकी अप्सराके स्वामी कुरु राजा हुए। इन्होंने कुरुक्षेत्रका निर्माण किया जो बीस योजना विस्तृत है। विद्वानोंने उसे पुण्यक्षेत्र बताया है। महाराज कुरुने बारह हजार वर्षांतक राज्य किया। इनके पुत्र जहु, जहुके सुरथ और सुरथके पुत्र विदूरथ हुए। विदूरथके पुत्र सार्वभौम, इनके जयसेन और उनके पुत्र अर्णव हुए। महाराज अर्णवका शासन-क्षेत्र चारों समुद्रतक था और इन्होंने अपने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। अर्णवके पुत्र अयुतायु हुए, जिन्होंने दस हजार वर्षांतक राज्य किया। अयुतायुके पुत्र अक्रोधन, उनके ऋक्ष, उनके पुत्र भीमसेन और भीमसेनके पुत्र दिलीप हुए। इन सभी राजाओंने अपने-अपने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। दिलीपके पुत्र प्रतीप हुए, इन्होंने पाँच हजार वर्षांतक शासन किया। प्रतीपके पुत्र शन्तनु हुए और उन्होंने एक हजार वर्षांतक राज्य किया, उन्हें विचित्रवीर्य नामका पुत्र उत्पन्न हुआ, जिन्होंने दो सौ वर्षांतक राज्य किया। उनके पुत्र पाण्डु हुए, उन्होंने पाँच सौ वर्षांतक राज्य किया, उनके पुत्र युधिष्ठिर हुए, उन्होंने पचास वर्षांतक राज्य किया। सुयोधन (दुर्योधन)-ने साठ वर्षांतक राज्य किया और कुरुक्षेत्रमें (युधिष्ठिरके भाई भीमसेन)-के द्वारा उसकी मृत्यु हुई।

प्राचीन कालमें दैत्योंका देवताओंद्वारा भारी संहार

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