भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

नामसे प्रसिद्ध हुए। वे नारीसे शिक्षा प्राप्तकर राघवानन्दके शिष्य श्रीरामानन्दकी परम्परामें काशीमें अत्यन्त विरक्त वैष्णव कवि हुए। पूर्वजन्मके श्रीपति अकबरके समयमें महान् अन्ध भक्त कवि 'सूरदास' के रूपमें उत्पन्न हुए, ये मध्वाचार्यके मतमें स्थित रहनेवाले थे। इन्होंने कृष्णलीलाका वर्णन किया। पूर्वजन्मके शम्भु अकबरके समयमें चन्द्रभट्टके कुलमें हरिप्रिय नामसे उत्पन्न हुए, ये विष्णुभक्त थे और रामानन्दके मतमें स्थित हुए। पूर्वजन्मके वरेण्य अकबरके समयमें अग्रभुक् (अग्रदास१) नामके प्रसिद्ध संत थे, जो रामानन्दके मतमें स्थित हुए। ज्ञान-ध्यानपरायण, भाषा-छन्दकी रचना करनेवाले पूर्वजन्मके कवि मधुव्रती अकबरके समयमें 'कीलक' नामसे विख्यात हुए। धीमान् कीलकने रामलीलाकी रचना की और रामानन्दमतके अनुयायी हुए। पूर्वजन्मके विमल अकबरके समयमें 'दिवाकर' नामसे प्रसिद्ध हुए और भगवती सीताके पावन चरित्रका गान किया तथा वे रामानन्दके मतमें स्थित हुए। इसी प्रकार पूर्वजन्मके देवान् अकबरके समयमें 'केशव' नामसे अवतीर्ण हुए, ये विष्णुस्वामीके अनुयायी बने। कविप्रिया आदिकी रचनाकर इन्होंने प्रेतत्व प्राप्त किया और राम-ज्योत्स्ना नामक ग्रन्थकी रचनाकर स्वर्ग प्राप्त किया। पूर्वजन्मके सोम 'व्यासदास' नामसे उत्पन्न हुए। ये निम्बादित्यके मतानुयायी हुए। इन्होंने रहःक्रीडा ग्रन्थकी रचनाकर स्वर्ग प्राप्त किया। पूर्वजन्मके वर्धन 'चरणदास' नामसे विख्यात हुए। इन्होंने ज्ञानमाला नामक

ग्रन्थका निर्माण किया और ये रैदास-मार्गके अनुयायी बने। पूर्वजन्मके वर्तक 'रत्नभानु' नामसे उत्पन्न हुए, ये जैमिनि भाषाके रचयिता थे और रोपण-मतके अनुयायी थे। पूर्वजन्मके रुचि 'रोचन' नामसे उत्पन्न हुए। ये मध्वाचार्यके मतानुयायी थे। इन्होंने अनेक गानमयी लीला करके स्वर्ग प्राप्त किया। पूर्वजन्मके मान्धाता 'भूपति' नामके कायस्थ हुए। मध्वाचार्यके मतानुसार इन्होंने हिन्दी-भाषामें भागवतका सुन्दर अनुवाद किया। पूर्वजन्मके मानकारने नारीभावसे स्त्रीशरीरको प्राप्त किया और 'मीरा' के नामसे विख्यात राजाकी पुत्री हुई। मध्वाचार्यके मतको माननेवाली वह मीरा अत्यन्त प्रसिद्ध हुई। उनका प्रबन्ध भयंकर कलिकालके लिये मङ्गलकर होगा।

अकबरने पचास वर्षतक निष्कण्टक राज्य किया और अन्तमें मरकर स्वर्ग चला गया। उसका पुत्र सलोमा—सलीम (जहाँगीर) था। उसने भी पिताके समान राज्य किया। उसका बेटा खुर्दक (खुसरो शाहजहाँ) था, उसने दस वर्षतक राज्य किया। उसके चार बेटे थे। उसका मध्यम बेटा नवरंग (औरंगजेब) था। उसने पिता और भाईको जीतकर राज्य किया। यह पूर्वजन्ममें अन्धक नामका प्रसिद्ध दैत्य था। इस कर्मभूमिमें अन्धकके अंशसे दैत्यराजकी आज्ञासे आया था। उसने चारों ओर अनेक मूर्तियोंको ध्वस्त किया। ऐसा देखकर देवताओंने आकर कृष्णचैतन्यसे कहा—'भगवन्! दैत्यराजका अंशभूत (औरंगजेब२)' राजा उत्पन्न हुआ है, वह देवताओं और वेदोंका

१-ये बहुत बड़े सिद्ध महात्मा थे, इनकी कुण्डलिया प्रसिद्ध हैं। ये जयपुरके गलता गद्दीके संस्थापक थे। इनके सम्प्रदायके अधिकांश लोग दुर्भाग्यपर जीवन-यापन करते थे। इससे इन्हें पयहारी कहा जाता था। भक्त नाभादास इनके ही शिष्य थे।

२-वास्तवमें औरंगजेब एवं महाप्रभुके समयमें प्रायः ३०० वर्षोंका अन्तर है। इसलिये यहाँ महाप्रभुसे किसी गौड़ीय सम्प्रदायके तत्कालीन प्रभावशाली संतका तात्पर्य ग्रहण करना चाहिये। औरंगजेबपर सर डॉ० यदुनाथ सरकारकी पाँच बड़े जिल्दोंकी अत्यन्त

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