भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 453, कुल 654 में से
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
बुधाष्टमीव्रत-कथा तथा माहात्म्य
भगवान् श्रीकृष्ण बोले—महाराज! अब मैं बुधाष्टमीव्रतका विधान बतलाता हूँ, जिसे करनेवाला कभी नरकका मुख नहीं देखता। इस विषयमें आप एक आख्यान सुनें। सत्ययुगके प्रारम्भमें मनुके पुत्र राजा इल* हुए। वे अनेक मित्रों तथा भृत्योंसे घिरे रहते थे। एक दिन वे मृगयाके प्रसंगसे एक हिरण्यका पीछा करते हुए हिमालय पर्वतके समीप एक जंगलमें पहुँच गये। उस वनमें प्रवेश करते ही वे सहसा स्त्री-रूपमें परिणत हो गये। वह वन शिवजी और माता पार्वतीजीका विहार-क्षेत्र था। वहाँ शिवजीकी यह आज्ञा थी कि 'जो पुरुष इस वनमें प्रवेश करेगा, वह तत्क्षण ही स्त्री हो जायगा।' इस कारण राजा इल भी स्त्री हो गये। अब वे स्त्री-रूपसे वनमें विचरण करने लगे। वे यह नहीं समझ सके कि मैं कहाँ आ गया हूँ। उसी समय चन्द्रमाके पुत्र कुमार बुधकी दृष्टि उनपर पड़ी। उसके उत्तम रूपपर आकृष्ट हो बुधने उसे अपनी स्त्री बना लिया। इलासे एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम पुरुरवा था। पुरुरवासे ही चन्द्रवंशका प्रारम्भ हुआ।
जिस दिन बुधने इलासे विवाह किया, उस दिन अष्टमी तिथि थी, इसलिये यह बुधाष्टमी जगत्में पूज्य हुई। यह बुधाष्टमी सम्पूर्ण पापोंका प्रशमन तथा उपद्रवोंका नाश करनेवाली है।
राजन्! अब मैं आपको एक दूसरी कथा सुना रहा हूँ—विदेह राजाओंकी नगरी मिथिलामें निमि नामके एक राजा थे। वे शत्रुओंद्वारा लड़ाईके मैदानमें मार डाले गये। उनकी स्त्रीका नाम था उर्मिला। उर्मिला जब राज्य-च्युत एवं निराश्रित हो इधर-उधर घूमने लगी, तब अपने बालक और
कन्याको लेकर वह अवन्ति देश चली गयी और वहाँ एक ब्राह्मणके घरमें कार्यकर अपना निर्वाह करने लगी। वह विपत्तिसे पीड़ित थी, गेहूँ पीसते समय वह थोड़ेसे गेहूँ चुराकर रख लेती और उसीसे श्रुधासे पीड़ित अपने बच्चोंका पालन करती। कुछ समय बाद उर्मिलाका देहान्त हो गया। उर्मिलाका पुत्र बड़ा हो गया, वह अवन्तिसे मिथिला आया और पिताके राज्यको पुनः प्राप्तकर शासन करने लगा। उसकी बहन श्यामला विवाह-योग्य हो गयी थी। वह अत्यन्त रूपवती थी। अवन्तिदेशके राजा धर्मराजने उसके उत्तम रूपकी चर्चा सुनकर उसे अपनी रानी बना लिया।
एक दिन धर्मराजने अपनी प्रिया श्यामलासे कहा—'वैदेहिनन्दनि! तुम और सभी कामोंको तो करना, परंतु ये सात स्थान जिनमें ताले बंद हैं, इनमें तुम कभी मत जाना।' श्यामलाने 'बहुत अच्छा' कहकर पतिकी बात मान ली, परंतु उसके मनमें कुतूहल बना रहा।
एक दिन जब धर्मराज अपने किसी कार्यमें व्यस्त थे, तब श्यामलाने एक मकानका ताला खोलकर वहाँ देखा कि उसकी माता उर्मिलाको अति भयंकर यमदूत बाँधकर तस तेलके कड़ाहमें बार-बार डाल रहे हैं। लज्जित होकर श्यामलाने वह कमरा बंद कर दिया, फिर दूसरा ताला खोला तो देखा कि वहाँ भी उसकी माताको यमदूत शिलाके ऊपर रखकर पीस रहे हैं और माता चिल्ला रही है। इसी प्रकार उसने तीसरे कमरेको खोलकर देखा कि यमदूत उसकी माताके मस्तकमें लोहेकी कील ठोक रहे हैं, इसी तरह चौथेमें अति भयंकर शान उसका
- इनका मुख्य नाम सुदुम्न था, किंतु जन्मके समय पुत्रीरूपमें उत्पन्न होनेके कारण 'इला' और बादमें पुरुष-रूपमें परिवर्तित हो जानेपर 'इल' नाम हुआ। इनकी कथा प्रायः सभी पुराणों तथा महाभारत आदिमें भी आती है।
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